किसने दिया नाबालिगों को प्रताड़ित करने का हक? जमुई-कोडरमा की घटनाओं से सामने आए 5 बड़े सवाल

Bihar Jharkhand Crime Report: बिहार के जमुई में सड़क किनारे एक नाबालिग छात्रा से दरिंदगी और पड़ोसी राज्य झारखंड के कोडरमा में तीन नाबालिगों को बिजली के खंभे से बांधकर गांव में घुमाने की शर्मनाक घटनाओं ने पूरे देश की चेतना को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जमुई में मनचलों ने अकेली नाबालिग लड़की को सरेराह घेरकर हैवानियत की हदें पार कीं, तो दूसरी तरफ कोडरमा में आक्रोशित भीड़ ने खुद ही ‘जज’ बनकर बच्चों को तालिबानी अंदाज में सजा सुना दी।

ये दोनों घटनाएं चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि समाज में ‘मॉब जस्टिस’ (भीड़तंत्र) और बेखौफ अपराधियों का दबदबा किस कदर बढ़ता जा रहा है।

पहला मामला: जमुई में सरेराह नाबालिग से अभद्रता, SIT ने की 3 गिरफ्तारियां

बिहार के जमुई जिले के टाउन थाना क्षेत्र में 19 सितंबर की शाम एक कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र-छात्रा को रोककर दबंगों ने अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की। 21 सितंबर को जब इस हैवानियत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब हड़कंप मचा।

जमुई पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 76(3)(5) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 8 व 12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जमुई एसपी विश्वजीत दयाल के आदेश पर SDPO दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। फुटेज के आधार पर चिन्हित 7 आरोपियों में से 3 को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने जमुई डीएम से रिपोर्ट तलब की है, वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई दिग्गजों ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

दूसरा मामला: कोडरमा में ग्रामीणों की ‘तालिबानी अदालत’, खंभे से बांधकर घुमाया

दूसरी ओर, झारखंड के कोडरमा जिले के लोचनपुर गांव में कानून को हाथ में लेने का वीभत्स नजारा दिखा। रविवार देर रात एक नाबालिग लड़की से मिलने उसके दो दोस्त घर पहुँचे थे। सोमवार सुबह ग्रामीणों को जब इसकी भनक लगी, तो उग्र भीड़ ने तीनों नाबालिगों को बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने खुद ‘तालिबानी अदालत’ सजाई, बच्चों को पूरे गांव में जलील करते हुए घुमाया और फिर बिजली के खंभे से बांधकर माफी मंगवाई। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँचकर तीनों बच्चों को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया।

कानून और समाज पर खड़े होते 5 गंभीर सवाल (और उनके कानूनी जवाब)

1. क्या किसी नागरिक या भीड़ को खुद कानून हाथ में लेने का हक है?

कानून क्या कहता है: भारतीय संविधान और आपराधिक कानून के तहत किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति को बंधक बनाना, उसके साथ मारपीट करना या खंभे से बांधना पूरी तरह गैर-कानूनी (BNS के तहत संज्ञेय अपराध) है। न्याय करने का अधिकार केवल और केवल अदालतों को है, भीड़ को नहीं।

2. इन मामलों में नाबालिगों के अधिकारों और संरक्षण का क्या?

कानून क्या कहता है: जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) और पॉक्सो एक्ट के तहत किसी भी नाबालिग की पहचान उजागर करना, उन्हें मानसिक या शारीरिक यातना देना बेहद संगीन जुर्म है। कोडरमा में ग्रामीणों का यह रवैया बच्चों के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है।

3. अकेली लड़की या प्रेमी जोड़े पर सवाल उठाने का हक भीड़ को किसने दिया?

कानून क्या कहता है: भारत का कानून देश के हर नागरिक को निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है। यदि कहीं कोई अपराध हुआ भी है, तो पुलिस को सूचित करना ही एकमात्र कानूनी रास्ता है। ‘नैतिक पुलिसिंग’ या ‘मॉब जस्टिस’ कानून की नजर में अपराध है।

4. तमाशबीन बनती भीड़ की चुप्पी पर कैसे लगे अंकुश?

कानून और प्रक्रिया: सार्वजनिक स्थलों पर जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो वीडियो बनाने या तमाशा देखने के बजाय नागरिकों का कानूनी कर्तव्य है कि वे तुरंत राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर (112) या चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर सूचना दें। कानून में ‘गुड सेमेरिटन’ (मददगार नागरिक) को पूरी सुरक्षा दी जाती है और उन्हें पुलिसिया झंझटों से दूर रखा जाता है। अपराध को मूकदर्शक बनकर देखना या वीडियो शेयर करना भी अपराध को बढ़ावा देना है।

5. पीड़ितों और परिजनों को कानूनी व मानसिक सहायता कैसे मिले?

कानून और प्रक्रिया: पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत पीड़ित बच्चों के पुनर्वास के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) और बाल कल्याण समिति (CWC) के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता, पेशेवर काउंसलिंग और पुनर्वास प्रदान किया जाता है। परिजनों को बिना किसी लोक-लाज के सीधे प्रशासन से संपर्क करना चाहिए ताकि बच्चों को सही समय पर मानसिक संबल और न्याय मिल सके।

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