जितिन प्रसाद ने थामा भाजपा का दामन, यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल

कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने छोड़ा कांग्रेस का हाथ,लिया कमल का साथ!

भास्कर ब्यूरो

लखीमपुर-खीरी(एस.पी.तिवारी/नित्यानंद बाजपेयी) : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं में शामिल जितिन प्रसाद ने हाथ का साथ छोड़कर कमल का साथ कर लिया।जितिन प्रसाद के भाजपा में जाने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल बढ़ गई है।बुधवार को देश की राजधानी से आई खबर ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई है।
दरअसल कांग्रेस के कद्दावर नेता और राहुल गांधी की कोर कमेटी के सदस्य रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद भी अब भगवाधारी हो गए।जितिन प्रसाद कांग्रेस के दिग्गज नेता जितेंद्र प्रसाद के पुत्र हैं।जितेंद्र प्रसाद का कद कांग्रेस में इतना बड़ा था कि पार्टी ने उनको प्रधानमंत्री कार्यालय का सलाहकार नियुक्त कर रखा था।उनकी आसपास के जिलों सहित उत्तर प्रदेश में अच्छी खासी पकड़ थी।यूं समझिए कि जितेंद्र प्रसाद के बिना पूछे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कोई निर्णय नहीं लेती थी।उन्हीं की विरासत को संभालते हुए जितिन प्रसाद 2004 में शाहजहांपुर लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने और 2008 में केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री बनाए गए।

2009 में परिसीमन के बाद धौराहरा से ताल ठोक दी। नवसृजित धौराहरा में काफी जोर-शोर के साथ “जितिन नहीं यह आंधी है दूसरा राहुल गांधी है” जैसे नारे के साथ राहुल गांधी के नाम पर चुनाव लड़ा।उसी दौरान बेहजम में इस्पात फैक्ट्री का भव्य उद्घाटन हुआ।वह अलग बात है वह वादा हवा-हवाई साबित हुआ लेकिन रोजगार की आस लगाए बैठी धौराहरा क्षेत्र की जनता ने जितिन प्रसाद को हाथों हाथ लिया और जितिन प्रसाद को भारी अंतर से जिताया।उन्होंने 391000 वोट पाकर अपने प्रतिद्वंदी बसपा के राजेश वर्मा को 184000 वोट से हराया।

धौरहरा जीतकर संसद पहुंचने के बाद यूपीए-2 में सड़क परिवहन पेट्रोलियम और मानव संसाधन विभाग में राज्यमंत्री रहे लेकिन बेहजम में इस्पात फैक्ट्री का काम शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया।
2014 में मोदी लहर के आगे जितिन प्रसाद धराशाई हो गए और भाजपा के टिकट पर रेखा अरुण वर्मा ने भारी मतों से हराया,2019 में जितिन प्रसाद काफी ताम-झाम के साथ फिर मैदान में उतरे लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।वर्तमान सांसद रेखा अरुण वर्मा से काफी मतों से पीछे रह गए और तीसरे पायदान पर रह‌ गये।कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में लगभग पूरी तरीके से खत्म हो जाना और राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस टीम का विभाजित होकर बयानबाजी करना यह सब देख कर राजनीति में माहिर जितिन प्रसाद ने दल बदल कर भगवा धारण करने का मन बना लिया। शायद राज्यसभा पहुंचने की छटपटाहट लेकर दिल्ली भाजपा कार्यालय जा पहुंचे और विरासत में मिली राजनीति के जनक के मुंह पर ही कालिख पोत दी।

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