राज्यसभा चुनाव की 10वीं सीट पर फंसा पेंच: सपा और भाजपा में सेंधमारी की होड़, क्रॉस वोटिंग से ही तय होगी जीत-हार !

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की 10वीं सीट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ही इस निर्णायक सीट पर कब्जा जमाने के लिए एक-दूसरे के खेमे में सेंधमारी करने की पुरजोर रणनीति में जुट गए हैं। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, न तो सपा के पास अपनी तीसरी सीट सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े हैं और न ही भाजपा के पास अपनी 8वीं सीट जिताने के लिए पूरा संख्या बल उपलब्ध है। ऐसे में यह साफ हो चुका है कि 10वीं सीट का नतीजा केवल विधायकों द्वारा की जाने वाली क्रॉस वोटिंग (दलगत निष्ठा से हटकर मतदान) पर ही निर्भर करेगा।

395 विधायक ही डाल सकेंगे वोट, जीत का जादुई आंकड़ा हुआ 36

मौजूदा विधानसभा की स्थिति को देखें तो जेल में निरुद्ध सपा विधायक रमाकांत यादव का मतदान करने आना तय नहीं हो सका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधानसभा की 7 सीटें वर्तमान में रिक्त चल रही हैं। इस गणना के आधार पर चुनाव में अधिकतम 395 मत ही पड़ने की संभावना है। इस संख्या बल के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट पर जीत हासिल करने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 36 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होगी।

सपा के सामने 9 अतिरिक्त वोटों की चुनौती, एनडीए के विधायकों पर नजर

सपा के पास अपने बागी विधायकों को अलग करने के बाद, सहयोगी दल कांग्रेस के 2 विधायकों को मिलाकर कुल 99 विधायकों का प्रभावी संख्या बल बचता है। पार्टी को अपनी तीनों सीटें जिताने के लिए कुल 108 वोटों की दरकार है, यानी उसे अपनी तीसरी सीट के लिए 9 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा। सपा रणनीतिकारों का दावा है कि सुभासपा के दो विधायक (अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय) उनके पाले में मतदान करेंगे। उल्लेखनीय है कि जगदीश नारायण राय ने पिछले राज्यसभा चुनाव में भी सपा उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया था।

भाजपा के 6-7 विधायक और दो मंत्री संपर्क में होने का दावा

समाजवादी पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि एनडीए गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) के कई विधायक आगामी चुनाव में टिकट की पक्की गारंटी मिलने की शर्त पर पाला बदलने को तैयार बैठे हैं। सपा सूत्रों का यहां तक कहना है कि भाजपा सरकार के दो ऐसे मंत्री भी उनके संपर्क में हैं, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में अपना टिकट कटने की आशंका है। इनमें से एक पश्चिमी यूपी से आते हैं और रालोद से गठबंधन के कारण असहज महसूस कर रहे हैं, जबकि दूसरे मंत्री की सपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी हो चुकी है। पार्टी का मानना है कि भाजपा के 6 से 7 विधायकों के साथ उनका समन्वय बना हुआ है, जिसके दम पर वे अपनी तीसरी सीट आसानी से निकाल लेंगे।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha