ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘जन महाभियोग’ आज,  अमित शाह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को दिया खुला चैलेंज

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर तय विपक्षी दलों का जन महाभियोग कार्यक्रम शुक्रवार को मौसम की बेरुखी और मूसलाधार बारिश के चलते निर्धारित समय पर नहीं हो सका, जिसके बाद अब यह अहम कार्यक्रम आज यानी शनिवार को आयोजित किया जाएगा. इंडिया ब्लॉक के दिग्गज सांसदों और नेताओं के साथ खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बात की आधिकारिक जानकारी साझा की है. हालांकि, इस प्रतीकात्मक जन महाभियोग और आगामी 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की विशाल महारैली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और दोनों खेमों की ओर से तीखे बयानों का दौर लगातार जारी है.

बारिश के कारण टला महाभियोग, राहुल बोले- ‘हम सब एकजुट’

शुक्रवार को मौसम खराब होने के कारण कार्यक्रम स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर मजबूती से खड़ा है क्योंकि हम सब मिलकर वोट चोरी के खिलाफ देश के संविधान की रक्षा कर रहे हैं. यह किसी एक दल का अलग-अलग प्रदर्शन नहीं है, बल्कि भारत के मूल विचार और देश की आम जनता के अमूल्य वोट की रक्षा करने की एक साझा और बड़ी लड़ाई है. विपक्षी नेताओं का साफ तौर पर आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार, गृह मंत्री अमित शाह, चुनाव आयोग और बीजेपी मिलकर भारतीय लोकतंत्र को लगातार कमजोर और नष्ट कर रहे हैं. इसके साथ ही राहुल गांधी ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों की सरकारें कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 1 नवंबर को दिल्ली में होने जा रही विपक्ष की महारैली में शामिल होने से जबरन रोक रही हैं, जिस पर पलटवार करते हुए बीजेपी ने इन बयानों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा करार दिया है और राहुल गांधी से इसके पुख्ता सबूत मांगे हैं.

अमित शाह की दो टूक: हिम्मत है तो संसद के अंदर चर्चा करें

विपक्ष के इन तमाम कदमों और बयानों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ से बेहद करारा पलटवार किया है. उन्होंने विपक्षी दलों को ‘मॉक संसद’ जैसी नौटंकी छोड़कर सीधे असली संसद भवन में आकर चर्चा करने की खुली चुनौती दी है. शाह ने तंज कसते हुए कहा कि वे लगातार यह आरोप लगाते हैं कि देश में चुनावों के दौरान वोट चोरी हुई है, इसलिए मैं आज यहां से अखिलेश यादव और राहुल गांधी को खुले तौर पर चुनौती देता हूं कि बीजेपी संसद के पटल पर इस विषय पर खुली चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है और हमसे छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि अगर विपक्ष में वास्तव में हिम्मत है तो वे संसद में आएं, जिसके लिए हम एक विशेष सत्र बुलाने को भी तैयार हैं, लेकिन असलियत यह है कि वे संसद के अंदर खुलकर बोलना ही नहीं चाहते हैं और सदन की कार्यवाही को चलने न देकर लगातार हो-हल्ला व व्यवधान पैदा करते हैं. गृह मंत्री ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई टीम मैच हार जाती है तो वह मैदान पर ज्यादा अभ्यास करती है, लेकिन राहुल बाबा और अखिलेश यादव अलग मिट्टी के बने हैं क्योंकि ये मैच हारने के बाद सीधे अंपायर यानी चुनाव आयोग पर ही चीटिंग का बेबुनियाद आरोप मढ़ने लगते हैं. इसके अलावा शाह ने एक अन्य बयान में यहां तक कह दिया कि राहुल गांधी अगले 20 वर्षों तक देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे, जिस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने साफ किया कि आगामी 2029 के चुनावों में केंद्र की बीजेपी सरकार की विदाई अब पूरी तरह तय है.

