बंगाल में ढह गया TMC का अभेद्य किला! कहीं यूनियन दफ्तरों पर लहराया भगवा तो कहीं सलाखों के पीछे पहुंचे बाहुबली, जानें जमीन पर कैसे बदला ‘खेला’

कोलकाता.  पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों के बाद राज्य की सियासत में केवल शीर्ष स्तर पर ही बड़ा फेरबदल नहीं हुआ है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दशकों पुराना अभेद्य किला पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। चुनाव परिणाम सामने आते ही बंगाल की जमीनी राजनीति, परिवहन व्यवस्था और सिंडिकेट राज पर काबिज नेताओं का दबदबा खत्म होने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर रेलवे स्टेशन के पास देखने को मिली, जहां स्थित ऑटो रिक्शा यूनियन का दफ्तर जो कभी टीएमसी के पारंपरिक नीले-सफेद रंग में रंगा रहता था, उसका रंग-रूप अब पूरी तरह बदल चुका है। वहां अब भारतीय मजदूर संघ (BMS) का भगवा बैनर लहरा रहा है। स्थानीय लोग इसे केवल झंडे या रंग का बदलाव नहीं, बल्कि सालों से जारी कथित वसूली और सिंडिकेट राज के अंत का सीधा संकेत मान रहे हैं।

ऑटो चालकों को मिली ‘कट मनी’ से आजादी, अभिषेक बनर्जी पर फूटा था गुस्सा

सोनारपुर इलाके के स्थानीय ऑटो चालक अब खुली हवा में सांस ले रहे हैं और राहत महसूस कर रहे हैं। चालकों का साफ कहना है कि अब उन्हें स्थानीय टीएमसी नेताओं और उनके गुर्गों को 120 रुपये प्रति वाहन की दर से दी जाने वाली जबरन मासिक वसूली यानी ‘कट मनी’ से पूरी तरह छुटकारा मिल गया है। गौरतलब है कि इसी इलाके से महज दो किलोमीटर दूर टीएमसी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी पर जनता का भारी गुस्सा फूटा था, जहां एक उग्र भीड़ ने उन पर अंडे और पत्थर बरसाए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, कल तक इलाके में अपनी धौंस जमाने वाले नेता चुनावी नतीजों के बाद से पूरी तरह लापता हैं। वार्ड नंबर 13 की एक सब्जी विक्रेता रूपाली मंडल ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि टीएमसी काउंसलर ने उनसे दुकान चलाने के एवज में 20,000 रुपये की भारी रिश्वत मांगी थी और जब उन्होंने पैसे देने से मना किया, तो उनकी दुकान उजाड़ दी गई थी। चुनावी नतीजों के बाद से वह जबरन वसूली करने वाला काउंसलर फरार है और उसके घर पर ताला लटका हुआ है, जिसके बाद पीड़ित महिला ने इंसाफ के लिए भाजपा नेताओं से मदद मांगी है।

कोलकाता में सिंडिकेट के सबसे बड़े सरगना और बाहुबली राजू नस्कर सलाखों के पीछे

कोलकाता का बेलीघाटा इलाका, जिसे कभी तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत और सुरक्षित गढ़ माना जाता था, वहां अब पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है और पार्टी के लगभग सभी स्थानीय दफ्तर बंद पड़े हैं। राज्य में सत्ता का समीकरण बदलते ही प्रशासन भी एक्शन मोड में आ गया है। कोलकाता नगर निगम (KMC) ने इस इलाके में धड़ल्ले से खड़ी की गई अवैध इमारतों और प्रमोटिंग सिंडिकेट पर हथौड़ा चलाना शुरू कर दिया है। इस पूरे अवैध निर्माण और सिंडिकेट राज का सबसे बड़ा सरगना व टीएमसी का बाहुबली ठेकेदार राजू नस्कर अब पुलिस की गिरफ्त में यानी सलाखों के पीछे है। एक समय में मामूली टैक्सी ड्राइवर रहे राजू नस्कर ने सिंडिकेट के दम पर करोड़ों की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली थी। अब उसके जेल जाते ही स्थानीय लोग बिना किसी डर के खुलकर सामने आ रहे हैं और जमीन हड़पने की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।

सरकारी बाढ़ आश्रय गृह से चल रहा था रेत माफिया का खेल, पुलिस रेड में बड़ा खुलासा

कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर पूर्व बर्धमान के जमालपुर ब्लॉक से सिंडिकेट राज की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं। यहाँ ब्लॉक आईएनटीटीयूसी (INTTUC) अध्यक्ष तबरक अली मंडल और उनकी पंचायत प्रधान पत्नी आरिफा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों मिलकर एक सरकारी कम्युनिटी सेंटर और बाढ़ आश्रय गृह पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए थे और इसी सरकारी इमारत को अपना ठिकाना बनाकर दामोदर नदी में अवैध रेत खनन (सैंड माइनिंग) का काला कारोबार चला रहे थे।

पुलिस ने जब इन सरकारी भवनों पर छापेमारी की, तो वहां से ग्रामीणों को बांटे जाने वाले सरकारी खाद, बीज, कीटनाशक और मनरेगा के भारी संख्या में जॉब कार्ड जब्त किए गए, जिन्हें ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस सरकारी ठिकाने से हर दिन 150 से 200 ट्रक अवैध रेत लेकर जाते थे, लेकिन खौफ के मारे कोई मुंह नहीं खोलता था। अब जब यह पूरा सिंडिकेट जेल के अंदर है, तो ग्रामीणों का डर गायब हो चुका है और वे ‘बांग्लार बाड़ी’ जैसी सरकारी आवास योजनाओं में नेताओं द्वारा ली गई कट मनी की शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, भाजपा नेताओं का दावा है कि राज्य से सिंडिकेट, तुष्टिकरण और गुंडागर्दी का दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

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