लखनऊ। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फुल एक्शन मोड में आ गए हैं। इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही सीएम योगी अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर अलीगढ़ से सीधे लखनऊ पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ घटनास्थल और अस्पताल का दौरा किया, बल्कि देर रात एक हाईलेवल मीटिंग बुलाकर लापरवाह सिस्टम पर कड़ा हंटर चलाया है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश पर अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बिजली, फायर ब्रिगेड और एलडीए (LDA) के 4 बड़े अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
अलीगढ़ का मंच छोड़ सीधे अस्पताल और घटनास्थल पहुंचे मुख्यमंत्री
जिस वक्त लखनऊ के अलीगंज में यह खौफनाक मंजर पैदा हुआ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ के एक सरकारी दौरे पर जनता को संबोधित कर रहे थे। मंच पर ही उन्हें इस हादसे की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्यक्रमों को रद्द करने का एलान किया और तुरंत लखनऊ के लिए रवाना हो गए। हालांकि, लखनऊ पहुंचने से पहले ही उन्होंने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और आलाधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य तेज करने के निर्देश दे दिए थे।
लखनऊ लैंड करते ही सीएम योगी सबसे पहले सीधे ग्राउंड जीरो (घटनास्थल) पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद वह किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) गए, जहां उन्होंने भर्ती घायलों का हाल-चाल जाना और डॉक्टरों को उनके मुफ्त और बेहतरीन इलाज के सख्त निर्देश दिए। सीएम ने इस हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का बड़ा एलान किया है।
5 कालिदास मार्ग पर हाईलेवल मीटिंग और SIT का गठन
अस्पताल से लौटते ही मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास (5 कालिदास मार्ग) पर आपातकालीन हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इस बैठक में शासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सीएम योगी के निर्देश पर मामले की तह तक जाने के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी की कमान अपर मुख्य सचिव (अमृत अभिजात) और अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन (प्रवीण कुमार) को सौंपी गई है, जिन्हें 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी होगी।
4 गिरफ्तार, 4 अधिकारी सस्पेंड; अब बड़े अफसरों की बारी!
इस अग्निकांड में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सरकार ने चौतरफा कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए हादसे के जिम्मेदार 4 अभियुक्तों—रामकृष्ण उपाध्याय (अलीगंज), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (सीतापुर रोड), तूशॉक कृष्णा जायसवाल (बालागंज) और सुरेश कुमार साहू (मड़ियांव) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
इसके साथ ही, सरकारी विभागों में बैठे लापरवाह कर्मचारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के आदेश पर जिन 4 अफसरों को सस्पेंड किया गया है, उनमें शामिल हैं:
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गौरव कुमार (एक्सियन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम)
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कमलेन्द्र कुमार सिंह (FSSO प्रभारी, फायर विभाग, इंदिरा नगर)
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अनिल कुमार (असिस्टेंट इंजीनियर – AE, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
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प्रमोद पांडे (जूनियर इंजीनियर – JE, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
सूत्रों की मानें तो यह तो सिर्फ शुरुआत है। 7 दिनों में आने वाली SIT की रिपोर्ट के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम के कई ‘बड़े साहबों’ पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है, जिन्होंने सालों से इस अवैध निर्माण को सह दी थी।















