कम्पलीट लॉकडाउन! आधे घंटे ने बढ़ाई लखनऊ की धड़कन-देखे ये तस्वीरे


-सब्जी, फल-फूल, दूध व किराना की दुकानों पर यकायक बढ़ी भीड़
-घनघाने लगे मोबाइल फोन, बंधाने लगे एकदूसरे को ढांढस
लखनऊ।( सोमवार शाम के तकरीबन छह-सवा छह बजे होंगे कि अचानक सोशल मीडिया पर यह मैसेज जैसे ही वॉयरल हुआ कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को पांच प्रमुख कोरोना संक्रमित शहरों लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, गोरखपुर व वाराणसी में आगामी 26 अप्रैल तक संपूर्ण लॉकडाउन लगाने का निर्देश दिया है तो राजधानी में आपाधापी का माहौल बन गया।

अभी तक तो रविवार का पहला वीकली लॉकडाउन बीता ही था और ठीक दूसरे दिन ऐसे सूचना प्रसारित होने से लखनऊ वासियों के मन-मस्तिष्क में तमाम तरह की आशंकायें बैठ गर्इं। ऐसे में पुराने लम्बे लॉकडाउन के दौर को ध्यान में रखते हुए शहर के जिस भी एरिया, कॉलोनी, गली-मोहल्ले में जो भी जिस अवस्था में सीधे बाजार की तरफ रुख करने लगा। कुछ ही देर में जो सड़कों पर राहगीरों के साथ वाहनों का आना-जाना भी बढ़ गया। लॉकडाउन की आशंका से लोग सब्जी, फल-फूल, दूध, किराना आदि की दुकानों पर जमा होने लगे और एडवांस में चीजें खरीदने लगे।

हालांकि उक्त मैसेज के बाद यूपी सरकार प्रवक्ता की तरफ से जब यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश सरकार ठोस कदम उठा रही है और अभी पांच शहरों में कम्प्लीट लॉकडाउन नहीं लगेगा तो इसके बाद स्थितियां फिर से सामान्य होने लगी। वहीं दूसरी तरफ जैसे ही यह बात उड़ी कि लॉकडाउन होने जा रहा है, तो तमाम लोगों के मोबाइल फोन घनघान लगे और लोग एकदूसरे का हालचाल पूछने लगे और साथ ही यह भी सीख देने लगे कि जरूरत के सामान एडवांस में खरीद लें। कुल मिलाकर तकरीबन आधे घंटे का जो लॉकडाउन लगाये जाने का माहौल रहा वो राजधानी लखनऊ में काफी हलचल मचाने वाला रहा।

मदिरा की दुकानों पर लगा जमघट, उड़ी नियमों की धज्जियां
लखनऊ। सोशल मीडिया पर जब लखनऊ में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की बात उड़ी तो सबसे पहले जहां भीड़ बढ़नी शुरू हुई वो मदिरा की दुकानें रहीं। आलम यह रहा कि हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में अटल चौक से चंद कदम दूर नवल किशोर रोड व अशोक मार्ग सहित आसपास की जितनी भी शराब, बीयर व देसी की दुकानें रहीं वहां पर चंद मिनटों में खरीददारों का जमघट लग गया। खुद जो दुकानदार सुबह से दोपहर तक खाली बैठे थे अचानक बढ़ी भीड़ को लेकर वो फूले नहीं समा रहे थे। 

हालांकि ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल के तहत जो बीते दिनों अपर मुख्य सचिव आबकारी की तरफ से सभी शराब दुकानदारों के लिये जो कोरोना गाइडलाइन अनुपालन के निर्देश जारी किये गये थे, हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं दिखा। सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर-दूर तक नजर नहीं आया और नये आबकारी नियमों के तहत जो प्रति व्यक्ति शराब बिक्री किये जाने के मद्देनजर प्रोटोकॉल शासन द्वारा निर्धारित किया गया था उसका भी अनुपालन इस आपाधापी के माहौल में कहीं पर भी नहीं दिखा। बस दुकानदार पूरी तरह बेपरवाह होकर पेटी-पेटी उठाकर शराब खरीददारों को बेचे जा रहे थे। कहीं-कहीं तो ओवररेटिंग पर भी शराब बेचे जाने की सूचनायें मिली।

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