मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों की जमकर तारीफ की है। विदेश नीति से जुड़े एक प्रमुख मंच (वाल्दाई क्लब) को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी उन गिने-चुने वैश्विक नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के साथ बेहद मजबूत और व्यक्तिगत संबंधों के बावजूद लगातार यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने का मुद्दा उठाते हैं।
पुतिन ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी इस पूरे मामले में एक तटस्थ रुख अपनाते हैं, लेकिन युद्ध को जल्द से जल्द रोकने में उनकी गहरी व्यक्तिगत रुचि है। पुतिन के अनुसार, पीएम मोदी ने दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान निकालने के लिए कई बहुत अच्छे और व्यावहारिक विचार साझा किए हैं। रूस शांतिपूर्ण तरीकों से इस संघर्ष को समाप्त करने की भारत की मंशा और पीएम मोदी की पहल का सम्मान करता है।
यदि सीमा पर हुआ सीधा हमला तो ‘सभी हथियारों’ का होगा इस्तेमाल: पुतिन
एक तरफ जहां पुतिन ने पीएम मोदी के शांति प्रयासों सराहा, वहीं दूसरी ओर नाटो और पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया। मॉस्को और नाटो के बीच बढ़ते तनाव पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि रूस किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। हालांकि, अगर रूसी क्षेत्र पर सीधा हमला होता है, तो मॉस्को अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने पास मौजूद ‘सभी हथियारों’ के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा।
पश्चिमी देशों पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश बाल्टिक सागर में सैन्य अभ्यास बढ़ा रहे हैं और रूसी जहाजों को जब्त कर तनाव को न्योता दे रहे हैं। पुतिन ने साफ कहा कि अगर रूस को डराने या घेरने की कोशिश की गई, तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा।
कालिनिनग्राद पर नाकाबंदी की आहट से भड़का मॉस्को
नाटो और रूस के बीच यह तल्खी मॉस्को की उस गंभीर चेतावनी के बाद बढ़ी है, जिसमें कालिनिनग्राद क्षेत्र का जिक्र किया गया था। कालिनिनग्राद पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित रूस का एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक इलाका है, जहां रूस का बाल्टिक नौसेना बेस स्थित है और वहां परमाणु सक्षम इस्कंदर मिसाइलें तैनात हैं।
रूस का दावा है कि उसके पास ऐसी गुप्त जानकारी है कि नाटो कालिनिनग्राद की हवाई और नौसैनिक नाकाबंदी की तैयारी कर रहा है। मॉस्को ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कालिनिनग्राद को बाकी रूस से अलग करने की कोई भी कोशिश हुई, तो अपनी रक्षा के लिए तुरंत और अनिवार्य रूप से सभी उपलब्ध सैन्य संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा।
भारत-रूस आर्थिक गलियारा और उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर पर बड़ा अपडेट
शांति वार्ता और नाटो को चेतावनी के अलावा पुतिन ने भारत के साथ व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का खाका भी पेश किया। उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच सहयोग केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक मायने हैं।
पुतिन ने उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का जिक्र करते हुए बताया कि रूस इस अंतरराष्ट्रीय परियोजना के लिए ऋण संसाधन देने को तैयार है। इस मार्ग का एक हिस्सा अजरबैजान से होकर गुजरेगा, जिस पर राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ सकारात्मक बातचीत हो चुकी है। अब केवल ईरान को अपने हिस्से का काम पूरा करना है। इसके साथ ही बाल्टिक और उत्तरी समुद्री मार्गों के जरिए भारतीय व्यापारिक जहाजों के सुगम आवागमन को लेकर भी बातचीत जारी है।
नाटो ने खारिज की चेतावनी, कहा- हम किसी खतरे की वजह नहीं
दूसरी ओर, नाटो ने रूस की परमाणु बयानबाजी और चेतावनियों का कड़ा विरोध किया है। नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने पुष्टि की कि मॉस्को की ओर से संदेश मिला है, लेकिन नाटो एक रक्षात्मक संगठन है और उसकी कोई भी गतिविधि कालिनिनग्राद या रूस के किसी अन्य हिस्से के लिए खतरा पैदा नहीं करती।
नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भी रूस से परमाणु धमकियां बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गठबंधन का ध्यान यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा करने और उसे हर संभव सैन्य व आर्थिक सहायता प्रदान करने पर केंद्रित रहेगा ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
















