
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। 10 सीटों के लिए होने जा रहे इस चुनाव में पर्चा दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है। इससे ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकते हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) अपने तीसरे प्रत्याशी को लेकर सस्पेंस खत्म करने की तैयारी में है। दोनों खेमों में जारी हलचल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सपा ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि बीजेपी की ओर से नौ पर्चे खरीदे गए हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अगर अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा देखने को मिलेगा।
सपा का तीसरा दांव: रामगोपाल और धनराज नथवानी के बाद कौन?
समाजवादी पार्टी अपने दो उम्मीदवारों—प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी के नामों का ऐलान कर चुकी है और दोनों ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। हालांकि, पार्टी के तीसरे प्रत्याशी को लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि यदि आवश्यक संख्या बल का इंतजाम हो जाता है, तो तीसरा उम्मीदवार भी उतारा जाएगा। सपा को अपनी तीसरी सीट निकालने के लिए करीब आधा दर्जन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की दरकार होगी।
बीजेपी की रणनीति और हरदीप सिंह पुरी का नाम सबसे आगे
दूसरी ओर, बीजेपी ने भी उत्तर प्रदेश से अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। सियासी गलियारों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सबसे प्रमुखता से चल रहा है, क्योंकि उनका मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। नामांकन के बाद 7 अक्टूबर को पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है। यदि दोनों दलों ने अतिरिक्त प्रत्याशी उतारे, तो 9 अक्टूबर तक यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि 10वीं सीट के लिए सीधा मुकाबला होगा या नहीं।
क्या है यूपी विधानसभा में सीटों का गणित?
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में इस समय 397 विधायक मौजूद हैं। इस गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी प्रत्याशी को 38 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होगी।
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एनडीए का संख्या बल: बीजेपी नीत एनडीए के पास कुल 291-292 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसमें बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक शामिल हैं। इसके अलावा जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के 2 विधायकों का रुख भी अहम रहेगा।
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सपा गठबंधन का आंकड़ा: सपा और कांग्रेस को मिलाकर विपक्षी गठबंधन के पास कुल 103 विधायक हैं।
11-12 वोटों का वो गणित, जिसने फंसाया पेंच
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक:
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बीजेपी की स्थिति: बीजेपी को 7 सीटें आसानी से जीतने के लिए 266 विधायकों के वोटों की जरूरत होगी। इसके बाद भी बीजेपी के पास करीब 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचते हैं। हालांकि, अपनी 8वीं सीट जिताने के लिए बीजेपी को 12 और अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना पड़ेगा।
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सपा की स्थिति: सपा को अपनी 2 सीटें सुरक्षित करने के लिए 76 वोटों की आवश्यकता है। इसके बाद सपा के पास भी लगभग 27 सरप्लस वोट बचेंगे। सपा को अपनी तीसरी सीट पर जीत हासिल करने के लिए 11 अतिरिक्त वोटों की दरकार है।
यही 11 से 12 वोटों की खींचतान इस राज्यसभा चुनाव को बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर में बदल रही है।












