नवरात्रि की रात 16 वर्षीय नाबालिग से दरिंदगी करने वालों को उम्रकैद, 22 महीने बाद वडोदरा कोर्ट ने सुनाया फैसला

वडोदरा। गुजरात के बहुचर्चित भायली गैंगरेप मामले में करीब 22 महीने बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। वडोदरा की अदालत ने मामले को बेहद गंभीर और जघन्य अपराध बताते हुए प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके साथ ही पीड़िता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश सरकार को दिया गया है।

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नयन सुखड़वाला के मुताबिक, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज सीएम पवार ने पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने घटना से जुड़े प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए थे।

पांचों दोषियों को उम्रकैद

अदालत ने जिन पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनके नाम हैं—

  • मुन्ना अब्बास बंजारा
  • मुमताज उर्फ आफताब सुबेदार बंजारा
  • शाहरुख किस्मतअली बंजारा
  • सैफअली महेंदीहसन बंजारा
  • अजमल सतार बंजारा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने माना कि मामले में पेश किए गए सबूत मजबूत हैं और उनमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। नयन सुखड़वाला ने कहा कि अदालत ने महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों को बेहद गंभीर माना है।

नवरात्रि की रात हुई थी वारदात

यह मामला 4 अक्टूबर 2024 की रात का है। नवरात्रि के दौरान जब वडोदरा में जगह-जगह गरबा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, उस समय 16 वर्षीय किशोरी अपने पुरुष मित्र के साथ बाहर थी। आरोप है कि भयली इलाके में पांच आरोपियों ने उन्हें सुनसान रास्ते पर रोक लिया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने किशोरी के पुरुष मित्र को बंधक बना लिया और इसके बाद नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि वह रात करीब 11 बजे लक्ष्मीपुरा इलाके में अपने बचपन के दोस्त से मिलने गई थी। इसके बाद दोनों स्कूटी से भयली इलाके की ओर गए थे।

मोबाइल छीनकर नदी में फेंकने का आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वारदात के दौरान पीड़िता का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया था और उसे विश्वामित्री नदी में फेंक दिया गया। पुलिस और दमकल विभाग की टीम ने फोन बरामद करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। हालांकि, अदालत ने फोन छीने जाने और नदी में फेंके जाने से जुड़े साक्ष्यों को मामले में स्वीकार किया।

CCTV फुटेज भी बने अहम सबूत

मामले की जांच के दौरान इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 26 CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की गई, जिनमें से तीन कैमरों में आरोपी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। अदालत ने इन फुटेज को भी साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया।

इसके अलावा पीड़िता और उसके साथ मौजूद पुरुष मित्र के बयान को भी अभियोजन पक्ष ने अहम प्रत्यक्ष साक्ष्य के रूप में पेश किया। पीड़िता ने घटना के बाद सबसे पहले अपने भाई और मां को इसकी जानकारी दी थी। उनके बयान भी मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्य का हिस्सा बने।

अदालत ने अपराध को बताया बेहद गंभीर

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नयन सुखड़वाला के अनुसार, अदालत ने कहा कि समाज में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और किसी महिला या नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म बेहद गंभीर अपराध है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि नवरात्रि जैसे पर्व के दौरान हुई ऐसी घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

फैसले के बाद करीब 22 महीने से न्याय का इंतजार कर रही पीड़िता के मामले में अदालत की प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हुआ है। पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा के साथ पीड़िता के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश भी दिया गया है।

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