फॉर्म-6 में बदलाव पर बवाल: कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मंशा पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए फॉर्म-6 में किए गए हालिया बदलावों को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक करार दिया है। पार्टी ने इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल संज्ञान लेने और शीर्ष चुनावी अधिकारी की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है।

बिना अधिसूचना के ऑनलाइन फॉर्म में नए नियम जोड़ने का आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस विवाद को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म-6 में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के गुपचुप तरीके से बदलाव कर दिया गया। इस फॉर्म में एक नया और अनिवार्य खंड जोड़ दिया गया है, जिसमें पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं से यह जानकारी मांगी जा रही है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछले एसआईआर में शामिल था या नहीं। कांग्रेस का तर्क है कि यह नया प्रावधान खासकर युवाओं के पंजीकरण में बड़ी बाधा पैदा कर रहा है।

कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन और अधिकार क्षेत्र का सवाल

जयराम रमेश ने ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के पास मतदाता पंजीकरण फॉर्म में एकतरफा संशोधन करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार का बदलाव करने की शक्ति सिर्फ केंद्र सरकार के पास निहित है, और इसके लिए संसद को सूचित करना अनिवार्य होता है। उन्होंने दावा किया कि आयोग ने संवैधानिक मर्यादाओं और संसद द्वारा पारित कानूनों का सीधा उल्लंघन किया है।

आयोग के भीतर ही विरोध की सुगबुगाहट

दावों के मुताबिक, इस बदलाव को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर भी सहमति नहीं थी। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से रमेश ने दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने भी इस बदलाव को अवैध और अनधिकृत माना था। उन्होंने युवाओं की सहूलियत के लिए इस नियम को तुरंत वापस लेने की सिफारिश की थी ताकि नए मतदाता बिना किसी कागजी अड़चन के आसानी से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकें। अब देखना होगा कि इस बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है।

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