
रूसी तेल और टाइटेनियम कारोबार में अमेरिकी कंपनियों की वापसी से लेकर यूरोप को फिर से रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू करने तक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक अभूतपूर्व और बड़ा दांव खेलने जा रहे हैं। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन और मॉस्को के बीच बैकचैनल के जरिए बड़े कारोबारी समझौतों (Business Deals) को फिर से बहाल करने पर गहन चर्चा चल रही है।
पाँचवें साल में प्रवेश कर चुके यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए ट्रंप इन आर्थिक समझौतों के जरिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति समझौते (Peace Treaty) की मेज पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, युद्ध समाप्त होने के बाद ही लागू होने वाले ये प्रस्ताव यूक्रेन और यूरोपीय सहयोगियों की चिंताएं बढ़ा रहे हैं।
सखालिन तेल परियोजना और द्रुजबा पाइपलाइन को फिर से चालू करने का बड़ा खाका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और रूस के अधिकारियों के बीच मुख्य रूप से दो प्रमुख ऊर्जा प्रस्तावों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है:
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सखालिन ऑयल प्रोजेक्ट: रूस के सुदूर पूर्व (Far East) में सखालिन तट के पास मौजूद संयुक्त तेल और गैस निष्कर्षण परियोजना को फिर से सक्रिय करना।
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द्रुजबा पाइपलाइन (Druzhba Pipeline): ऐतिहासिक द्रुजबा पाइपलाइन के नेटवर्क के माध्यम से यूरोपीय देशों को रूसी क्रूड ऑयल (Crude Oil) की सप्लाई बहाल करना।
ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने सितंबर की शुरुआत में मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई बैठक में इन आर्थिक ब्लूप्रिंट्स पर चर्चा की थी। रियल एस्टेट बैकग्राउंड से आने वाले विटकॉफ को अमेरिकी संसद (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों) में तीखी आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है, जहां आलोचकों का आरोप है कि उनका रुख पुतिन के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम है।
अबू धाबी में त्रिपक्षीय शांति वार्ता की उम्मीद, एक्सॉनमोबिल की भूमिका पर संशय
अगले महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी शहर में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय शांति वार्ता आयोजित होने की संभावना है। यदि यह बैठक होती है, तो यह फरवरी के बाद तीनों देशों की पहली सीधी बातचीत होगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये वित्तीय और व्यापारिक सौदे शांति योजना का मुख्य स्तंभ होंगे।
हालांकि, सखालिन परियोजना से बाहर हुई प्रमुख अमेरिकी ऊर्जा दिग्गज एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) ने पिछले साल स्पष्ट किया था कि उसकी रूस में वापसी की कोई मंशा नहीं है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कंपनी अपनी नीति में कोई बदलाव करेगी या नहीं।
टाइटेनियम उद्योग से लेकर डायरेक्ट फ्लाइट्स तक: सहयोग के नए रास्ते
तेल और गैस के अलावा, अमेरिका और रूस के बीच निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी सहयोग फिर से शुरू करने की बात चल रही है:
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टाइटेनियम विनिर्माण: विमान निर्माण (Aviation Industry) में इस्तेमाल होने वाले अति-महत्वपूर्ण टाइटेनियम धातु के उत्पादन में साझेदारी।
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रूसी हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग: अमेरिकी एयरलाइंस को रूसी एयरस्पेस से होकर उड़ान भरने की दोबारा अनुमति देना, जिससे एशिया-अमेरिका मार्गों पर ईंधन और समय की भारी बचत होगी।
ट्रंप और जेलेंस्की के संबंधों में बढ़ी कड़वाहट
वर्ष 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस पश्चिमी देशों के भारी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद मॉस्को के प्रति अमेरिकी नीति में नरमी देखी जा रही है। हाल ही में ट्रंप द्वारा रूस से हजारों बैरल डीजल खरीदने के समझौते को मंजूरी दिए जाने के बाद कीव और यूरोपीय सहयोगियों में तीव्र नाराजगी फैली है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका ने रूस के ऊर्जा निर्यात पर नए कड़े प्रतिबंध लगाने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और यूक्रेन पर रूसी रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले रोकने का दबाव बनाया है। दूसरी ओर, यूक्रेन को खुफिया जानकारी (Intelligence Input) देने में आ रही रुकावटों और स्टारलिंक (Starlink) इंटरनेट सेवा तक सीमित पहुंच ने ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच के तनाव को और गहरा कर दिया है।
इस बीच, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर ने राष्ट्रपति पुतिन से 90 मिनट लंबी फोन वार्ता कर युद्ध रोकने और तनाव कम करने की अपील की है। इसके जवाब में क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन ने युद्ध के लंबा खींचने के लिए पश्चिमी देशों की टकराव वाली नीतियों को ही जिम्मेदार ठहराया है।


















