‘आयकर अफसर का पद छोड़ा, 10 साल झुग्गियों में बिताए… सीएम पद नहीं, देश ही मेरी मंजिल’: पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक मीडिया कार्यक्रम में अपनी राजनीतिक यात्रा, शासन मॉडल और देश की वर्तमान व्यवस्था पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति का ध्येय पार्टी का विस्तार या व्यक्तिगत करियर बनाना कभी नहीं था, बल्कि हमेशा से देश ही उनकी पहली प्राथमिकता रहा है। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए आप सुप्रीमो ने कहा कि वे भविष्य की चिंता किए बिना आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त (जॉइंट कमिश्नर) का पद छोड़कर 10 सालों तक झुग्गियों में रहे और जमीनी स्तर पर काम किया।

‘अगर तब लोकपाल बिल बन जाता तो पार्टी कभी न बनानी पड़ती’

लोकपाल आंदोलन के दिनों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य शुरू से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ देश को एक बेहतर व्यवस्था देना था। अगर तत्कालीन सरकार आंदोलन के समय ही सख्त लोकपाल बिल बना देती, तो हमें कभी राजनीतिक दल का गठन नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि आज देश जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, उन्हें सुधारने के लिए ही हमें मजबूरन राजनीति में कदम रखना पड़ा। हमारा मकसद केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि देश को एक सही दिशा देना है।

सरकारी ठेकों की पारदर्शी व्यवस्था और ऑनलाइन नीलामी से राजस्व बढ़ा

दिल्ली में अपनी सरकार के दौरान किए गए प्रशासनिक सुधारों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने बताया कि पहले जितने भी सरकारी या निजी ठेके दिए जाते थे, उनमें कोई नीलामी प्रक्रिया नहीं होती थी। अफसरशाही अपनी मर्जी से हर साल 10 से 15 प्रतिशत एडहक फीस बढ़ाकर चहेते लोगों को ठेके बांट देती थी, जिससे भारी भ्रष्टाचार होता था। हमने इस भ्रष्ट तंत्र को खत्म कर ऑनलाइन ऑक्शन (नीलामी) की पारदर्शी व्यवस्था लागू की। इसका नतीजा यह हुआ कि सरकार का राजस्व दो से तीन गुना तक बढ़ गया।

जेल से सरकार चलाने का फैसला: ‘विपक्ष की सरकारें गिराने की साजिश को नाकाम करना था मकसद’

जेल जाने के बाद इस्तीफा देने के सवाल पर आप सुप्रीमो ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेजना और फिर चुनी हुई सरकारें गिराना एक तय पैटर्न बन चुका था। हेमंत सोरेन, पिनरई विजयन और ममता बनर्जी जैसे नेताओं की सरकारों का उदाहरण देते हुए केजरीवाल ने कहा कि इस साजिश को रोकने के लिए ही उन्होंने जेल से सरकार चलाने का साहसिक फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज ने भी इस बात को माना था कि जेल से सरकार क्यों नहीं चल सकती, बिल्कुल चल सकती है।

वोटर लिस्ट में हेरफेर और एसडीएम की शक्तियां छीनने का आरोप

चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि 75 सालों से चली आ रही उस संवैधानिक व्यवस्था को बदला जा रहा है, जिसमें स्थानीय एसडीएम किसी भी नागरिक का वोट जोड़ने या हटाने का अधिकार रखता था। उन्होंने हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि एक नए सॉफ्टवेयर के जरिए एसडीएम की शक्तियां छीन ली गई हैं। गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां 97 लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को चिट्ठियां लिखनी पड़ीं, जबकि यह काम सीधे एसडीएम स्तर पर होना चाहिए था।

‘अगर जनता का वोट देने का अधिकार छीना गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’

अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सत्ता के इशारे पर किसी का भी नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला है। लोकतंत्र की आत्मा यही है कि अगर जनता अपनी सरकार से खुश नहीं है, तो वह चुनाव के जरिए उसे बदल सकती है। लेकिन इस तरह के हथकंडों से लोकतंत्र का सत्यानाश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए पंजाब में आम आदमी पार्टी की एक मजबूत टीम बनाई गई है, जो पूरी प्रक्रिया पर 24 घंटे नजर रख रही है।

 

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