सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर खुद को बीमार समझने लगे लोग, जानिए क्यों

सोशल मीडिया पर इन दिनों मानसिक बीमारियों और उनके लक्षणों की जानकारी देने वालों की बाढ़ आ गई है। तथाकथित विशेषज्ञ अलग.अलग प्लेटफॉर्म पर इस बारे में बात कर रहे हैंए लेकिन किशोर.किशोरियों के लिए यह सिलसिला बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। वे सोशल मीडिया के रील व वीडियो देखकर खुद को बीमार समझने लगे हैं।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के वीडियो देखकर खुद में वैसे लक्षण ढूंढ़ रहे हैं। ऑनलाइन ही बीमारी डायग्नोज करने के बाद उसके इलाज के लिए भी इन्हीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के वीडियो और रील देख.सुन रहे हैं।

सोशल मीडिया की सलाह पर भरोसा कर रहे टीनएजर्स
अमेरिका की मनोचिकित्सक एनी बार्क बताती हैंए असल में ये किशोर अक्सर बीमार ही नहीं होतेए बस वीडियो में बताए गए लक्षणों के आधार पर खुद को बीमार मान लेते हैं। वे सोशल मीडिया की ऐसी गिरफ्त में हैं कि अपनी बीमारी का नाम भी खुद ही बताते हैं। समस्या तब और भी बड़ी बन जाती हैए जब वे मनोचिकित्सकों की सलाह की बजाय इलाज के लिए सोशल मीडिया के तथाकथित विशेषज्ञों पर भरोसा करते हैं। टीनएजर्स इन वीडियो पर बताए जाने वाले तरीकों को पूरे विश्वास के साथ आजमाते भी हैं।

बार्क कहती हैंए कई बार समान लक्षण होने के बावजूद एक व्यक्ति को मानसिक बीमारी हो सकती हैए जबकि दूसरे को नहीं। यह उम्र पर भी निर्भर करता हैए जैसे समान लक्षण वाला किशोर मानसिक तौर पर फिट हो सकता हैए जबकि बुजुर्ग मानसिक तौर पर बीमार हो सकता है। वे कहती हैंए ऐसा लगता है जैसे अपने मरीजों के इलाज से ज्यादा उन्हें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के चंगुल से बाहर निकालने में मुश्किल आती है।

मानसिक बीमारियों को लेकर जागरूकता का अभाव
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मुख्य विज्ञानी मिक प्रिंसटन कहते हैंए जागरूकता के अभाव में लोग नहीं चाहते कि उनकी मानसिक बीमारी के बारे में लोग जानें। इसलिए लोग खासकर किशोर अपने लक्षणों के आधार पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी बीमारी के बारे में पता करने की कोशिश करते हैं। ऑनलाइन कई प्रश्नोत्तरी भी आसानी से मिल जाएंगी।

दरअसल टिकटॉक से लेकर फेसबुकए इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम ही ऐसा है कि आप जो सर्च करते हैंए उसी तरह के कंटेंट आते रहते हैं। अमेरिकन मनोचिकित्सक संघ के अध्यक्ष अनीश दुबे कहते हैं कि अगर बच्चा सोशल मीडिया पर देखे किसी वीडियो के बारे में बात कर रहा है तो उसे सुनें। इसे बच्चे से स्वस्थ संबंध बनाने के मौके के तौर पर देखेंए ताकि वह हर बात बता सके।

दबाव को मानसिक बीमारी समझ लेते हैं
डॉक्टर प्रिंसटन कहते हैंए बच्चे अपनी किसी तात्कालिक समस्या से हुए तनाव को मानसिक बीमारी समझ लेते हैं। इसे ऑनलाइन सर्च करने की वजह यह भी है कि घर में भी किसी बड़े के पास उन्हें सुनने का समय नहीं है। मार्च में हुए अध्ययन में पता चला कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हैशटैग मेंटल हेल्थ पर 100 वीडियो को 100 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया।

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