छात्रों के लिए बड़ी राहत: बिहार सरकार वापस लेगी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR, तेज प्रताप समेत 355 लोग होंगे रिहा, गृह विभाग का निर्देश जारी

पटना। राज्य में हालिया छात्र आंदोलनों और नीट पेपर लीक प्रदर्शनों को लेकर बिहार सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। गृह विभाग की ओर से जारी ताजा निर्देशों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने तथा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, शिकायतें और नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक हुए आंदोलनों से जुड़े किसी भी छात्र या व्यक्ति के खिलाफ अब कोई नई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

बातचीत से समाधान और छात्रों के हितों की रक्षा पर जोर

गृह विभाग के विशेष सचिव द्वारा की गई इस घोषणा को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि वह प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए दंडात्मक कदमों के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहती है। सरकार के इस कदम से महीनों से जेल में बंद या अदालती कार्रवाई का सामना कर रहे हजारों छात्रों और उनके परिजनों को बहुत बड़ी राहत मिली है।

तेज प्रताप यादव समेत 355 लोग होंगे जेल से बाहर

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, NEET पेपर लीक प्रदर्शनों के दौरान राज्य भर में 355 लोगों को जेल भेजा गया था, जबकि 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। जेल जाने वालों में जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव भी शामिल हैं। गृह विभाग के इस नए आदेश के बाद अब संबंधित जिलों का प्रशासन इन सभी की जल्द रिहाई और मुकदमों की वापसी की कानूनी प्रक्रिया में जुट गया है।

26 जुलाई शाम 6 बजे के बाद की घटनाओं पर नियम लागू नहीं

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी भी जारी की है कि यह राहत केवल 26 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे तक हुए प्रदर्शनों पर ही लागू होगी। इसके बाद यदि कोई भी व्यक्ति या समूह कानून-व्यवस्था को हाथ में लेता है या हिंसक गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। भविष्य के लिए छात्रों को पूर्ण राहत देते हुए शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

राजनीतिक दबाव और केंद्र के फैसलों के बाद बड़ा कदम

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार के कड़े रुख के बाद बिहार सरकार के इस फैसले को राजनीतिक हलचलों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के कारण उपज रहे भारी जनआक्रोश और राजनीतिक तूफान को शांत करने के लिए यह अहम निर्णय लिया है।

 

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