
- मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में आंकड़ों की समीक्षा, तीन या अधिक मौत वाले हादसों की होगी केस स्टडी
लखनऊ। राजधानी में सड़क सुरक्षा की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच लखनऊ में सड़क हादसों की संख्या के साथ मृतकों और घायलों का आंकड़ा भी बढ़ा है। इस अवधि में जिले में 1,264 सड़क हादसे हुए, जिनमें 478 लोगों की मौत हुई, जबकि 1,011 लोग घायल हुए। शनिवार को मंडलायुक्त कार्यालय में हुई मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क हादसों से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की गई।
मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को सड़क सुरक्षा के उपाय प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। लखनऊ संभाग में लखनऊ के अलावा उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और हरदोई जिले शामिल हैं।
लखनऊ में हादसे और मौत दोनों बढ़े
जनवरी से अगस्त 2025 की तुलना में 2026 में लखनऊ में सड़क हादसों की संख्या 1,130 से बढ़कर 1,264 हो गई। मृतकों की संख्या भी 432 से बढ़कर 478 पहुंच गई। इसी अवधि में घायलों का आंकड़ा 801 से बढ़कर 1,011 हो गया।
वहीं, पूरे लखनऊ संभाग में कुल सड़क हादसों की संख्या 4,437 से घटकर 4,400 हुई है, लेकिन मृतकों की संख्या 2,359 से बढ़कर 2,396 हो गई। संभाग में घायलों की संख्या भी 3,242 से बढ़कर 3,304 हो गई।
जिलेवार सड़क हादसों की स्थिति
लखनऊ में 2025 में 1,130 हादसे हुए थे, जो 2026 में बढ़कर 1,264 हो गए। रायबरेली में हादसे 573 से घटकर 494, सीतापुर में 665 से घटकर 658, हरदोई में 840 से घटकर 736 और उन्नाव में 704 से घटकर 674 हुए। वहीं, लखीमपुर खीरी में हादसों की संख्या 525 से बढ़कर 574 हो गई।
मृतकों की संख्या रायबरेली में 311 से घटकर 302 और हरदोई में 481 से घटकर 423 हुई। इसके विपरीत सीतापुर में 406 से बढ़कर 432 और लखीमपुर खीरी में 309 से बढ़कर 347 हो गई।
तीन या अधिक मौत वाले हादसों की होगी केस स्टडी
मंडलायुक्त ने तीन या इससे अधिक लोगों की मौत वाले हादसों के स्थलों की विस्तृत केस स्टडी कराने के निर्देश दिए। इसमें सड़क की स्थिति, वाहनों की गति, चालक की लापरवाही, यातायात व्यवस्था, रोशनी और दृश्यता समेत हादसे के संभावित कारणों की पड़ताल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केवल ब्लैक स्पॉट चिह्नित करना पर्याप्त नहीं है। हादसे के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनके आधार पर स्थायी सुधार कराया जाना चाहिए।
लखनऊ में 75, मंडल में 273 ब्लैक स्पॉट
सितंबर तक लखनऊ में 75 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें एनएचएआई की सड़कों पर 16, नेशनल हाईवे पर एक और पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर 54 ब्लैक स्पॉट शामिल हैं।
पूरे मंडल में कुल 273 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें एनएचएआई की सड़कों पर 98, नेशनल हाईवे पर 21 और पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर 150 ब्लैक स्पॉट हैं।
हिट एंड रन के 149 मामले, लखनऊ में सबसे ज्यादा 51
जनवरी से अगस्त तक पूरे मंडल में हिट एंड रन के 149 मामले दर्ज हुए, जिनमें 125 का निस्तारण किया जा चुका है। लखनऊ में सबसे अधिक 51 मामले सामने आए, जिनमें 43 का निस्तारण हो चुका है।
हरदोई में 49, लखीमपुर खीरी में 22, सीतापुर में 16, रायबरेली में नौ और उन्नाव में दो हिट एंड रन के मामले दर्ज हुए। मंडलायुक्त ने पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराने और पात्र मृतकों के आश्रितों व घायलों को आर्थिक सहायता दिलाने के निर्देश दिए।
मंडल में 575 स्कूली वाहनों की फिटनेस खत्म
मंडल में कुल 10,395 स्कूली वाहन दर्ज हैं। इनमें 7,088 वाहन विद्यालयों के नाम पंजीकृत हैं, जबकि 3,307 अनुबंध पर संचालित हो रहे हैं। इनमें 575 वाहनों की फिटनेस और 525 वाहनों के परमिट की अवधि समाप्त हो चुकी है।
लखनऊ में 253 वाहनों की फिटनेस और 118 के परमिट खत्म मिले। उन्नाव में यह संख्या क्रमश: 126 और 84, रायबरेली में 89 और 128, सीतापुर में 12 और 21, लखीमपुर खीरी में छह और 18 तथा हरदोई में 89 और 156 है।
मंडलायुक्त ने ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने और सभी विद्यालयों के वाहनों की सत्यापित सूची तैयार कराने के निर्देश दिए।
मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न पर कार्रवाई
परिवहन विभाग के अभियान में 364 वाहनों में मॉडिफाइड साइलेंसर और 948 वाहनों में प्रेशर हॉर्न पाए गए। इन मामलों में क्रमश: 6.73 लाख रुपये और 27.26 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
लखनऊ में 132 मॉडिफाइड साइलेंसर और 190 प्रेशर हॉर्न के मामले पकड़े गए। इन्हें लगाने वाले 55 गैराज और वर्कशॉप के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
गोल्डन ऑवर में कैशलेस इलाज पर जोर
बैठक में सड़क हादसों में घायल लोगों को गोल्डन ऑवर के दौरान कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। हादसा संभावित क्षेत्रों की मैपिंग कर घायलों को नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य, परिवहन और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए।
लखनऊ में 15 निजी अस्पतालों के साथ सभी राजकीय अस्पताल इस योजना में सूचीबद्ध हैं। वहीं, मंडल में तीन या उससे अधिक मौत वाले 26 सड़क हादसों की जनवरी से अगस्त के बीच जांच पूरी की जा चुकी है।
ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय, डीसीपी यातायात रवीना त्यागी, अपर जिलाधिकारी राज बहादुर, आरटीओ प्रशासन अरुण कुमार, एनएचएआई परियोजना निदेशक नवरत्न और संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा प्रदीप कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।














