
Revati, Ballia : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से पुलिसिया बर्बरता का एक ऐसा गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। रेवती थाने की पुलिस पर एक निर्दोष बुजुर्ग रामजी गौड़ को बेरहमी से पीटने और उनकी मौत का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस उनके बेटे को पकड़ने आई थी, लेकिन जब वह नहीं मिला तो बुजुर्ग पिता को उठाकर थाने ले गई और वहां ‘थर्ड डिग्री’ का इस्तेमाल किया। इलाज के दौरान बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।
बुजुर्ग की पहचान रामजी गौड़ उम्र लगभग 65 वर्ष के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश और तनाव का माहौल है।
मामूली विवाद और पुलिस पर बर्बरता का आरोप
7 जुलाई 2026 (दोपहर करीब 3:00 बजे): रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट ग्राम सभा स्थित खेदन चौराहा पर दो युवकों के बीच मामूली बात को लेकर मारपीट हुई थी। झड़प इतनी मामूली थी कि किसी भी पक्ष को गंभीर चोट नहीं आई थी।
आरोप है कि दूसरे पक्ष ने कथित तौर पर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए रेवती थाने में तहरीर दे दी। इस तहरीर में रामजी के बेटे का नाम भी शामिल था।
8 जुलाई 2026 (दोपहर करीब 1:30 बजे): जब विशाल थाने नहीं पहुंचा, तो पुलिस की एक टीम उसके घर पहुंच गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर पर महिलाओं के साथ गाली-गलौज की। जब विशाल घर पर नहीं मिला, तो पुलिस जबरन उसके बुजुर्ग पिता को घसीटते हुए गाड़ी में बैठाकर थाने ले गई।
पीड़ित परिवार का गंभीर आरोप: थाने में दी गई थर्ड डिग्री
मृतक रामजी गौड़ के परिजनों ने रोते हुए पुलिस की बर्बरता की जो कहानी बताई, वह बेहद गंभीर है।
“पुलिस मेरे पिता को जबरन थाने ले गई। वहां लॉकअप में उनके साथ जानवरों की तरह बेरहमी से मारपीट की गई। जब उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वह चलने-फिरने लायक नहीं रहे और मरणासन्न हो गए, तो पुलिस डर गई। पुलिस ने उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय अपनी सरकारी गाड़ी से लाकर घर से महज 200 मीटर दूर (मुखिया के पास) सड़क पर लावारिस हालत में छोड़ दिया और भाग निकली।”
परिजनों ने आनन-फानन में अचेत अवस्था में रामजी गौड़ को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) रेवती में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल बलिया रेफर कर दिया। बलिया से भी डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए वाराणसी (बनारस) रेफर कर दिया, जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए इलाज के दौरान बुजुर्ग की मौत हो गई।
आमने-सामने: पुलिस का पक्ष बनाम अधिकारियों का बयान
इस पूरे मामले में जहां एक तरफ जनता का गुस्सा फूट रहा है, वहीं पुलिस महकमा अपना पक्ष रखते हुए आरोपों को नकार रहा है।
रेवती पुलिस का पक्ष
पुलिस पर लगाए गए मारपीट के सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बुजुर्ग रामजी को थाने में प्रताड़ित नहीं किया गया था, बल्कि उन्हें ‘मनीष’ नामक एक स्थानीय व्यक्ति के सुपुर्द (हैंडओवर) कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार, थाने की यह पूरी प्रक्रिया और बुजुर्ग के सकुशल बाहर जाने की घटना सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद है।
क्षेत्राधिकारी (CO) का आधिकारिक बयान
मामला बढ़ता देख क्षेत्राधिकारी ने इस पूरे प्रकरण की जांच की बात कही है। हालांकि, शुरुआती जांच के आधार पर क्षेत्राधिकारी ने रेवती पुलिस को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मौजूदा स्थिति: छावनी में तब्दील इलाका
बुजुर्ग रामजी गौड़ की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पीड़ित परिवार अब इंसाफ की मांग को लेकर अड़ा हुआ है। इलाके में किसी भी अप्रिय घटना या बवाल को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
अब देखना यह होगा कि क्या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बुजुर्ग के शरीर पर चोटों के निशान सामने आते हैं या फिर खाकी अपने रसूख के दम पर इस मामले को दबाने में कामयाब रहती है। मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है।











