‘150 नहीं, 200 सीटों की थी बात’….यूपी में ‘मिशन विधानसभा’ पर INDIA अलायंस में घमासान! सपा-कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर खींचतान तेज, जानिए किसने क्या कहा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जैसे-जैसे आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को मात देने के लिए बने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया Block’ के भीतर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक साथ मैदान में उतरने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन अंदरखाने सीटों के गणित को लेकर तकरार खुलकर सामने आने लगी है। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की ओर से आ रहे बयानों ने राजनीतिक पारे को चढ़ा दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी सम्मानजनक हिस्सेदारी और अपनी बड़ी भूमिका की मांग पर अड़ी है, वहीं दूसरी तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव सीट से ज्यादा ‘जीत’ की गणित पर जोर दे रहे हैं।

‘150 नहीं, 200 सीटों का हकदार’: कांग्रेस का बड़ा दांव

गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक बड़ा बयान देकर सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। उन्होंने 150 सीटों की चर्चाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी ने असल में 200 सीटों की मांग रखी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गठबंधन में दोनों दलों को बराबर का सम्मान और बराबर की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जीत तभी संभव है जब सीटें मिलेंगी और चुनाव लड़ा जाएगा, बिना लड़े कोई कैसे जीत सकता है।

अक्टूबर में तय हो फॉर्मूला, झुकने को भी तैयार कांग्रेस

सीटों के बंटवारे में देरी को लेकर चिंता जताते हुए कांग्रेस प्रभारी ने मांग की है कि सीट शेयरिंग का यह उलझा हुआ मामला अक्टूबर के भीतर ही हर हाल में सुलझा लिया जाना चाहिए। इससे प्रत्याशियों को जमीन पर उतरकर तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन को बचाए रखने के लिए लचीला रुख अपनाने के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा दो मुख्य ताकतें हैं और दोनों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। जिस तरह भारत का संविधान लचीला है, उसी तरह कांग्रेस भी बातचीत में लचीली है। यदि गठबंधन के हित में थोड़ा झुकना भी पड़े, तो पार्टी झुकने से पीछे नहीं हटेगी।

‘बात सीट की नहीं, जीत की है’: अखिलेश यादव का करारा पलटवार

दूसरी तरफ, कांग्रेस के आक्रामक बयानों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बेहद सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए संदेश देते हुए साफ किया कि गठबंधन में यह मायने नहीं रखता कि किसके पास कितनी या कौन सी सीट जा रही है, बल्कि सबसे बड़ा मकसद भाजपा को हराना है। उन्होंने कहा कि जब मकसद साफ हो तो हाथ में हाथ होता है और निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान हो जाता है। मुख्य लड़ाई सीटों के आंकड़े की नहीं बल्कि संयुक्त प्रयास से जीत हासिल करने की है।

‘लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई’

अखिलेश यादव ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यह जीत केवल गठबंधन के घटक दलों की नहीं, बल्कि उस साझी कोशिश की होगी जो देश के सौहार्द, संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। उनका मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि भाजपा की नीतियों से आरक्षण और संविधान पर आंच न आए तथा सांप्रदायिकता को करारा जवाब मिले। सपा का मानना है कि सीटों के आंकड़ों में उलझने के बजाय उन सीटों पर ध्यान केंद्रित किया जाए जहां भाजपा को आसानी से पटखनी दी जा सकती है।

2022 के नतीजों का कड़वा सच और सियासी समीकरण

यूपी विधानसभा के पिछले यानी 2022 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो इस खींचतान की मुख्य वजह साफ समझ आती है। 2022 में भाजपा ने 403 विधानसभा सीटों में से 255 सीटों पर पूर्ण बहुमत के साथ जीत हासिल की थी और उसका वोट शेयर 41.29 प्रतिशत रहा था। वहीं अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 111 सीटें और 32.06 प्रतिशत वोट शेयर हासिल कर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। इसके विपरीत, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। बसपा को महज एक सीट (12.88% वोट) और कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें (2.33% वोट) हासिल हुई थीं। इसी प्रदर्शन के आधार पर सपा जहां अपना पलड़ा भारी मान रही है, वहीं कांग्रेस नए सिरे से अपना जनाधार मजबूत करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर दावा ठोक रही है।

 

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