अमेरिकी कार्रवाई: ईरान के तेल व्यापार में शामिल दो मुंबई फर्मों और 5 भारतीयों पर बैन; ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत लिया गया एक्शन

अमेरिका ने ईरान की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने और उसकी सरकारी फंडिंग को पूरी तरह रोकने के इरादे से अपना रुख और कड़ा कर लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) और खजाना विभाग (US Department of the Treasury) ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक OUTCAST’ (Operation Economic Outcast) के तहत कार्रवाई करते हुए मुंबई की दो कंपनियों और उनके 5 अधिकारियों पर कड़े वित्तीय प्रतिबंध (Sanctions) लगा दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये भारतीय इकाइयां और व्यक्ति प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरान से पेट्रोलियम व पेट्रोकेमिकल उत्पादों के अवैध खरीद-बिक्री में मदद कर रहे थे।

किन कंपनियों और भारतीय अधिकारियों पर गिरी गाज?

अमेरिकी विदेश विभाग के बयान के अनुसार, निम्नलिखित दो मुंबई आधारित फर्मों और उनके पांच अधिकारियों को निशाना बनाया गया है:

  • एसएसपीएल (SSPL) सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड: कंपनी से जुड़े ध्वनि वोरा और निसर्ग वोरा।

  • समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड: कंपनी के तीन वरिष्ठ अधिकारी केतन कोचीकर, भूपेंद्रसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल।

इन वित्तीय प्रतिबंधों के लागू होने के बाद, इन व्यक्तियों और कंपनियों की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में मौजूद संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा तथा अमेरिकी वित्तीय प्रणाली के जरिए इनके किसी भी प्रकार के पैसों के लेनदेन और व्यापारिक सौदों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

कंपनी को समेटने के लिए 23 अक्टूबर तक की मोहलत

अमेरिकी खजाना विभाग ने ‘समुद्र मरीन सर्विसेज’ को अपने पुराने वित्तीय लेनदेन, बकाया भुगतानों और आधिकारिक कागजी प्रक्रियाओं को कानूनी तरीके से पूरा करने के लिए 23 अक्टूबर तक की ‘विंड-डाउन’ (Wind-down) मोहलत दी है। इसके बाद कंपनी के साथ कोई भी अमेरिकी इकाई लेनदेन नहीं कर सकेगी।

17 कंपनियों और गुप्त जहाजों के ‘शैडो फ्लीट’ पर भी नकेल

इस व्यापक कार्रवाई में अमेरिका ने कुल 10 से अधिक कंपनियों, 6 व्यक्तियों और ईरान के लिए काम करने वाले 17 गुप्त जहाजों (Shadow Fleet/Secrecy Ships) पर भी पाबंदी लगाई है। ये वे टैंकर और जहाज थे जो समंदर में ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके गुप्त रूप से ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की तस्करी में लगे थे। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस अवैध व्यापार से मिलने वाला करोड़ों डॉलर का राजस्व ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), मिसाइल निर्माण और सैन्य गतिविधियों को फंडिंग देने के काम आ रहा था।

 

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