अयोध्या राम मंदिर में दान की चोरी! 6 संदिग्धों पर कसा SIT का शिकंजा, पूर्व ड्राइवर से लेकर ट्रस्टी तक की जानें पूरी कुंडली

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या से इस समय एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है. भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के पैसे में भारी हेराफेरी और चोरी के मामले में कई रसूखदार चेहरे बेनकाब होते दिख रहे हैं. शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, राम मंदिर के चढ़ावे से करीब 7 करोड़ रुपये की चोरी का सनसनीखेज आरोप लगा है.

इस महा-घोटाले को लेकर अयोध्या के स्थानीय थाने में अब तक 3 अलग-अलग एफआईआर (शिकायतें) दर्ज की जा चुकी हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के डीएम, एसएसपी के साथ-साथ एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है जो पूरे मामले की कमान संभाले हुए है. राम मंदिर ट्रस्ट के कई संदिग्ध कर्मचारियों और सेवादारों से बंद कमरे में लगातार पूछताछ की जा रही है. इस पूरे मामले में 6 ऐसे मुख्य किरदार (संदिग्ध) सामने आए हैं, जिन पर जांच एजेंसियों का शिकंजा सबसे ज्यादा कस गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा है कि एसआईटी जांच की तह तक जाएगी और प्रभु राम के दरबार में चोरी करने वाले किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा. आइए जानते हैं इन 6 संदिग्ध किरदारों की पूरी इनसाइड स्टोरी…

1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: चंपत राय के पूर्व ड्राइवर के पास 50 करोड़ की संपत्ति का दावा!

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सामने आया है. टिन्नू पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निजी ड्राइवर रह चुके हैं और वर्तमान में उनके बेहद करीबी सहयोगी बताए जाते हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, अयोध्या और लखनऊ जैसे वीआईपी इलाकों में इनके नाम पर करीब 50 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति होने का दावा किया जा रहा है. राम मंदिर से महज डेढ़ किलोमीटर दूर इनका पुश्तैनी मकान है, जहां छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी द्वारा भारी मात्रा में सोना बरामद किए जाने की खबर है.

आरोप है कि टिन्नू ने मंदिर के चढ़ावे की रकम में बड़ी सेंधमारी की और पिछले कुछ ही सालों में कई महंगे प्लॉट खरीदे, साथ ही 5 से 6 बड़े रेस्टोरेंट्स में मोटी हिस्सेदारी भी ली. हालांकि, इन आरोपों पर सफाई देते हुए टिन्नू ने कहा, “मेरा चंदे के पैसे से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. मैं बहुत पहले से विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़ा हुआ हूं. 50 करोड़ की संपत्ति का दावा पूरी तरह झूठा है, मेरे पास सिर्फ एक गेस्ट हाउस है और मैं किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हूं.”

2. मनीष यादव: नोट गिनने वाले भतीजे के पास से मिले ₹36 लाख नकद

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सगा भतीजा मनीष यादव भी इस जांच के घेरे में है. मनीष राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और भारी-भरकम कैश को गिनने वाली मुख्य टीम का हिस्सा था. आरोप है कि नोटों की गिनती के दौरान उसने बड़े पैमाने पर गबन और दान की चोरी को अंजाम दिया. सूत्रों के हवाले से खबर है कि एसआईटी ने मनीष की निशानदेही पर छापेमारी कर करीब 36 लाख रुपये की नकद राशि बरामद कर ली है. एसआईटी अब मनीष को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेल में उसके साथ और कौन-कौन शामिल था.

3. गोपाल राव: व्यवस्थापक की नाक के नीचे होता रहा करोड़ों का खेल!

गोपाल राव राम मंदिर के मुख्य व्यवस्थापकों में से एक होने के साथ-साथ ट्रस्ट के खास आमंत्रित सदस्य भी हैं. मंदिर परिसर के दैनिक रखरखाव, साफ-सफाई से लेकर सभी दान पेटियों (हुंडी) से मिलने वाले चढ़ावे को सुरक्षित रखने का मुख्य जिम्मा इन्हीं के कंधों पर रहता है. ऐसे में दान पेटियों से करोड़ों रुपये गायब होने के बाद उन पर सीधे तौर पर वित्तीय गड़बड़ी और लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे हैं. इस पर गोपाल राव का कहना है कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्होंने खुद ट्रस्ट के साथ मिलकर इस मामले की एसआईटी जांच कराने की मांग उठाई थी.

4. लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा: जीजा-साले की जोड़ी की रातों-रात बदली माली हालत

लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा आपस में जीजा-साले हैं. ये दोनों भी मंदिर के मुख्य दान पात्र की राशि की गिनती करने वाली कोर टीम में तैनात थे. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ ही वर्षों में इन दोनों की माली हालत में रॉकेट की तरह उछाल आया. अनुकल्प ने अपने गांव में एक आलीशान फार्म हाउस तैयार कर लिया है और अयोध्या शहर में 65 लाख रुपये का एक नया मकान भी खरीदा है. वहीं, लवकुश फैजाबाद में एक बेहद आलीशान घर बनवा रहा था, जिसके पास से जांच टीम को 10 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई है. हालांकि, इनके परिजनों का दावा है कि दोनों को फंसाया जा रहा है और वे बेकसूर हैं.

5. केडी तिवारी: सोने-चांदी के जेवरों का रखवाला ही आया सवालों के घेरे में

केडी तिवारी के पास राम मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषणों और जेवरों को सुरक्षित रखने का बेहद संवेदनशील जिम्मा था. केडी तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में करीब 1.5 करोड़ रुपये की कीमती जमीन खरीदी है और उनके पास 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने के पुख्ता इनपुट हैं. अपनी सफाई में तिवारी ने कहा, “मैं कई प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षक रह चुका हूँ. मेरा बड़ा बेटा भारतीय वायुसेना में देश सेवा के बाद अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में बड़े पद पर कार्यरत है और दूसरा बेटा सेना से रिटायर होकर यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर है. मेरे पास जो भी संपत्ति है, वह मेरे बच्चों की मेहनत की कमाई है, चाहे तो इसकी कोई भी जांच करा ले.”

6. डॉ. अनिल मिश्रा: ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य का नाम आने से मचा हड़कंप

इस पूरे घोटाले में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब राम मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी इस विवाद में उछल गया. डॉ. मिश्रा पर राम मंदिर के भव्य निर्माण कार्य और आने वाले समस्त दान-पुण्य के प्रबंधन पर कड़ी नजर रखने की सर्वोच्च जिम्मेदारी है. अयोध्या में जलकल विभाग के पास नगर निगम इलाके में उनका एक बड़ा घर है, जबकि अवधपुरी में उनका एक और नया आलीशान बंगला बनकर तैयार हो रहा है, जिसके बारे में दावा है कि वहां घरेलू लिफ्ट तक लगाई जा रही है. मंदिर के आंतरिक प्रबंधन में उनका कद बेहद ऊंचा होने के कारण एसआईटी उनके स्तर पर भी व्यवस्थागत कमियों की बारीकी से जांच कर रही है.

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