
अमरोहा (ब्यूरो)। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी से भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में अचानक सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। रविवार को नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात की तस्वीर खुद जयंत चौधरी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा की। इस तस्वीर के सामने आते ही वेस्ट यूपी के राजनीतिक गलियारों में कयासबाजी शुरू हो गई है कि क्या स्टार गेंदबाज शमी अब राजनीति की पिच पर अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।
जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट करते हुए मोहम्मद शमी जैसे महान क्रिकेटर से मुलाकात को एक सुखद और यादगार अनुभव बताया है।
17 महीने से क्रिकेट से दूर हैं शमी, कयासों को मिला बल
अमरोहा के सहसपुर अलीनगर गांव के रहने वाले मोहम्मद शमी पिछले करीब 17 महीनों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर चल रहे हैं। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था।
इसके बाद से ही इंग्लैंड और श्रीलंका दौरों के लिए भी उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिल सकी। ऐसे में जयंत चौधरी के साथ उनकी इस अनौपचारिक मुलाकात को क्रिकेट से इतर राजनीति में उनकी एंट्री के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, चुनाव लड़ने के सवालों पर फिलहाल न तो शमी के परिजनों ने और न ही रालोद के केंद्रीय नेताओं ने कोई आधिकारिक बयान दिया है। रालोद अमरोहा जिलाध्यक्ष सचिन चौधरी ने बताया कि इस मुलाकात के वास्तविक उद्देश्यों की जानकारी उन्हें अभी नहीं है।
अमरोहा में ‘सपा के महबूब अली’ की काट बन सकते हैं शमी
अमरोहा के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है:
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तुर्क बिरादरी में पैठ: मोहम्मद शमी ‘तुर्क’ बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। अमरोहा विधानसभा और आसपास के जोया (तुर्किस्तान) इलाके में इस बिरादरी का खासा राजनीतिक प्रभाव है।
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एनडीए को मजबूती: अमरोहा से लगातार जीतते आ रहे सपा के दिग्गज विधायक महबूब अली की मजबूत काट के रूप में शमी एनडीए गठबंधन (बीजेपी-रालोद) के लिए एक बड़ा चेहरा और विकल्प साबित हो सकते हैं। इसका लाभ एनडीए को पूरे मुरादाबाद मंडल की सीटों पर मिल सकता है।
परिवार का कोई अन्य सदस्य भी हो सकता है उम्मीदवार
अमरोहा के सियासी हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि शमी खुद प्रत्यक्ष रूप से चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो उनके परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में उतर सकता है। इससे पूर्व भी उनके बड़े भाई हसीब अहमद का नाम अमरोहा से स्थानीय निकाय या विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं में सामने आ चुका है।














