ज्वाला गुट्टा ने पेश की इंसानियत की अनूठी मिसाल, मां बनने के बाद डोनेट किया 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क, दुआएं दे रहे लोग

    1. मिल्क बैंक से संपर्क: सबसे पहले अपने शहर के नजदीकी ह्यूमन मिल्क बैंक या ऐसे सरकारी/निजी अस्पताल से संपर्क करें जहां एनआईसीयू (NICU) की सुविधा चालू हो।
    1. मेडिकल स्क्रीनिंग: इसके बाद मिल्क बैंक की टीम डोनर मां का एक छोटा सा इंटरव्यू लेती है और उनके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट (HIV, हेपेटाइटिस B और C) देखती है ताकि दूध की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
    1. कंटेनर और किट की उपलब्धता: डोनर के तौर पर अप्रूवल मिलने के बाद मिल्क बैंक की तरफ से मां को विशेष स्टेरलाइज्ड (कीटाणुमुक्त) बोतलें, बैग और आवश्यकतानुसार मिल्क पंप उपलब्ध कराए जाते हैं।
    1. दूध निकालना और स्टोर करना: मां पूरी तरह साफ-सुथरे माहौल में अपने हाथों को अच्छी तरह धोकर दूध एक्सप्रेस (निकालती) हैं। इसके बाद इस बोतल पर तारीख और समय लिखकर इसे तुरंत घर के फ्रीजर (-18°C या उससे कम) में रख दिया जाता है।
    1. फ्री पिक-अप और कलेक्शन: अमारा या सेवबेबीज जैसी कई प्रतिष्ठित संस्थाएं कोल्ड-चेन कंटेनर के जरिए डोनर मां के घर से मुफ्त में दूध पिक-अप करने की सुविधा देती हैं। इसके अलावा माताएं खुद भी नजदीकी बैंक में जाकर इसे जमा करा सकती हैं।
 

नई दिल्ली: भारतीय बैडमिंटन की स्टार खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता ज्वाला गुट्टा इस समय खेल के मैदान से दूर होने के बावजूद देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दरअसल, ज्वाला गुट्टा ने मां बनने के बाद अपने पहले साल (पोस्टपार्टम पीरियड) के दौरान कुछ ऐसा किया है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। उन्होंने मानवता की एक बेमिसाल कहानी लिखते हुए करीब 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क (मां का दूध) दान किया है। खेल के मैदान पर विरोधियों के छक्के छुड़ाने वाली इस चैंपियन ने अब ममता और सेवा की एक नई इबारत लिख दी है, जिसकी चारों तरफ जमकर सराहना हो रही है। ज्वाला गुट्टा ने खुद इस बात की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करके दी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह 60 लीटर दूध हैदराबाद और चेन्नई के सरकारी अस्पतालों में बने ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ को डोनेट किया है ताकि नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सके।

मासूमों की जिंदगी बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम

ज्वाला गुट्टा के इस बड़े कदम के पीछे का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों के नवजात गहन देखभाल इकाई (NICU) में भर्ती अत्यंत कमजोर और बीमार मासूम बच्चों की जान बचाना है। दरअसल, अस्पतालों के एनआईसीयू में कई ऐसे नवजात बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे होते हैं, जो समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा हो जाते हैं। इसके अलावा कई बच्चे शारीरिक रूप से इतने कमजोर होते हैं या किसी गंभीर मेडिकल जटिलता का सामना कर रहे होते हैं कि उन्हें तुरंत उनकी अपनी मां का दूध नसीब नहीं हो पाता। ऐसे बच्चों के लिए यह डोनेट किया गया दूध किसी अमृत से कम नहीं है।

महज 100 मिलीलीटर दूध से बच सकती है कई दिनों तक जान

स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी ने इस मुहिम के महत्व को समझाते हुए बताया कि दान किए गए महज 100 मिलीलीटर दूध से 1 किलोग्राम वजन वाले एक नन्हे और कमजोर बच्चे को कई दिनों तक भरपूर पोषण मिल सकता है। ज्वाला गुट्टा द्वारा किए गए इस 60 लीटर दूध के दान से अब तक दर्जनों मासूम बच्चों की जान बचाने और उन्हें नया जीवन देने में मदद मिली है। उनके इस प्रयास को देखकर फैंस से लेकर खेल जगत की तमाम हस्तियां उन्हें सलाम कर रही हैं।

प्रीमैच्योर शिशुओं को जानलेवा बीमारी से बचाता है मां का दूध

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मां का दूध प्रीमैच्योर बच्चों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह समय से पहले पैदा हुए बच्चों में आंतों की एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी ‘नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस’ (Necrotizing Necrotizing Enterocolitis) के खतरे को बहुत कम कर देता है। हालांकि, भारत में अभी भी ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन (स्तन दूध दान) को लेकर जागरूकता का स्तर काफी कम है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ज्वाला गुट्टा ने दूध की थैलियों के साथ तस्वीरें साझा की हैं ताकि अन्य स्वस्थ माताएं भी इस नेक काम के लिए आगे आएं। उन्होंने साफ किया कि यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित और जांची-परखी होती है।

क्या कोई भी मां कर सकती है ब्रेस्ट मिल्क दान?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सच में ब्रेस्ट मिल्क दान किया जा सकता है? तो इसका जवाब है हां। चिकित्सा विज्ञान में इसे नवजात शिशुओं के लिए दुनिया का सबसे अनमोल और जीवन रक्षक उपहार माना गया है। भारत सहित पूरी दुनिया में इसके लिए बाकायदा ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ (Human Milk Banks) संचालित किए जाते हैं। कोई भी स्तनपान कराने वाली मां (Lactating Mother) स्वेच्छा से दूध दान कर सकती है, बशर्ते वह पूरी तरह से स्वस्थ हो और उसे एचआईवी या हेपेटाइटिस जैसी कोई गंभीर संक्रामक बीमारी न हो। इसके साथ ही वह अपनी संतान की जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त दूध (Surplus Milk) का उत्पादन कर रही हो और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों या हानिकारक दवाओं का सेवन न करती हो।

