अयोध्या। राम नगरी अयोध्या में रामलला के खजाने और श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हुए करोड़ों रुपये के महा-घोटाले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस मामले में हर दिन हो रहे सनसनीखेज खुलासों से दुनिया भर के रामभक्तों की आस्था को गहरा धक्का लगा है। आरोपों का यह सिलसिला शुरू होने के महज एक हफ्ते के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) अयोध्या में ग्राउंड जीरो पर पहुंच चुकी है। 15 जून को एक्शन में आई एसआईटी की टीम ने राम मंदिर परिसर के भीतर करीब 6 घंटे तक सुराग खंगाले और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से बंद कमरे में लंबी पूछताछ की। इस कार्रवाई से ठीक पहले, पकड़े गए 5 मुख्य संदिग्धों से 2 करोड़ रुपये कैश, 1 लग्जरी कार और 3 आईफोन बरामद किए जा चुके हैं, जिसके बाद अब 3 नए और हाई-प्रोफाइल नाम सामने आए हैं।
ऑटो चलाने वाले ‘टिन्नू’ के घर मिला कुबेर का खजाना
इस महा-घोटाले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सिंडिकेट ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के सबसे करीबी सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के रूप में सामने आया है। टिन्नू के पैतृक आवास पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में शुद्ध सोना बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि अयोध्या में कभी मामूली ऑटो रिक्शा चलाने वाले टिन्नू के पास आज अयोध्या और लखनऊ जैसे शहरों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी चल-अचल संपत्तियां हैं।
राम मंदिर से महज 1.5 किलोमीटर दूर स्वर्गद्वार इलाके में स्थित टिन्नू के पुश्तैनी मकान को घेरकर 13 जून को ट्रस्ट और मंदिर सुरक्षा विंग की संयुक्त टीम ने दबिश दी थी, जहां से करोड़ों का सोना जब्त किया गया। इसके अलावा, अयोध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टिन्नू का एक आलीशान स्टूडेंट हॉस्टल भी मिला है, जिसमें 70 वीवीआईपी कमरे हैं। एसआईटी जल्द ही इस हॉस्टल की फॉरेंसिक जांच करा सकती है। फिलहाल आरोपी टिन्नू को परिसर के भीतर बने पीसीएफ “यात्री सुविधा केंद्र” में नजरबंद रखकर पूछताछ की जा रही है।
बोरे में भरकर दक्षिण भारत जा रहा था रामलला का खजाना!
घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर दूसरा सबसे रहस्यमयी किरदार सोमेश आनंद आया है। सोमेश मंदिर निर्माण के मुख्य प्रभारी गोपाल राव का कथित सगा भतीजा बताया जा रहा है। महज एक साल के भीतर सोमेश ने कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों की 50 से अधिक बेहद संदेहास्पद यात्राएं की हैं। खुफिया सर्विलांस के अनुसार, सोमेश आनंद का तरीका बेहद शातिराना था; वह अयोध्या रेलवे स्टेशन से विशाल बोरों में भारी-भरकम लगेज (आशंका है कि इसमें नकद और कीमती धातुएं थीं) भरकर ट्रेन से दक्षिण भारत जाता था और माल ठिकाने लगाने के बाद वापसी में खाली हाथ सीधे डोमेस्टिक फ्लाइट से वीवीआईपी की तरह अयोध्या लौट आता था। फिलहाल सोमेश के बैंक खातों और हवाई टिकटों की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है।
केडी तिवारी पर मंडराया संकट, 1.5 करोड़ की जमीन का डीड जब्त
इस महा-चोरी के सिंडिकेट में तीसरा बड़ा नाम केडी तिवारी का सामने आया है, जिनके पास रामलला के दरबार में आने वाले सोने-चांदी के कीमती आभूषणों को संभालने की मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। केडी तिवारी भी वर्तमान में गहरे संदेह के घेरे में हैं और पीसीएफ केंद्र में ट्रस्ट के सदस्यों के तीखे सवालों का सामना कर रहे हैं। दो दिन पहले सुरक्षा अधिकारियों ने उनके आवास पर भी ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। हालांकि वहां से मिले दस्तावेजों को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, लेकिन केडी तिवारी द्वारा हाल ही में खरीदी गई 1.5 करोड़ रुपये की एक बेशकीमती जमीन का डीड एग्रीमेंट अब सीधे जांच के दायरे में आ गया है। इस पर केडी तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी ड्यूटी केवल श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषणों को तौलकर रसीद देने तक सीमित थी, आगे गहनों के साथ क्या होता था, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
