अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी डीजल से हटाया प्रतिबंध: पुतिन से बातचीत के बाद 7 अप्रैल 2027 तक राहत, 48 लाख टन डीजल की होगी सप्लाई

वाशिंगटन/मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत के बाद अमेरिका ने रूसी डीजल पर लगे प्रतिबंधों को 7 अप्रैल 2027 तक के लिए अस्थायी रूप से हटा लिया है। इस फैसले के तहत रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में लाखों टन डीजल ईंधन की आपूर्ति करेगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका में भारी ऊर्जा संकट, ईरान संघर्ष के चलते ईंधन की बढ़ती कीमतें और आगामी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव राजनीतिक दबाव का कारण बने हुए हैं।

अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury Department) के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) ने जनरल लाइसेंस 135 जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि रूसी मूल के डीजल की बिक्री, डिलीवरी, अनलोडिंग या आयात से संबंधित लेन-देन पर लगा प्रतिबंध 7 अप्रैल 2027 (रात 12:01 बजे EDT) तक प्रभावी नहीं रहेगा।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का ऐलान: चरणबद्ध तरीके से होगी डीजल की आपूर्ति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर इस समझौते की जानकारी साझा की। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई वार्ता को ‘अत्यंत सफल’ बताते हुए आपूर्ति का खाका प्रस्तुत किया:

  • तत्काल आपूर्ति: रूस तुरंत अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में 3,00,000 टन से अधिक डीजल भेजेगा।

  • नवंबर की खेप: नवंबर महीने में 5,00,000 टन अतिरिक्त डीजल की सप्लाई की जाएगी।

  • अगला चरण: इसके तुरंत बाद 10 लाख (1 मिलियन) टन डीजल की और आपूर्ति होगी।

  • दीर्घकालिक चरण: रूसी रिफाइनरियों की स्थिति को देखते हुए, इसके बाद कम समय के भीतर 30 लाख (3 मिलियन) टन अतिरिक्त डीजल भेजा जाएगा।

  • कुल मिलाकर रूस वैश्विक व अमेरिकी बाजार के लिए लगभग 48 लाख टन (4.8 मिलियन टन) डीजल रिलीज करने पर सहमत हुआ है।

ईंधन की कीमतों से बेहाल अमेरिका और आगामी मध्यावधि चुनाव का दबाव

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतें राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनी हुई हैं। वैश्विक बाजार में डीजल संकट कई प्रमुख कारणों से गहराया था:

  1. ईरान संकट: मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े तनाव और संघर्ष के कारण कच्चे तेल व ईंधन आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई।

  2. हूती हमले: सऊदी अरब की रिफाइनरियों पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों ने वैश्विक रिफाइंड ऑयल सप्लाई को काफी प्रभावित किया।

  3. यूक्रेन-रूस युद्ध का असर: यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाए जाने के बाद मॉस्को ने अपने घरेलू बाजार को संतुलित करने के लिए डीजल निर्यात पर जुलाई से अस्थाई रोक लगा दी थी।

इन परिस्थितियों में ईंधन की महंगाई से राहत देने के लिए ट्रंप प्रशासन को रूसी ऊर्जा प्रतिबंधों पर ढील देने का बड़ा फैसला लेना पड़ा।

रूस से तेल खरीदारों पर प्रस्तावित टैरिफ कानून के बीच विरोधाभासी कदम

यह फैसला उस वक्त आया है जब अमेरिकी कांग्रेस में एक सख्त कानून के तहत रूसी तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% से लेकर 500% तक भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान करने की तैयारी की जा रही थी। जहां एक तरफ अमेरिका अन्य देशों को रूसी ऊर्जा खरीदने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे रहा था, वहीं दूसरी ओर घरेलू मांग और राजनीतिक दबाव को देखते हुए खुद अमेरिका ने रूस से डीजल आयात का रास्ता साफ कर दिया है। 

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