NEET-UG विवाद थमा : प्रधान का इस्तीफा, CJP का प्रोटेस्ट खत्म….. PM मोदी के मास्टरस्ट्रोक से विपक्ष का पूरा प्लान धराशायी

नई दिल्ली। देश की राजनीति और शिक्षा जगत के लिहाज से शनिवार का दिन ऐतिहासिक और भारी उथल-पुथल से भरा रहा। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को लेकर बीते 37 दिनों से चल रहा छात्रों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के साथ हुई मैराथन बैठकों के बाद अपना प्रदर्शन वापस लेने की आधिकारिक घोषणा कर दी। इस समझौते से ठीक पहले भारी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

दिनभर चले इस हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के बाद जहां एक तरफ केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपकर विपक्ष के हमलों को पूरी तरह बेअसर कर दिया।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बनी बात: सरकार ने मानीं CJP की तीनों मुख्य मांगें

दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रंका के साथ घंटों तक गहन वार्ता की। वार्ता के सफल होने के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया गया। CJP नेता सौरव दास ने कहा कि सरकार द्वारा तय समय-सीमा में सभी मांगें पूरी करने के पुख्ता आश्वासन के बाद ही आंदोलन वापस लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी लड़ाई किसी राजनीतिक श्रेय (क्रेडिट) के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लड़ी गई थी।

समझौते के तहत सरकार इन तीन प्रमुख मांगों पर सहमत हुई है:

  1. सभी दर्ज FIR की वापसी: प्रदर्शनकारी छात्रों या आयोजकों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी पुलिस केस व एफआईआर वापस ली जाएंगी। अकेले दिल्ली में ही 15 से 20 एफआईआर दर्ज थीं, जिनकी क्लोजर रिपोर्ट की कॉपियां तीन से चार दिनों के भीतर सौंपने का वादा किया गया है।

  2. 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा: पेपर लीक विवाद के दौरान अवसाद और तनाव के कारण जान गंवाने वाले पीड़ित छात्रों के परिजनों को सरकार 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान करेगी।

  3. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद से इस्तीफा, जो प्रक्रियात्मक रूप से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था।

CJP प्रतिनिधियों ने यह भी जानकारी दी कि चार सप्ताह के बाद उनका एक प्रतिनिधिमंडल देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों से दोबारा मुलाकात करेगा।

प्रधान का इस्तीफा और प्रह्लाद जोशी की त्वरित नियुक्ति

छात्रों के बढ़ते विरोध और विपक्ष के चौतरफा घेराव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया था। हालांकि शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि प्रधान अपने पद पर बने रहेंगे, इसलिए उनके अचानक इस्तीफे की खबर ने हर किसी को चौंका दिया।

लेकिन सरकार की ओर से मास्टरस्ट्रोक कुछ ही घंटों बाद देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र स्वीकार करते हुए वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। प्रह्लाद जोशी अब अपने वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा विभाग की कमान भी संभालेंगे। इस त्वरित फैसले ने विपक्षी दलों को किसी भी रणनीति या घेराबंदी का अवसर नहीं दिया और मंत्रालय में अनिश्चितता की स्थिति को तुरंत समाप्त कर दिया।

सोमवार को लोकसभा में पेश होगा नया सख्त संशोधन बिल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में परीक्षा धांधली रोकने के लिए एक ऐतिहासिक कानून लाने जा रही है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ को सदन में पेश करेंगे।

NEET-UG 2026 की परीक्षा में सामने आई बड़ी धांधलियों और प्रशासनिक चूकों के मद्देनजर लाए जा रहे इस संशोधन विधेयक में सात प्रमुख और सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इस बिल का मुख्य उद्देश्य कानून की मौजूदा कमियों को दूर करना, त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक ढांचा तैयार करना और परीक्षा लीक से जुड़े अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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