नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के ग्राहकों से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एसबीआई के ग्राहकों का अहम निजी डेटा डार्क वेब पर लीक होने की आशंका जताई गई है, जिससे बैंक ग्राहकों के बीच हड़कंप मच गया है। इस गंभीर सुरक्षा चूक के सामने आने के बाद बैंक ने खुद इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है और मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। एसबीआई ने शेयर बाजारों को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपते हुए यह जानकारी दी है कि साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तमाम जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
16 अक्टूबर को मिला था अलर्ट, 3.75 लाख रिकॉर्ड्स की हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत 16 अक्टूबर 2026 को हुई, जब एसबीआई को उसकी थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस देने वाली एजेंसी और ‘रक्षा साइबर एजेंसी’ के साथ-साथ देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा संस्था CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम) की तरफ से एक महत्वपूर्ण अलर्ट प्राप्त हुआ।
अलर्ट मिलते ही बैंक ने तत्काल प्रभाव से शुरुआती जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान डार्क वेब पर मौजूद लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड्स को खंगाला गया। जब इन डेटा का गहराई से तकनीकी विश्लेषण किया गया, तो यह बात सामने आई कि इनमें से 3,897 ग्राहकों के ऐसे रिकॉर्ड्स मौजूद हैं, जिनमें उनकी व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी बेहद संवेदनशील और निजी जानकारियां शामिल हैं।
लीक डेटा में क्या-क्या है शामिल?
संभावित रूप से डार्क वेब पर उजागर हुए इस डेटा में ग्राहकों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से:
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ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर
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जन्मतिथि (Date of Birth) और नाम
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जेंडर और ईमेल आईडी
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घर का पूरा आवासीय पता (Residential Address)
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बैंक शाखा का नाम और CIF पहचान नंबर
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लोन से जुड़े रिकॉर्ड्स का मेटाडेटा
जानकारों का मानना है कि जब किसी व्यक्ति की इतनी सारी निजी जानकारियां एक साथ डार्क वेब पर पहुंच जाती हैं, तो उसके साथ साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud), फिशिंग अटैक और फर्जी कॉल आने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
एसबीआई ने उठाया सख्त कदम, स्वतंत्र एजेंसी कर रही जांच
डेटा लीक का अलर्ट मिलते ही बैंक प्रबंधन ने बिना एक पल गंवाए अपने सभी अहम साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल एक्टिव कर दिए। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है, जो CERT-In के आधिकारिक पैनल में शामिल है।
इस विस्तृत जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि डार्क वेब पर जो डेटा लीक होने का दावा किया जा रहा है, उसकी प्रामाणिकता और सच्चाई कितनी है। इसके साथ ही, जांच टीम इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रही है कि आखिर यह डेटा लीक कहां से और किस स्रोत से हुआ है। बैंक का मुख्य उद्देश्य भविष्य में ग्राहकों के सामने किसी भी प्रकार के बड़े जोखिम को पूरी तरह से रोकना है।
बैंकिंग सेवाओं और ग्राहकों के पैसों पर क्या पड़ा असर?
इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उनके बैंक खाते और पैसे सुरक्षित हैं? इस पर एसबीआई ने स्पष्ट रूप से भरोसा दिलाया है कि इस घटना से बैंक के मुख्य कारोबारी कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन या व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।
बैंक ने कहा है कि ग्राहकों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बैंकिंग से जुड़ी सभी सेवाएं और सर्वर पूरी तरह सुरक्षित हैं और बिना किसी रुकावट के लगातार सुचारू रूप से चल रहे हैं। बैंक इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


















