उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र स्थित ब्राह्मणी टोला मोहल्ले में सोमवार को कार पार्किंग और मंदिर के चबूतरे के निर्माण को लेकर हुए मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थानीय नेता शिवाजी तिवारी (62), उनके बेटे सुयश तिवारी (30) और भाई शिवेंद्र तिवारी (55) की सरेराह गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई।
इस सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड से पूरे इलाके में हड़कंप और भारी दहशत फैल गई है। सआदतगंज पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मर्चेंट नेवी कर्मचारी ऋषभ शुक्ला और उसकी तीन बहनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के पास से हत्या में इस्तेमाल की गई अवैध पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए हैं।
मंदिर में जल चढ़ाने के दौरान शुरू हुआ विवाद, sisters ने मंगवाया असलहा
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) जितेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार, शिवाजी तिवारी बीते जून महीने में शक्तिभवन से स्टेनो पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका बेटा सुयश बाजारखाला में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाता था और भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू लखनऊ विश्वविद्यालय (न्यू कैंपस) में क्लर्क थे।
सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे शिवाजी तिवारी घर के पास स्थित शिवाला (शिव मंदिर) में जल चढ़ाने गए थे। जब वह मंदिर की सीढ़ियों से उतर रहे थे, तभी पड़ोसी ऋषभ शुक्ला ने कार पार्किंग को लेकर उन्हें रोका और गाली-गलौज करने लगा। विवाद बढ़ने पर ऋषभ ने अपनी बहनों दिव्या, प्रीति और अदिति को इशारा कर घर से लाठी-डंडे और अवैध पिस्टल मंगवा ली।
एक-एक कर तीनों को गोलियों से भूना, अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित किया मृत
मृतक की भतीजी सुमेधा के अनुसार, आरोपी ऋषभ की बहनें और अन्य परिजन पथराव व लाठी-डंडे चलाने लगे। विवाद बढ़ता देख जब सुमेधा बीच-बचाव के लिए दौड़ी तो उसे धक्का दे दिया गया। इसके बाद ऋषभ ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
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पहली गोली: ऋषभ ने सबसे पहले शिवाजी तिवारी को मारी।
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दूसरी गोली: भाई शिवेंद्र तिवारी जब शिवाजी को बचाने दौड़े, तो ऋषभ ने उन्हें भी गोली मार दी।
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तीसरी गोली: गोलियों की आवाज सुनकर घर में सो रहा सुयश जब बाहर भागा, तो आरोपी ने उसे भी निशाना बना लिया।
तीनों खून से लथपथ होकर मौके पर ही गिर पड़े। पुलिस तीनों को तुरंत ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
5 दिसंबर को होनी थी सुयश की शादी, परिवार में पसरा मातम
इस भयानक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया। सुयश की चाची रुचि तिवारी ने बताया कि सुयश की शादी तय हो चुकी थी और 5 दिसंबर को विवाह होना था। 21 मई को सगाई हुई थी और 20 नवंबर को उपनयन संस्कार का कार्यक्रम था।
रविवार को ही परिवार बिजनौर के माती गांव स्थित ननिहाल में ‘देवाई’ का कार्यक्रम मनाकर लौटा था। घर में दिवाली और शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं, लेकिन एक ही झटके में तीन चिराग बुझने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
निहत्थे सिपाही कार्तिक ने दिखाई बहादुरी, आरोपी को दबोचा
घटना की सूचना जैसे ही कंट्रोल रूम को मिली, सआदतगंज थाने में तैनात सिपाही कार्तिक तुरंत मौके पर पहुंचे। सिपाही के पास उस समय कोई असलहा नहीं था, फिर भी उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला को मौके से ही दबोच लिया। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने सिपाही कार्तिक की इस बहादुरी के लिए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
घटना के बाद पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अर्पणा कुमार ने फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का जायजा लिया। मृतक शिवेंद्र की पत्नी रुचि तिवारी की तहरीर पर ऋषभ शुक्ला, उसके पिता दिनेश शुक्ला, चाचा राजेश शुक्ला (गुंडा एक्ट का आरोपी), गिरीश शुक्ला और बहनों प्रीति, दिव्या व अदिति के खिलाफ हत्या की नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।

















