नई दिल्ली। देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अगर आपका नाम मतदाता सूची (Voter List) में दर्ज नहीं है या उसमें कोई सुधार कराना चाहते हैं, तो चुनाव आयोग आपके लिए बड़ा मौका लेकर आया है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कार्यक्रम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस अभियान के तहत 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि मानते हुए वोटर लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट और त्रुटिरहित बनाया जाएगा।
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग का मुख्य उद्देश्य नए युवाओं का पंजीकरण करना, वोटर आईडी की गलतियां सुधारना और फर्जी या अयोग्य नामों को सूची से बाहर काटना है।
12 नवंबर को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, 4 जनवरी को अंतिम प्रकाशन
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी टाइमटेबल के अनुसार, 2 नवंबर 2026 तक मतदान केंद्रों का पुनर्गठन और युक्तिकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर को एकीकृत ड्राफ्ट मतदाता सूची (Integrated Draft Voter List) प्रकाशित की जाएगी।
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दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि: 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक।
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आपत्तियों का निस्तारण (Disposal): 28 दिसंबर 2026 तक।
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अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 4 जनवरी 2027।
पहली बार वोट देने वाले युवाओं को मिलेगा खास मौका
इस बार आयोग ने उन युवाओं पर विशेष फोकस किया है जो पहली बार वोट डालने के योग्य हो रहे हैं। 1 जनवरी 2027 के अलावा, जो युवा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे भी अग्रिम (Advance) आवेदन जमा कर सकते हैं। हालांकि, उनके आवेदनों का निस्तारण संबंधित तिमाही आने पर नियम अनुसार किया जाएगा।
फॉर्म 6, 7 और 8: आपके किस काम आएगा कौन-सा फॉर्म?
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फॉर्म-6: नया नाम जुड़वाने के लिए।
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फॉर्म-6A: एनआरआई (विदेशी) मतदाताओं के पंजीकरण के लिए।
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फॉर्म-7: वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटवाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
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फॉर्म-8: नाम, पता या फोटो में संशोधन, वोटर आईडी कार्ड बदलवाने और दिव्यांग जन श्रेणी में पंजीकरण कराने के लिए।
आधार देना अनिवार्य नहीं: आयोग ने साफ किया है कि वोटर आईडी से आधार संख्या जोड़ना पूरी तरह स्वैच्छिक है। आधार न देने पर किसी भी नागरिक का नाम जोड़ने से इनकार नहीं किया जाएगा। नागरिक Voter Services Portal और ECINet App के जरिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
गलत तरीके से नाम काटना अब नहीं होगा आसान
वोटर लिस्ट में धांधली और गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायतों को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने कड़े नियम लागू किए हैं।
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यदि किसी पोलिंग बूथ के 2 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, तो ‘निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी’ (ERO) को खुद मौके पर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करना होगा।
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अगर एक ही व्यक्ति 5 से अधिक मामलों में आपत्तिकर्ता बनता है, तो उन मामलों की व्यक्तिगत रूप से गहन जांच होगी।
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मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या डबल एंट्री वाले नामों को हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
पोलिंग बूथ पर 1200 से अधिक वोटर नहीं होंगे
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, आम परिस्थितियों में एक पोलिंग बूथ पर 1,200 से ज्यादा मतदाता नहीं रखे जाएंगे। नए बूथ बनाने या पुरानी सीमाओं में बदलाव से पहले भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। प्रयास यह रहेगा कि एक ही परिवार के सभी सदस्यों के नाम एक ही सेक्शन और बूथ में रहें ताकि मतदान के दिन परेशानी न हो।
किन 17 राज्यों में लागू होगा यह अभियान?
यह पुनरीक्षण अभियान उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गोवा, मणिपुर, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में शुरू हो रहा है।
वहीं, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और तेलंगाना जैसे राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) हाल ही में पूरा होने या जारी रहने के कारण SSR की तारीखें बाद में घोषित होंगी। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम के मिजाज को देखते हुए अलग से शेड्यूल जारी किया जाएगा।


















