सीतापुर : कृषि उत्पादन बढ़ाने व पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत करने में मधुमक्खी की अहम भूमिका

सीतापुर । विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र कटिया सीतापुर में मधुमक्खी के सामाजिक एवं आर्थिक महत्व पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केंद्र के प्रभारी अध्यक्ष डॉ डी एस श्रीवास्तव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मधुमक्खियां सबसे बड़ी परागणकर्ता हैं। वर्तमान में मधुमक्खियों की कालोनिया परजीवियों, बीमारियों और कृषि कीटनाशकों के कारण बड़े खतरों में हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व की लगभग 35% कृषि अभी भी परागणकों पर निर्भर है।

पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने एवं कृषकों की आय बढ़ाने हेतु मधुमक्खी पालन को अधिक से अधिक बढ़ावा देना होगा। केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि मधुमक्खी पालन भारत की सबसे पुरानी प्रथाओं में से एक है. नतीजतन, भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शहद बाजारों में से एक बन गया है । जिसके परिणामस्वरूप नवाचार और गुणवत्ता के मामले में तीव्र प्रतिस्पर्धा हुई है।

मधुमक्खी पालन के महत्व और “मीठी क्रांति” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समग्र मधुमक्खी पालन विकास की आवश्यकता महसूस की गई नतीजतन भारत सरकार ने वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के समग्र प्रचार और विकास और गुणवत्ता वाले शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों के उत्पादन के लिए “राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम)” नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है. युवा उद्यमी एवं प्रगतिशील मौन पालक अचल वर्मा ने किसानों को अपनी मौन पालन की यात्रा एवं सफलता की कहानी बताते हुए किसानों को समझाया कि आज मेरी सामाजिक पहचान एवं आर्थिक आजीविका लाभ का कारण मौन पालन बन चुका है इसमें लागत लाभ अनुपात 1 : 3 के साथ साथ कृषि उत्पादन भी बढ़ रहा है।

पशुपालन वैज्ञानिक डॉ आनंद सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज जरूरत है कि एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाय, स्थानीय किसानों के कच्चे शहद को बढ़ावा दिया जाय। जब भी संभव हो जंगली मधुमक्खी कालोनियों की रक्षा की जाय, बगीचों में विविध प्रकार के देशी पौधे और फूल आदि लगायें जाएं। जिससे इस कार्य को बढ़ावा मिल सके।सस्य वैज्ञानिक डॉ शिशिर कांत सिंह ने सरकार की योजनाओ पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ओर से दिये गये 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज में 500 करोड़ रुपये, समेकित मधुमक्खीपालन विकास केन्द्र (आईबीडीसी) को दिये गये हैं ताकि मधुमक्खीपालक किसानों के लिए आधारभूत ढांचे का विकास हो सके।

केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक सचिन प्रताप तोमर ने इस क्षेत्र से जुड़े हुए तमाम व्यवसाय के लागत व लाभ पर वार्ता करते हुए महिला कृषक समूहों को इससे जुड़ने हेतु आवाह्न किया। कार्यक्रम में विसवां विकास खंड से विश्वनाथ , रमेश मिश्रा, वीरेन्द्र कुमार, महोली से अचल वर्मा, आदित्य, अमित वर्मा, आशीष, परसेंडी से सुशील कुमार, रामचंद्र, सतीश कुमार हरगांव से श्रवण कुमार सहित कुल 33 कृषक व महिलाओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ योगेंद्र प्रताप सिंह ने किया।

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