जकात को बनाया कारोबार, बना ली कोठियां -फर्जी रसीद छपवाकर रमजान माह में चंदा इकट्ठा कर रहें तथाकथित लोग
लियाकत मंसूरी मेरठ। इस्लाम धर्म के पांच मूल स्तंभों में से एक ‘जकात’ माना जाता है। हर मुस्लमान को अपने धन में से जकात की अदायगी जरूरी है। यह दान धर्म नहीं बल्कि, धार्मिक कर या टैक्स माना जाता है और फर्ज भी है। शरीयत में जकात उस माल को कहते हैं, जिसे इंसान अल्लाह … Read more









