
उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही राजनीतिक गहमागहमी चरम पर पहुंच गई है। राज्य के चुनावी रण में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने अपने सहयोगी दलों की नाराजगी और पार्टी के भीतर उठते असंतोष के सुरों को साधने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। एनडीए (NDA) के प्रमुख घटक दलों के बदलते रुख और भीतरघात की आशंकाओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी उत्तर प्रदेश दौरे को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
निषाद पार्टी और सुभासपा के बदलते सुर
विधानसभा चुनाव करीब आते ही एनडीए के सहयोगी दलों ने सीटों के बंटवारे और अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने की राजनीति तेज कर दी है:
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निषाद पार्टी की चेतावनी: निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के तेवरों ने बीजेपी आलाकमान को असहज कर दिया है। दिल्ली में आयोजित एक रैली के मंच से संजय निषाद ने निषाद समुदाय के आरक्षण के मुद्दे पर फैसला न होने की स्थिति में अलग राह चुनने (दूसरा दरवाजा देखने) का खुला अल्टीमेटम तक दे दिया है।
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सुभासपा में बगावत और सपा की सेंधमारी: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की सियासी जमीन को कमजोर करने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) लगातार सुभासपा के असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में खींचने में लगी है। पार्टी में जारी अंदरूनी बगावत एनडीए के समीकरणों को बिगाड़ सकती है।
गोरखपुर से बगावत: बीजेपी एमएलसी ने सपा प्रत्याशी के पक्ष में उठाई आवाज
एमएलसी चुनावों के बीच पूर्वांचल के राजनीतिक गढ़ गोरखपुर में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बागी तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने एक वीडियो व चिट्ठी जारी कर शिक्षकों व युवाओं के सम्मान की दुहाई दी और अप्रत्यक्ष रूप से अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान कर दिया। सपा नेताओं के साथ उनकी लगातार मुलाकातों और शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी के समर्थन के संकेतों ने बीजेपी खेमे में खलबली मचा दी है।
टिकट कटने का डर, असंतोष और राजा भैया से नजदीकी
हालिया राज्यसभा और एमएलसी चुनावों में नए चेहरों को मौका दिए जाने के बाद से पार्टी के पुराने व वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी की सुगबुगाहट है। गोंडा क्षेत्र में कई नेताओं का पाला बदलकर सपा में जाना बीजेपी के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, गोंडा से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के भी भावी राजनीतिक रुख को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
इन संभावित सियासी नुकसानों की भरपाई के लिए बीजेपी नए सहयोगियों को साधने में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ‘राजा भैया’ से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की हालिया मुलाकात को एनडीए का दायरा बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
30 अक्टूबर को लखनऊ आ रहे अमित शाह, संभालेंगे चुनावी कमान
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 अक्टूबर को लखनऊ पहुंच रहे हैं।
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समन्वय बैठक: शाह एनडीए के सहयोगी दलों (निषाद पार्टी, सुभासपा, अपना दल-एस) के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक कर उनकी शिकायतों को दूर करने और सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर चर्चा कर सकते हैं।
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चुनावी प्रबंधन: वे पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष को शांत करने और जिला व मंडल स्तर पर नेताओं के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने की ठोस रणनीति तैयार करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में करीब तीन महीने से अधिक का समय बाकी होने के कारण समीकरणों को साधने का पर्याप्त अवसर है, और अमित शाह का यह दौरा एनडीए के कुनबे को एकजुट रखने में निर्णायक साबित हो सकता है।


















