नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को लेकर अक्सर नई जानकारियां सामने आती रहती हैं। अरुणाचल प्रदेश के टक्सिंग सर्कल में स्थित असफिला (Asaphila) और लोंगजू (Longju) इलाके भारत और चीन के बीच एलएसी (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाओं (Perceptions) के कारण लंबे समय से संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि, डिफेंस सोर्सेज का कहना है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्थिर है और सुरक्षा बल इसे पूरी सख्ती व संयम के साथ संभाल रहे हैं।
गश्त के दौरान होता है आमना-सामना, लेकिन ग्राउंड कमांडर्स बनाए हुए हैं पूरा संयम
ऐतिहासिक रूप से विवादित माने जाने वाले इन सीमावर्ती इलाकों में समय-समय पर तनाव की स्थिति इसलिए बन जाती है, क्योंकि दोनों देशों की सेनाओं द्वारा नियमित गश्त (Patrolling) के दौरान अक्सर आमना-सामना हो जाता है। सुरक्षा माहौल में इस तरह का फेस-ऑफ होना अब आम बात हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के सैनिकों के बीच किसी भी प्रकार की हिंसक झड़प की कोई खबर नहीं है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि दोनों पक्षों के ग्राउंड कमांडर्स पूरी तरह संयम, पेशेवर रुख और कड़े ऑपरेशनल कंट्रोल का पालन कर रहे हैं।
फ्लैग मीटिंग और हॉटलाइन से सुलझते हैं विवाद, कॉर्प्स कमांडर स्तर की बातचीत रही सफल
सीमा पर उत्पन्न होने वाली फेस-ऑफ की स्थितियों को सुलझाने के लिए स्थानीय स्तर पर फ्लैग मीटिंग्स और हॉटलाइन कम्युनिकेशन जैसे मिलिट्री-टू-मिलिट्री मैकेनिज्म का लगातार उपयोग किया जाता है, जिससे किसी भी लोकल तनाव को तुरंत शांत किया जा सके।
इसके साथ ही, पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कॉर्प्स कमांडर-लेवल की बातचीत भी बेहद सफलतापूर्वक आयोजित की गई है। यह कदम बॉर्डर पर दीर्घकालिक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संस्थागत और उच्च-स्तरीय संवाद की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अधिकारियों का मानना है कि भले ही ऑपरेशनल गतिरोध तत्काल चुनौतियां पैदा करते हैं, लेकिन इन मुद्दों पर लगातार संवाद से दोनों देश भविष्य में सीमा विवादों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
ITBP डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर का बड़ा खुलासा: असफिला में चीनी तंबूओं पर दिया बयान
इस बीच, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जुलाई महीने से चीनी पीएलए (PLA) सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान के अलवर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जानकारी दी कि असफिला जैसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में चीनी सैनिकों ने भारत की समझ वाली एलएसी से महज छह से सात किलोमीटर के दायरे में अपने तंबू गाड़ रखे हैं।
दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास और सामाजिक बदलाव
सीमाई क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की निरंतर मौजूदगी और सरकार के प्रयासों से इन दूरदराज के इलाकों में सामाजिक-आर्थिक विकास को भारी बढ़ावा मिल रहा है। ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित रहे इन क्षेत्रों में अब ऑल-वेदर रोड (सड़कें), पुल, टेलीकम्युनिकेशन और नागरिक सुविधाओं जैसे बुनियादी ढांचे को तेजी से अपग्रेड किया जा रहा है।
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कनेक्टिविटी और व्यापार: बेहतर परिवहन माध्यमों से भविष्य में कंट्रोल्ड बॉर्डर ट्रेड, स्थानीय नागरिकों के बीच आपसी संपर्क और लोकल इकोनॉमिक सेल्फ-रिलायंस (आत्मनिर्भरता) के नए रास्ते खुल रहे हैं।
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सांस्कृतिक महत्व: यह क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से भी बेहद समृद्ध है, जिसमें बौद्ध धर्म के पवित्र तीर्थ स्थल शामिल हैं। उदाहरण के लिए, ऐतिहासिक ‘त्सारी तीर्थ यात्रा सर्किट’ (Tsari Pilgrimage Circuit) सीमा के दोनों ओर रहने वाले समुदायों के लिए बेहद पवित्र है। सूत्रों का कहना है कि भविष्य में क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता आने से सीमा-पार तीर्थ यात्रा की सुविधाएं भी सुगम हो सकती हैं।
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जनजातीय समुदायों का उत्थान: सीमावर्ती इलाकों में तैनात सशस्त्र बलों द्वारा हेल्थकेयर कैंप, इमरजेंसी इवैक्यूएशन (आपातकालीन निकासी), स्कूलों का निर्माण और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं, जिससे रिमोट ट्राइबल कम्युनिटीज (दूरदराज के जनजातीय समुदायों) को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में बहुत बड़ी मदद मिल रही है।



















