
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा में निधन हो गया। इस संबंध में गोवा पुलिस ने बीएनएसएस (BNSS) की धारा 194 के तहत अननेचुरल डेथ (अप्राकृतिक मृत्यु) का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को डोना पाउला (गोवा) स्थित उनके निवास पर अचेत पाए जाने के बाद उन्हें बांबोलिम के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की आगे की जांच पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) नितिन नाइक की देखरेख में चल रही है।
मामला दर्ज होने का कारण और कानूनी प्रक्रिया
डॉ डॉक्टरों के अनुसार, नाना पाटेकर को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उनका निधन हो चुका था (Brought Dead)। नियमानुसार, जब किसी व्यक्ति को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया जाता है, तो अस्पताल प्रशासन को पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होता है। इसके तहत इसे ‘मेडिको-लीगल केस’ (MLC) और अप्राकृतिक मौत के रूप में दर्ज कर पोस्टमॉर्टम कराया जाता है।
उल्लेखनीय है कि MLC दर्ज होना अपने आप में किसी अपराध या संदेहास्पद परिस्थिति का संकेत नहीं होता। यह प्रक्रिया केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करने और मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक दस्तावेज़ तैयार करने के लिए अपनाई जाती है।
निधन का प्राथमिक कारण
चिकित्सकों के अनुसार, शुरुआती जांच में निधन का कारण अचानक आया कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) माना जा रहा है। डॉक्टरों की टीम द्वारा लगभग 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) देने के बावजूद उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) में तीन डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी की गई।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे ग्रामीण के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस में राजकीय सम्मान (State Funeral) के साथ किया गया। उनके पुत्र मल्हार पाटेकर ने मुखाग्नि दी।
उनके निधन की खबर सामने आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फिल्म जगत की हस्तियों और प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। सिनेमा और रंगमंच में उनके अद्वितीय योगदान, दमदार अभिनय और विशिष्ट संवाद शैली के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।















