अमेरिका-ईरान में महायुद्ध के आसार! जाग्रोस पहाड़ के नीचे छिपा है ईरान का ‘पाताल लोक’, क्या ट्रंप के महाबम भी हो जाएंगे फेल?

नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनातनी अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ते तनाव का ताजा केंद्र बना है ईरान का एक बेहद गुप्त भूमिगत परमाणु ठिकाना (Secret Underground Nuclear Site)। दावा किया जा रहा है कि यह ठिकाना जाग्रोस पर्वत श्रृंखला (Zagros Mountains) की अथाश गहराइयों में छिपा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस खुफिया बंकर को लेकर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। ट्रंप ने खुले तौर पर संकेत दिए हैं कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका इस महाशक्तिशाली परमाणु ठिकाने को तबाह करने के लिए सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा।

जाग्रोस पहाड़ के नीचे क्या बना रहा है ईरान?

खुफिया रिपोर्टों और रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, जाग्रोस पर्वत श्रृंखला के भीतर स्थित ‘कुह-ए कोलंग गज ला’ यानी पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) के नीचे एक विशाल और बेहद जटिल भूमिगत सुरंग नेटवर्क तैयार किया गया है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इस महापरिसर का इस्तेमाल ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम या बेहद संवेदनशील उच्च स्तरीय परमाणु सामग्रियों को सुरक्षित रखने के लिए कर रहा है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह नया ठिकाना ईरान के मुख्य नतांज परमाणु केंद्र (Natanz Nuclear Site) से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नतांज वो जगह है जो पहले भी कई बार अमेरिकी बंकर-बस्टर बमों (Bunker-Buster Bombs) के हमलों का सामना कर चुकी है। लेकिन जाग्रोस पहाड़ के नीचे बना यह नया पाताल लोक अमेरिकी हमलों से पूरी तरह सुरक्षित माना जा रहा है, जिसने वॉशिंगटन की रातों की नींद उड़ा दी है।

डोनाल्ड ट्रंप ने दी खुली चेतावनी, कहा- हमारी हर हरकत पर नजर

एक हालिया इंटरव्यू के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस गुप्त ठिकाने को लेकर सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए हैं और वहां होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि को मॉनिटर किया जा रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि वैश्विक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ, तो अमेरिका इस ठिकाने के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

इससे पहले भी ट्रंप कई मौकों पर दावा कर चुके हैं कि पिछले साल अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन्स के कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचा था। हालांकि, जाग्रोस के पहाड़ों में मिले इस नए खुफिया ठिकाने ने अमेरिकी दावों पर सवाल भी खड़े किए हैं और यह साबित कर दिया है कि ईरान अभी भी चुपचाप परमाणु हथियारों की होड़ में लगा हुआ है।

क्या अमेरिकी बंकर-बस्टर बम भी हो जाएंगे बेअसर?

अमेरिकी मीडिया में चल रही रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान का यह भूमिगत परिसर इतनी गहराई में बनाया गया है कि मौजूदा दौर के सबसे आधुनिक अमेरिकी बंकर-बस्टर बम भी इसे आसानी से भेद नहीं सकते। परमाणु मामलों के विशेषज्ञों ने जो आंकड़े दिए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। अमेरिका के सबसे घातक और भारी-भरकम बंकर-बस्टर बम अधिकतम 200 फीट तक मिट्टी और चट्टानों को चीर सकते हैं या करीब 20 फीट मोटे कंक्रीट की दीवार को ध्वस्त कर सकते हैं।

इसके विपरीत, सैटेलाइट डेटा से मिले अनुमानों के मुताबिक जाग्रोस का यह नया परिसर जमीन से लगभग 260 से 330 फीट की गहराई में बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गहराई ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले फोर्डो परमाणु संयंत्र (Fordow Nuclear Plant) से भी कहीं ज्यादा है। ऐसे में इस ठिकाने को हवाई हमले या मिसाइल से निशाना बनाना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।

2020 से चल रहा है ‘मिशन पाताल’, सैटेलाइट तस्वीरों से खुला राज

सामने आई जानकारियों के अनुसार, नतांज परमाणु केंद्र के दक्षिणी हिस्से में स्थित इस महापरियोजना पर ईरान साल 2020 से ही युद्धस्तर पर काम कर रहा है। शुरुआती दिनों में जब यह मामला उछला, तो ईरान ने दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए कहा था कि वहां केवल उस सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, जिसे पिछले हमलों में नुकसान पहुंचा था।

लेकिन बाद में जब खुफिया सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं, तो सच उजागर हो गया। अमेरिका और इजरायल के तमाम दबावों और हमलों के बावजूद इस स्थान पर निर्माण कार्य कभी नहीं रुका। सितंबर 2025 के बाद की हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में भी इस जगह पर भारी हलचल और निर्माण से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गई हैं।

IAEA की पहुंच से दूर, सुरंगों को बनाया जा रहा है अभेद्य कवच

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस भूमिगत परिसर का अब तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों द्वारा दौरा या निरीक्षण नहीं किया गया है। इसी गोपनीयता के कारण दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ है।

हाल के महीनों में जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, उनसे पता चलता है कि ईरान इस सुरंग के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट और स्टील से अभेद्य बना रहा है। वहां नई सुरक्षा दीवारें खड़ी की जा रही हैं, खुदाई की गई मिट्टी के विशाल ढेर और भारी अत्याधुनिक मशीनें तैनात हैं। रक्षा विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि ईरान किसी भी संभावित अमेरिकी या इजरायली हवाई हमले (Air Strike) से बचने के लिए इस परिसर को एक अभेद्य किले में तब्दील करने में जुटा हुआ है।

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