जब लॉकर से गायब हो गए थे रामलला के चारों भाइयों के सोने के मुकुट
घोटाले की परतें खुलते ही अयोध्या के संतों और पुजारियों के बीच 2 साल पुराना एक बेहद शर्मनाक वाकया दोबारा चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि सावन के पवित्र झूला मेले के समय, जब चारों भाइयों को विशेष रूप से निर्मित शुद्ध सोने के मुकुट पहनाए जाते हैं, तब ये चारों ऐतिहासिक मुकुट मुख्य लॉकर से रहस्यमयी ढंग से गायब हो गए थे। कई महीनों तक इस महा-चोरी को दबाए रखा गया, लेकिन जब पुजारियों ने श्रृंगार के लिए मुकुटों की भौतिक मांग की, तब जाकर खोजबीन शुरू हुई।
हैरानी की बात यह रही कि चारों मुकुट किसी बाहरी चोर के पास से नहीं, बल्कि परिसर के भीतर ही ट्रस्ट के एक बेहद रसूखदार पदाधिकारी की निजी लोहे की अलमारी से बरामद हुए थे, जिसे बाद में रफा-दफा कर दिया गया। ये चारों मुकुट गाजियाबाद के एक भावुक रामभक्त श्रद्धालु ने अपनी सगी मां के सारे पुश्तैनी जेवर बेचकर रामलला के लिए विशेष रूप से तैयार करवाकर भेंट किए थे।
सुरक्षा के इस बड़े लूपहोल का चोरों ने उठाया फायदा
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का तौर-तरीका यह था कि आम दिनों में देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालु भीड़ के कारण मुख्य कार्यालय न जाकर, सीधे मुख्य मंदिर के ‘दानपात्रों’ (डोनेशन बॉक्सेस) में ही सोने-चांदी के कीमती जेवरात डाल देते थे। ट्रस्ट की लापरवाही का आलम यह था कि दानपात्रों से केवल नकद रुपयों की ही आधिकारिक गिनती और बही-खाता तैयार होता था, जबकि उसमें गिरने वाले सोने, चांदी और हीरे का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया जाता था। इसी भारी सुरक्षा लूपहोल का फायदा उठाकर चोरों ने पहले दानपात्रों के सोने-चांदी पर हाथ साफ करना शुरू किया, और हौसले बुलंद होने पर गिरोह ने सीधे मुख्य कैश के बंडलों पर भी हाथ साफ किया, जो कि अब एसआईटी की चार्जशीट का मुख्य आधार बनने जा रहा है।
राम मंदिर को दान की गईं बहुमूल्य सोने-चांदी की शिलाएं भी गायब: संतोष दूबे
–बोले, सभी शिलाएं चम्पत राय की देखरेख में थीं, वे जवाब दें
कभी राम जन्मभूमि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले धर्मसेना के संस्थापक संतोष दूबे ने ट्रस्ट के महासचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ दानपात्र से चोरी नहीं हुई है बल्कि करोड़ों रूपये की लोगों द्वारा दान की गई शिलाएं भी गायब हैं। संतोष दूबे के अनुसार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई नहीं है। वर्ष 1989 में देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं, जिनके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी ही नहीं है।
ये शिलाएं 2002 तक कारसेवकपुरम में रहीं। मिट्टी की पूजित शिलाएं आज भी कारसेवकपुरम में रखी हैं, लेकिन धातु की शिलाएं कहीं दिखाई नहीं देतीं। संतोष दुबे के मुताबिक, सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था।
ये शिलाएं कारसेवकपुरम में जहां सुरक्षित रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगे थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, यह किसी को पता नहीं है। यदि ट्रस्ट ईमानदार है तो इन शिलाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए तथा इन्हें लोगों के दर्शनार्थ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि राम जी अवश्य न्याय करेंगे। संतोष दूबे का कहना है कि जिस टिन्नू नामक व्यक्ति को घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, वह चम्पत राय का ड्राइवर था, फिर वह इतना पावरफुल कैसे हो गया। क्या यह चम्पत राय के सहयोग के बिना संभव है।














