
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intense Revision) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार विवादों के घेरे में आ गए हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दो जूनियर चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर असहमति जताते हुए 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके बाद कांग्रेस, अन्य विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने चुनाव आयोग व केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रमुख अपडेट्स और ताजा राजनीतिक घटनाक्रम
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अभिजीत दीपके का अल्टीमेटम और ‘2 अक्टूबर’ से आंदोलन की चेतावनी:
CJP के संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से शनिवार तक इस्तीफा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सीईसी इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से लोकतंत्र की रक्षा के लिए देशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। इससे पहले उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और मार्च का ऐलान भी किया।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जोरदार हंगामा:
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों (निजामुद्दीन भट, इरफान हफीज लोन, इफ्तिखार अहमद) ने पोस्टर लहराते हुए नारेबाजी की और “वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ” के नारे लगाए।
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दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और पोस्टर वार:
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी (DPCC) के ओबीसी विभाग ने दिल्ली में “ज्ञानेश कुमार हटाओ, चुनाव आयोग बचाओ” के पोस्टर लगाए। भारतीय युवा कांग्रेस ने 5, रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च का ऐलान किया है।
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का बयान:
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और आरोपों पर सफाई देने की जिम्मेदारी सीईसी की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम विरोध करना है, लेकिन चुनाव आयोग को आम जनता का भरोसा बनाए रखना चाहिए।
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छत्तीसगढ़ सीएम विष्णु देव साय का पलटवार:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी हार पर आत्ममंथन करने के बजाय चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाती है। जब वे जीतते हैं तो व्यवस्था सही लगती है, और हारने पर ईवीएम व आयोग पर दोष मढ़ते हैं।
विपक्ष और CJP की प्रमुख मांगें
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SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच: मतदाता सूचियों से कथित तौर पर हटाए गए लाखों नामों और प्रक्रिया में अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
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पुरानी मतदाता सूची की बहाली: जिन वैध मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए।
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नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार: मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए।















