
नई दिल्ली। दुनिया की आधी आबादी के नुमाइंदे, 40 फीसदी से ज्यादा वैश्विक जीडीपी के भागीदार, 11 सदस्य देश, 12 पार्टनर देश और संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत 5 अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की मजबूत मौजूदगी। कुल मिलाकर आधी से ज्यादा दुनिया की नुमाइंदगी करने वाले महाशक्तियों के इस सबसे बड़े कुंभ ’18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026′ का समापन भारत की राजधानी नई दिल्ली में हो गया है। दो दिनों के मैराथन मंथन के बाद जारी दिल्ली घोषणापत्र ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक तरक्की का नया रास्ता अब भारत की सरजमीं से होकर ही गुजरेगा। जब दुनिया के दो बड़े हिस्सों में युद्ध के बारूद की आग धधक रही है और युद्ध की तपिश से वैश्विक अर्थव्यवस्था का दम घुट रहा है, तब भारत ने भगवान बुद्ध के शांति संदेश के साथ इस ऐतिहासिक सम्मेलन की अगुवाई की। इस मंच पर एक तरफ यूक्रेन युद्ध में उलझे रूस के शीर्ष नेतृत्व से लेकर दूसरी तरफ पश्चिम के प्रतिबंधों में घिरे ईरान तक के नेता भारत पर भरोसा जताते हुए नई उम्मीदों के साथ पहुंचे थे।
ड्रैगन को झुकना पड़ा: पहलगाम हमला, टेरर फंडिंग और UNSC सुधार पर भारत की प्रचंड जीत
18वें BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत यह रही कि पाकिस्तान का हमदर्द बनने वाले चीन को भी भारत के सख्त रुख के आगे घुटने टेकने पड़े। बिना नाम लिए ही सही, लेकिन चीन ने पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने और टेरर फंडिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इतना ही नहीं, जो चीन हमेशा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के दावों और स्थायी सदस्यता के प्रस्तावों का रोड़ा बनता रहा था, उसे भी इस बार ब्रिक्स के मंच पर UNSC की संरचना में व्यापक सुधार और ‘ग्लोबल साउथ’ की हिस्सेदारी बढ़ाने की भारत की मांग का पुरजोर समर्थन करना पड़ा। चीन ने भारत के साथ सहयोग आगे बढ़ाने के लिए अपने डेटा, स्किल डेवलपमेंट, लोकल करेंसी के इस्तेमाल और बाजारों को लचीला बनाने के लिए रजामंदी दी है।
दिल्ली घोषणापत्र की 5 बड़ी बातें: ग्लोबल ट्रेड से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी तक की नई इबारत
तीन दिनों के गहन कूटनीतिक मंथन के बाद स्वीकार किए गए दिल्ली घोषणापत्र में 5 ऐतिहासिक फैसलों पर सभी सदस्य देशों ने मुहर लगाई है।
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आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: पहलगाम आतंकी हमले का विशेष उल्लेख करते हुए दुनिया भर से आतंकवाद की जड़ों को उखाड़ने और टेरर फंडिंग पर पूरी तरह सख्त प्रतिबंध लगाने पर पूर्ण सहमति बनी।
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युद्ध, शांति और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा: दुनिया में चल रही एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों पर गहरी चिंता जताते हुए युद्ध के बीच वैश्विक व्यापार को बचाने के लिए ‘कमर्शियल शिपिंग रूट्स’ को सुरक्षित रखने और सभी विवादों को शांतिपूर्ण कूटनीतिक बातचीत से सुलझाने का संकल्प लिया गया।
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ग्लोबल वैल्यू चेन (2026-2030) और टैरिफ वॉर पर लगाम: सदस्य देशों ने 2026 से 2030 तक के लिए एक-दूसरे के बाजारों को खोलने और आर्थिक सहयोग को रफ्तार देने पर सहमति जताई। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिना किसी ठोस वजह के मनमाने ढंग से एकतरफा टैरिफ लगाने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
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स्पेस टेक्नोलॉजी और पर्यावरण सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी गंभीर चुनौतियों पर नजर रखने के लिए ‘ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन सहयोग समझौते’ को औपचारिक मंजूरी दी गई।
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UNSC में व्यापक सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दशकों पुरानी व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग को दोहराया गया और विकासशील व पिछड़े देशों (ग्लोबल साउथ) की भागीदारी बढ़ाने का जोरदार आह्वान किया गया।
इस महासम्मेलन के सफल आयोजन के जरिए भारत ने न सिर्फ कूटनीतिक मोर्चे पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों को एक मंच पर लाकर खड़ा किया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की ठोस जमीन पर भी अपने सबसे मजबूत कदम आगे बढ़ा दिए हैं।













