सहारनपुर नकली सिक्का गिरोह का पर्दाफाश: 25 साल से सक्रिय मास्टरमाइंड उपकार लूथरा गिरफ्तार, 7 रजिस्टरों से खुलेंगे 70 करोड़ के काले नेटवर्क के राज

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने देश के सबसे बड़े नकली सिक्का बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करने के बाद अब इसके अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पिछले 25 वर्षों से फर्जी सिक्के बनाने के काले कारोबार में लिप्त मास्टरमाइंड उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह के पुराने संपर्कों और आर्थिक लेनदेन का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पुलिस के हाथ लगे सात हिसाब-किताब के रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन इस जांच की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं, जिनसे यह साफ होगा कि सहारनपुर से लेकर देश के अन्य राज्यों तक नकली सिक्कों का यह तंत्र कहां-कहां फैला हुआ था।

रोजाना 12 हजार सिक्के बनाने का इंडस्ट्रियल सेटअप; 6 भारी मशीनें और डाई बरामद

पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से जो मशीनें और उपकरण मिले हैं, वे किसी छोटे-मोटे धंधे के नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर चलने वाली अवैध फैक्ट्री का हिस्सा थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने सहारनपुर में प्रतिदिन 20 रुपये के करीब 12 हजार नकली सिक्के ढालने की क्षमता वाला इंडस्ट्रियल सेटअप तैयार कर रखा था।

  • बरामद उपकरण: पुलिस ने मौके से सिक्के ढालने वाली 6 मशीनें, लोहे की डाई, बिना मुहर और मुहर लगी डाई, पॉलिशिंग मशीन, घिसाई के पत्थर, ब्रश और भारी संख्या में अधबने सिक्के बरामद किए हैं।

  • फिनिशिंग की व्यवस्था: सिक्के तैयार करने के बाद उनकी चमक और फिनिशिंग को असली जैसा दिखाने के लिए हर तरह के आधुनिक औजार इस अवैध सेटअप में मौजूद थे।

70 करोड़ से अधिक के सिक्के खपाने का अनुमान, 7 रजिस्टरों से खुलेगी कुंडली

पुलिस की प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि यह गिरोह अब तक बाजार में 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के खपा चुका है। हालांकि सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अभिनंदन के मुताबिक, सटीक आंकड़ा खंगालने के लिए बरामद 7 रजिस्टरों और 8 मोबाइल फोन के डेटा की फोरेंसिक जांच की जा रही है।

रजिस्टरों में दर्ज लेनदेन, ट्रांसपोर्टरों के विवरण और खरीदारों के फोन नंबरों के जरिए उन लोगों तक पहुंचने की तैयारी है जो बाजार में इन सिक्कों की सप्लाई चेन संभालते थे। गिरोह के 8 सदस्यों में से 5 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 अन्य मुख्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटे कारोबारियों के जरिए खपाए जाते थे सिक्के

मास्टरमाइंड उपकार लूथरा (मूल निवासी मोहाली, पंजाब) वर्ष 2001 से इस अपराध में शामिल है और दिल्ली पुलिस द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित रह चुका है। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह अपने नकली सिक्कों को ऐसी जगहों पर खपाता था जहां रोज हजारों छोटे नकद लेनदेन होते हैं।

  • प्रमुख ठिकाने: शराब की दुकानें, हाईवे टोल प्लाजा, सब्जी मंडियां और छोटे व्यापारी।

  • पहचान में मुश्किल: नकली सिक्के फिनिशिंग में इतने सटीक बनाए जाते थे कि आम आदमी के लिए असली और नकली 20 रुपये के सिक्के में अंतर कर पाना लगभग नामुमकिन था।

सहारनपुर में अपना नया बेस स्थापित कर बड़े पैमाने पर सिक्कों की छपाई शुरू करने से ठीक पहले ही पुलिस की संयुक्त टीम ने इस गिरोह को दबोच लिया। अब पुलिस इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रही है कि सहारनपुर में उन्हें स्थानीय स्तर पर किसकी मदद मिल रही थी।

 

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