
– सेंसेक्स 780 अंक टूटा, निफ्टी 25900 के नीचे
– निवेशकों के 8.11 लाख करोड़ स्वाहा…
– रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े बिल को ट्रम्प की मंजूरी, अगले हफ्ते संसद में वोटिंग, भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है अमेरिका
नई दिल्ली/वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों खासकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। अमेरिका के इस कदम का असर भारतीय शेयर बाजार में दिखा। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान पर बंद हुआ। बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 780.18 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 263.90 अंक या 1.01 प्रतिशत गिरकर 25,876.85 पर बंद हुआ। बीएसई के मार्केट कैप के आधार पर निवेशकों की संपत्ति में पिछले सत्र के 479.94 लाख करोड़ रुपये से 8.11 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 471.82 लाख करोड़ रुपये रह गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के कारण बाजार सूचकांकों पर दबाव बना रहा।
गौरतलब है कि रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि व्हाइट हाउस में उनकी ट्रम्प से मुलाकात हुई, जिसमें राष्ट्रपति ने बिल को हरी झंडी दे दी। यह बिल पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था। इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है। इस बिल का नाम सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को युद्ध लडऩे में मदद मिल रही है।
सेंसेक्स चार दिन में 1600 अंक टूटा
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बड़ी गिरावट आई है। सेंसेक्स और निफ्टी 50 में लगातार चौथे दिन भी गिरावट जारी रही। सिर्फ 4 दिन के दौरान ही शेयर बाजार से 1600 से ज्यादा अंक टूट गए हैं। वहीं निफ्टी में भी 2 फीसदी तक की गिरावट आई यानी करीब 400 अंक निफ्टी टूटा है। 2 जनवरी को सेंसेक्स 85,762.01 पर बंद हुआ था और 8 जनवरी को सेंसेक्स 84,180 पर क्लोज हुआ यानी करीब 1600 अंकों की गिरावट आई है। इसी तरह, निफ्टी 4 करोबारी दिनों के दौरान 400 अंक गिरकर 25876 पर बंद हुआ है। गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 780 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 84,181 पर आ गया, जबकि एनएसई सेंसेक्स 264 अंक या 1.01 प्रतिशत गिरकर 25,877 पर बंद हुआ। बाजार बंद होने के समय बिकवाली का भी दबाव रहा, जिससे बीएसई के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में लगभग 8.1 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई।
ट्रंप की टैरिफ चेतावनी और रूसी तेल पर फंसा पेंच
बाजार में घबराहट का एक मुख्य कारण अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका एक ऐसे विधेयक पर विचार कर रहा है जो रूसी आयात पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकता है, और इसका इस्तेमाल भारत जैसे देशों के खिलाफ भी किया जा सकता है जो रियायती रूसी तेल खरीद रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि भारत ने रूसी तेल आयात पर अमेरिकी चिंताओं को दूर नहीं किया, तो भारतीय सामानों पर उच्च टैरिफ लगाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा चुका है।
दिग्गज शेयरों और सेक्टरों में दबाव
बाजार की इस गिरावट की अगुवाई हेवीवेट स्टॉक्स कर रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों में भारी बिकवाली देखी गई है, जो इस सप्ताह 4 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, इन शेयरों में गिरावट फंडामेंटल कारणों से ज्यादा तकनीकी और सेटलमेंट गतिविधियों से प्रेरित है। सेक्टर के लिहाज से देखें तो मेटल इंडेक्स में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि आईटी इंडेक्स भी पिछले सत्र की बढ़त गंवाकर 1 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। रिटेल दिग्गज ट्रेंट के शेयरों में भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण दबाव देखा गया।
वेनेजुएला संकट और सुस्त वैश्विक संकेत
वैश्विक मोर्चे पर, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर कमोडिटी और तेल बाजारों पर पडऩे की आशंका है। इसके अलावा, एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा, जहां जापान का निक्केई 1.2 प्रतिशत और चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स 0.8 प्रतिशत नीचे गिरा।
घरेलू विकास दर में सुस्ती की आहट
घरेलू मोर्चे पर आर्थिक वृद्धि को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है, लेकिन रेटिंग एजेंसी इकरा (आईसीआरए) और एमके ग्लोबल का मानना है कि दूसरी छमाही में विकास दर धीमी हो सकती है। अमेरिकी टैरिफ का निर्यात पर प्रभाव और सरकारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में संभावित कमी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
निवेशकों के बीच अनिश्चितता की भावना
कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान के अनुसार, बाजार अभी नॉन-डायरेक्शनल (दिशाहीन) स्थिति में है। तकनीकी रूप से बाजार में 26,050/84,600 के स्तर से नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। जब तक बाजार प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार नहीं करता, ट्रेडर्स के लिए सतर्क रहना ही बेहतर रणनीति होगी।














