
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। दोपहर दो बजे के करीब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 1200 अंकों से ज्यादा की जबरदस्त गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी टूटकर 23,070 के अहम स्तर के आसपास मंडराता नजर आया। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में अप्रत्याशित उछाल और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने घरेलू निवेशकों के विश्वास को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है।
19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बाजार में इस भारी तबाही के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड का 5.106 फीसदी तक पहुंचना है, जो वर्ष 2007 के बाद यानी बीते 19 सालों का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके साथ ही 2 साल की बॉन्ड यील्ड भी 4.9 फीसदी के आंकड़े के करीब आ गई है। दरअसल, सितंबर महीने में आए अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में मजबूती दर्ज की गई है, जिसके कारण यील्ड में यह उफान आया है। बॉन्ड यील्ड के आकर्षक होने से निवेशक जोखिम भरे इक्विटी मार्केट यानी शेयर बाजार से पैसा निकालकर फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में लगाने लगते हैं, जिससे शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर सीधा असर पड़ा है।
फेड रिजर्व द्वारा फिर ब्याज दरें बढ़ाने का खौफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी मौद्रिक समीक्षा में फिर से ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका को तेज कर दिया है। बाजार में इस बात के कयास तेज हो गए हैं कि अक्टूबर में फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। यदि दरें ऊंची रहती हैं तो कंपनियों और अर्थव्यवस्था के लिए कर्ज काफी महंगा हो जाएगा, जिससे कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे पर नकारात्मक असर पड़ना तय है। यही वजह है कि खासकर हाई वैल्यूएशन वाले शेयरों में निवेशक अपनी पॉजिशन खाली करते नजर आ रहे हैं।
क्रूड ऑयल 102 डॉलर के पार, भारत की बढ़ी चिंताएं वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते कूटनीतिक तनाव और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतों में यह आग लगी है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, ऐसे में क्रूड का महंगा होना देश के आयात बिल को बढ़ाएगा, जिससे सीधे तौर पर घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
रुपये में एतिहासिक गिरावट और एफआईआई की बिकवाली कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भारतीय रुपये को बुरी तरह तोड़ दिया है। हालिया कारोबारी सत्र में रुपया 95.87 के निचले स्तर के आसपास चला गया। कमजोर होते रुपये से आयातित सामान की लागत बढ़ जाती है, जिससे भारतीय कंपनियों के इनपुट कॉस्ट पर भारी दबाव पड़ता है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बेतहाशा बिकवाली से स्थानीय निवेशकों का मनोबल भी चरमरा गया है।
बजाज फाइनेंस समेत दिग्गज शेयरों का बुरा हाल गुरुवार के कारोबारी सत्र में दिग्गजों की चौतरफा कुटाई देखने को मिली। सेंसेक्स के शेयरों में बजाज फाइनेंस सबसे बड़ा लुज़र साबित हुआ और इसमें 5 फीसदी से ज्यादा की बड़ी सेंधमारी हुई। इसके अलावा एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर भी 3 से 4 फीसदी तक टूट गए। बिकवाली के इस तूफान से इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और ट्रेंट जैसे हैवीवेट शेयर भी अछूते नहीं रहे। केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में भी जबर्दस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
लाल निशान में सिमटे सभी सेक्टोरल इंडेक्स बाजार का मूड किस कदर बिगड़ा हुआ था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निफ्टी के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में लाल-लाल नजर आए। प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में करीब 2 फीसदी का बड़ा कट देखने को मिला। मार्केट ब्रेड्थ भी बेहद खराब रही और चढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले गिरने वाले शेयरों की संख्या कई गुना अधिक रही। यह इस बात का साफ संकेत है कि गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित न होकर पूरे बाजार में फैली हुई थी। फिलहाल, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बॉन्ड यील्ड, क्रूड ऑयल और अमेरिकी फेड की दरों को लेकर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक बाजार में ऐसी ही अस्थिरता बनी रह सकती है।













