बैंकों में अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई जमा करते समय हर आम ग्राहक की यही एकमात्र उम्मीद होती है कि उसका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और जरूरत के वक्त उसके काम आएगा। लेकिन, जब देश के बैंकिंग सिस्टम के भीतर से ही करोड़ों रुपये के अनधिकृत और फर्जी ट्रांजैक्शन का सनसनीखेज मामला सामने आ जाए, तो पैसों की सुरक्षा को लेकर चिंता होना बिल्कुल स्वाभाविक है। हाल ही में महाराष्ट्र की वित्तीय राजधानी मुंबई में स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक यानी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से जुड़ा एक ऐसा ही बड़ा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग जगत और ग्राहकों दोनों को चौंका दिया है।
तीन दिनों में 187 फर्जी ट्रांजैक्शन से निकाले गए 13.96 करोड़ रुपये
सामने आई जानकारी के मुताबिक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले दिनों महज 3 दिनों के भीतर कुल 187 अनधिकृत ट्रांजैक्शन के जरिए 13.96 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम ट्रांसफर होने की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। हैरानी की बात यह है कि ये सारे पैसे किसी आम रास्ते से नहीं, बल्कि देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास मौजूद बैंक के आधिकारिक सेटलमेंट अकाउंट से निकाले गए हैं। इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद से ही बैंकिंग सेक्टर में सुरक्षा तंत्र को लेकर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और खाताधारकों के मन में लगातार यह डर सता रहा है कि क्या उनके सेविंग अकाउंट्स भी खतरे में हैं।
क्या ग्राहकों के व्यक्तिगत बैंक खातों से कटेंगे पैसे?
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा और अहम सवाल यही है कि क्या आम ग्राहकों को अपने बैंक खातों को लेकर घबराने की जरूरत है और क्या उनके खातों से पैसे कट सकते हैं? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक की तरफ से दर्ज कराई गई शिकायत में यह स्पष्ट किया गया है कि गायब हुए ये पैसे सीधे तौर पर ग्राहकों के व्यक्तिगत फंड से जुड़े थे, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ग्राहकों के पर्सनल सेविंग अकाउंट से सीधे पैसे डेबिट कर लिए गए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियों और बैंक की ओर से ऐसा कोई भी दावा या संकेत नहीं दिया गया है कि आम खाताधारकों के खातों से अलग से कोई कटौती की गई है।
इस तरह से अंजाम दिया गया करोड़ों रुपये का पूरा खेल
बैंक की आंतरिक शिकायत और जांच के मुताबिक, यह पूरा खेल महज 3 दिनों के भीतर बहुत ही शातिर तरीके से खेला गया। रिकॉर्ड बताते हैं कि 15 अक्टूबर को कुल 6 अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए गए, इसके अगले दिन यानी 16 अक्टूबर को इनकी संख्या बढ़कर 88 हो गई और 17 अक्टूबर को 93 संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए। इस प्रकार मात्र तीन दिनों के भीतर कुल 187 ट्रांजैक्शन के जरिए लगभग 13.96 करोड़ रुपये देश के 36 अलग-अलग बैंकों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
बैंकिंग सिस्टम से गायब मिला ट्रांजैक्शन का पूरा रिकॉर्ड
जब बैंक की इंटरनल ऑडिट और जांच टीम ने इन सभी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की गहराई से पड़ताल शुरू की, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि बैंकिंग के मुख्य रिकॉर्ड में इनका कोई भी डेटा मौजूद नहीं था। बैंक के आधिकारिक बयानों के मुताबिक, इन सभी ट्रांजैक्शन का कोई भी रिकॉर्ड बैंक की अपनी शाखाओं, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) और यहां तक कि आरटीजीएस (RTGS) सेटलमेंट रिकॉर्ड में भी दर्ज नहीं है। इससे साफ होता है कि मामला किसी आम ग्राहक से गलती से पैसा ट्रांसफर होने का नहीं है, बल्कि बैंक की शिकायत में सीधे तौर पर भुगतान से जुड़े मुख्य सॉफ्टवेयर और सर्वर तक अनधिकृत (अथॉराइज्ड) पहुंच बनाए जाने का गंभीर शक जताया गया है।
बैंकिंग सिस्टम में आखिर कहां हुई तकनीकी गड़बड़ी?
इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य रूप से IFTAS के सेंट्रल SFMS (Structured Financial Messaging System) सर्वर तक सेंध लगाने या अनधिकृत पहुंच बनाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। आपको बता दें कि IFTAS भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्वामित्व वाली ही एक प्रमुख सहायक कंपनी है, जो देश के विभिन्न बैंकों के बीच वित्तीय लेनदेन से जुड़े गोपनीय और सुरक्षित संदेश भेजने का काम करती है। जब भी आरटीजीएस (RTGS) जैसे बड़े सिस्टम के जरिए एक बैंक से दूसरे बैंक में भारी रकम भेजी जाती है, तो पेमेंट से जुड़े मैसेज इसी व्यवस्था के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। सामान्य प्रक्रिया में बैंक पहले भुगतान के निर्देश को अपने कोर बैंकिंग सिस्टम में दर्ज करता है, जिसके बाद पेमेंट मैसेज आगे बढ़ता है और सेटलमेंट की प्रक्रिया पूरी होती है। लेकिन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मामले में जिन ट्रांजैक्शन पर सवाल उठे हैं, वे बैंक के आम सिस्टम से गुजरे ही नहीं थे।
क्या ग्राहकों को अपना पिन और पासवर्ड बदल देना चाहिए?
इस पूरे प्रकरण पर बैंक या प्रशासन की तरफ से फिलहाल आम ग्राहकों के लिए अलग से कोई आधिकारिक चेतावनी या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में बैंक खाताधारकों को बिल्कुल भी घबराने या अपना खाता बंद करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अपनी वित्तीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ग्राहकों को कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। अपने बैंक खाते में आने वाले हर छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन के एसएमएस अलर्ट और बैंक स्टेटमेंट पर लगातार नजर रखें। यदि आपको अपने खाते में किसी भी प्रकार का कोई अनजान या संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे, तो बिना किसी देरी के तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। इसके अलावा, अपने वन-टाइम पासवर्ड (OTP), एटीएम पिन और नेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी के साथ भी शेयर न करें। हालांकि बैंक ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है, लेकिन अतिरिक्त सुरक्षा के लिए आप चाहें तो अपने एटीएम कार्ड का पिन या यूपीआई (UPI) पासवर्ड अपनी मर्जी से बदल सकते हैं।


















