
आंदोलन के अगुआ संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने यह भी कहा कि किसान लखनऊ में MSP की मांग को लेकर पहले से 22 नवंबर को नियोजित कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ेंगे और 29 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने के अवसर पर संसद तक मार्च निकालेंगे.
किसान संगठनों (farmer unions) ने रविवार को कहा कि वे अपना आंदोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक कि सरकार उनकी छह मांगों पर बातचीत शुरू नहीं कर देती, जिसमें MSP की गारंटी देने वाला कानून और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की गिरफ्तारी भी शामिल है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था और कहा था कि इसी महीने शुरू हो रहे संसद सत्र में तीनों कानून वापस ले लिए जाएंगे. देश के कुछ किसान संगठन पिछले एक साल से इन तीनों कानूनों का विरोध कर रहे थे.
आंदोलन के अगुआ संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने यह भी कहा कि किसान लखनऊ में MSP की मांग को लेकर पहले से 22 नवंबर को नियोजित कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ेंगे और 29 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने के अवसर पर संसद तक मार्च निकालेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी को एक खुले पत्र में, SKM ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, लेकिन ये भी कहा कि “11 दौर की बातचीत के बाद, आपने द्विपक्षीय समाधान के बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना.”
प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने छह मांगें रखीं
- उत्पादन की व्यापक लागत के आधार पर MSP को सभी कृषि उत्पादों के लिए सभी किसानों का कानूनी अधिकार बनाया जाए.
- लखीमपुर खीरी कांड में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाए व उन्हें गिरफ्तार किया जाए.
- किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ लगाए गए मुकदमे वापस लिए जाएं.
- आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के लिए एक स्मारक का निर्माण किया जाए.
- किसान संगठनों ने “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम 2021” के तहत किसानों पर लगे दंडात्मक प्रावधानों को हटाने की मांग की है.
- सरकार द्वारा प्रस्तावित “बिजली संशोधन विधेयक, 2020/2021” के मसौदे को भी वापस लेने की मांग की गई है.
तीन कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आंदोलनकारी किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर तीन जगहों पर डेरा डाले हुए हैं और उन्होंने कहा है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं, वह तब तक यहीं डटे रहेंगे.














