लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर आए चुनावी नतीजों और रुझानों ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए इन नतीजों को सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। 72 जिलों को कवर करने वाली इन 11 सीटों पर बीजेपी ने अपने दिग्गजों की पूरी फौज उतार दी थी, लेकिन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि समाजवादी पार्टी ने कई इलाकों में सत्ता पक्ष को सीधे और कड़े मुकाबले की चुनौती दी है।
नतीजों का गणित: सपा को दो सीटों का फायदा, बीजेपी का आंकड़ा वहीं थमा
चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी ने 5 सीटों पर कब्जा जमा लिया है और 1 सीट पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी 2 सीटें जीत चुकी है और 3 अन्य सीटों पर आगे चल रही है। 2020 के पिछले चुनाव से तुलना करें तो बीजेपी 6 सीटों के अपने पुराने आंकड़े पर ही सीमित नजर आ रही है, जबकि सपा अपनी पुरानी 3 सीटों की संख्या में इजाफा करते हुए 5 सीटों तक पहुंचती दिख रही है। साफ है कि सीटों के लिहाज से बीजेपी को भले ही बड़ा नुकसान न दिख रहा हो, लेकिन सपा ने अपनी सीटों में बढ़ोतरी कर विधान परिषद में अपनी ताकत जरूर बढ़ा ली है।
वाराणसी और आगरा में फिर चौंके सब, झांसी-लखनऊ में भी बीजेपी को झटका
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाले नतीजे वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों से सामने आए हैं, जहां बीजेपी को एक बार फिर हार का मुंह देखना पड़ा है। 2020 में भी इन सीटों पर बीजेपी पीछे रही थी, और इस बार पूरी ताकत झोंकने व जनसभाओं के बावजूद सपा ने बाजी मार ली। इसके अलावा झांसी और लखनऊ की प्रतिष्ठित स्नातक सीटों पर भी बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। लखनऊ की अपनी पुरानी सीट पर बीजेपी पिछड़ती नजर आ रही है, वहीं झांसी सीट पर भी सपा ने अपनी बढ़त मजबूत बनाई रखी है।
सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर में कांटे की टक्कर
सबसे दिलचस्प और सांस थाम देने वाला मुकाबला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर की शिक्षक सीट पर देखने को मिल रहा है। गोरखपुर में बीजेपी के निवर्तमान एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी और सपा के संजयन त्रिपाठी के बीच मुकाबला था, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए। गोरखपुर में बीजेपी और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच महज कुछ वोटों की खींचतान चल रही है। अपने ही गढ़ में मिल रही इस कड़ी टक्कर ने बीजेपी के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड में खतरे की घंटी, पश्चिम यूपी ने बचाई बीजेपी की लाज
इन नतीजों का सबसे बड़ा संदेश पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इलाकों से निकला है। पूर्वांचल—जहां से मुख्यमंत्री खुद आते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिनिधित्व करते हैं—वहां बीजेपी को करारा झटका लगा है। वहीं बुंदेलखंड की एकमात्र सीट पर भी बीजेपी पिछड़ती दिखी। हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रूहेलखंड के इलाकों ने बीजेपी की साख बचा ली, जहां की 4 सीटों पर बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की है।
कुल मिलाकर, 2027 के महासमर से पहले आए इन नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भले ही बीजेपी का आधार बना हुआ है, लेकिन सपा की बढ़ती बढ़त सत्ताधारी खेमे के लिए आत्ममंथन का विषय जरूर बन गई है।


