1 नवंबर को मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकलेगा मार्च

भले ही शुक्रवार को आयोजित होने वाला जन महाभियोग कार्यक्रम बारिश की वजह से टल गया हो, लेकिन विपक्ष ने आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होने वाली महारैली के लिए अपना विस्तृत और पुख्ता रोडमैप सबके सामने रख दिया है. राहुल गांधी ने जानकारी देते हुए बताया कि 1 नवंबर को दोपहर ठीक 12 बजे तमाम विपक्षी सांसद और दिग्गज नेता मिंटो रोड तथा कनॉट प्लेस के मुख्य जंक्शन पर इकट्ठा होंगे और वहीं से अपने इस विरोध मार्च की शुरुआत करेंगे. इसी निश्चित जंक्शन से सभी प्रमुख विपक्षी नेता विशेष रूप से तैयार की गई बसों में एक साथ सवार होकर सीधे रामलीला मैदान के लिए रवाना होंगे, जहां एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया जाएगा.

नेताओं के बीच छिड़ी तीखी जुबानी जंग

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं की तरफ से बयानों के तीर लगातार छोड़े जा रहे हैं. समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव का कहना है कि देश के आम लोगों को अब अच्छी तरह एहसास हो चुका है कि बीजेपी अपनी जीत का जो ढकोसला पीटती है, वह असल में केवल चुनावी हेरफेर और बेहतर मैनेजमेंट का नतीजा है. वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि आज हर कोई दल इस मंच पर एक साथ खड़ा है, जो हमारे लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक प्लस पॉइंट है और हम इस निर्णायक लड़ाई को मिलकर जरूर जीतेंगे. दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष की ओर से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष का एकमात्र मुख्य इरादा देश में सिर्फ अराजकता और भ्रम फैलाना है, जबकि उन्हें बैठकर इस बात पर गंभीरता से मंथन और चिंतन करना चाहिए कि देश की जनता ने देश की सबसे पुरानी पार्टी को पूरी तरह से नकार क्यों दिया है. बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि भारत में एक बहुत ही अजीब स्थिति देखने को मिल रही है कि नेता प्रतिपक्ष कभी आकाशवाणी भवन के अंदर घुस जाते हैं तो कभी प्रधानमंत्री आवास के ठीक सामने सड़क पर लेटे हुए नजर आते हैं, और अब तो यह तक कहा जा रहा है कि फैसले और चीजें किसी चर्चा से नहीं बल्कि प्रतिरोध से तथा संसद के बजाय सड़क से तय की जाएंगी. इसके अलावा बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष इस बात को बहुत अच्छी तरह से जनता है कि वे कभी भी जनता का वास्तविक विश्वास जीतकर चुनाव नहीं जीत सकते, इसलिए वे सोची-समझी रणनीति के तहत देश में अराजकता फैलाकर किसी भी प्रकार से सत्ता परिवर्तन यानी ‘रेजीम चेंज’ का असफल प्रयास कर रहे हैं.

दिल्ली के व्यापारियों की बढ़ी टेंशन, त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होने की आशंका

एक तरफ जहां देश की राजधानी दिल्ली का सियासी पारा लगातार उफान पर है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के आम व्यापारियों और कारोबारियों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI इस प्रस्तावित महारैली को दीपावली के त्योहार के मद्देनजर टालने या इसकी तारीख बदलने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पहले ही तीन बार पत्र लिख चुका है. हालांकि, उधर से किसी भी तरह का संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद अब CTI ने सीधे तौर पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र प्रेषित किया है. CTI का साफ तौर पर कहना है कि वर्तमान में सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली के तमाम बड़े बाजारों में दीपावली के त्योहार के कारण खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है, ऐसे में इस बड़ी रैली और मार्च के आयोजन से शहर का यातायात पूरी तरह से चरमरा जाएगा और बुरी तरह बाधित होगा, जिसका सीधा और नकारात्मक असर व्यापारियों के कारोबार, बिक्री और उनकी आजीविका पर पड़ेगा. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस बात को स्पष्ट किया है कि उनका संगठन किसी भी राजनीतिक दल की रैली का प्रत्यक्ष रूप से विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि वे सिर्फ त्योहारी सीजन और ग्राहकों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस रैली को दीपावली के बाद आयोजित करने की विनम्र अपील कर रहे हैं, हालांकि सोनिया गांधी के कार्यालय की तरफ से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जवाब नहीं आया है.

 

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