इन बेसहारा और बीमार बच्चों के काम आता है यह अमृत

दान किया गया यह दूध मुख्य रूप से उन बच्चों के काम आता है जो समय से पहले यानी 9 महीने से पहले पैदा हो जाते हैं या जिनका वजन जन्म के समय बेहद कम होता है। इसके अलावा अनाथ या गोद लिए गए बच्चे, जिनकी मां नहीं होती, उन्हें भी यह दूध दिया जाता है। कई बार प्रसव के बाद मां गंभीर रूप से बीमार हो जाती है या उसे पर्याप्त दूध नहीं उतरता, ऐसी स्थिति में मिल्क बैंक में जमा यह दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है।

बेहद सुरक्षित है मिल्क बैंक की प्रक्रिया; ऐसे रखा जाता है ध्यान

ह्यूमन मिल्क बैंक में दूध को बेहद सुरक्षित और पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से स्टोर किया जाता है, जिसमें सुरक्षा के कड़े मानक अपनाए जाते हैं:
    • मेडिकल स्क्रीनिंग: दूध कलेक्ट करने से पहले डोनर मां के स्वास्थ्य और मेडिकल हिस्ट्री की पूरी जांच की जाती है।
    • पाश्चुरीकरण (Pasteurization): दूध में मौजूद किसी भी तरह के बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने के लिए इसे एक निश्चित तापमान पर गर्म और फिर तुरंत ठंडा किया जाता है।
    • लैब टेस्टिंग: पाश्चुरीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रयोगशाला में दूध की शुद्धता और सुरक्षा की दोबारा गहन जांच होती है।
    • डीप फ्रीजिंग: सभी टेस्ट में पास होने के बाद इस सुरक्षित दूध को -20 डिग्री सेल्सियस के कड़े तापमान पर डीप फ्रीज किया जाता है, जिससे यह कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित और पोषक तत्वों से भरपूर रहता है।

भारत के प्रमुख ह्यूमन मिल्क बैंक, जहां कर सकते हैं संपर्क

भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत इन केंद्रों को ‘कॉम्प्रीहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर’ (CLMC) का नाम दिया गया है। देश के प्रमुख शहरों में ये बैंक कार्यरत हैं:
    • दिल्ली-NCR: साकेत और ग्रेटर कैलाश के पास स्थित ‘अमारा मिल्क बैंक’ (Amaara Milk Bank) दिल्ली-एनसीआर में माताओं के घर से भी दूध कलेक्ट करने की बेहतरीन सुविधा देता है।
    • मुंबई: मुंबई का सायन हॉस्पिटल (Lokmanya Tilak Municipal General Hospital) बेहद खास है, क्योंकि यहीं एशिया का सबसे पहला ह्यूमन मिल्क बैंक खुला था। इसके अलावा केईएम (KEM) अस्पताल में भी यह सुविधा है।
    • बेंगलुरु: यहाँ रिचमंड रोड पर ‘ब्रेस्ट मिल्क फाउंडेशन’ और बैंगलोर बैपटिस्ट हॉस्पिटल (हेब्बाल) में दूध दान किया जा सकता है।
    • हैदराबाद: ‘धात्री मिल्क बैंक’ (Dhaatri Milk Bank) निलोफर हॉस्पिटल और रेड हिल्स में अपनी सेवाएं दे रहा है।
    • पुणे और जयपुर: इन दोनों शहरों में ‘सूर्या हॉस्पिटल्स’ (Surya Hospitals) में यह सुविधा मौजूद है।
    • राजस्थान: राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश में ‘आंचल मदर्स मिल्क बैंक’ का एक बड़ा और सफल नेटवर्क चलाया जा रहा है।

दूध दान करने की स्टेप-बाय-स्टेप आसान प्रक्रिया

अगर कोई स्वस्थ मां इस पुनीत कार्य में अपना योगदान देना चाहती है, तो वह इन 5 बेहद आसान चरणों के माध्यम से दूध दान कर सकती है:
    1. मिल्क बैंक से संपर्क: सबसे पहले अपने शहर के नजदीकी ह्यूमन मिल्क बैंक या ऐसे सरकारी/निजी अस्पताल से संपर्क करें जहां एनआईसीयू (NICU) की सुविधा चालू हो।
    1. मेडिकल स्क्रीनिंग: इसके बाद मिल्क बैंक की टीम डोनर मां का एक छोटा सा इंटरव्यू लेती है और उनके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट (HIV, हेपेटाइटिस B और C) देखती है ताकि दूध की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
    1. कंटेनर और किट की उपलब्धता: डोनर के तौर पर अप्रूवल मिलने के बाद मिल्क बैंक की तरफ से मां को विशेष स्टेरलाइज्ड (कीटाणुमुक्त) बोतलें, बैग और आवश्यकतानुसार मिल्क पंप उपलब्ध कराए जाते हैं।
    1. दूध निकालना और स्टोर करना: मां पूरी तरह साफ-सुथरे माहौल में अपने हाथों को अच्छी तरह धोकर दूध एक्सप्रेस (निकालती) हैं। इसके बाद इस बोतल पर तारीख और समय लिखकर इसे तुरंत घर के फ्रीजर (-18°C या उससे कम) में रख दिया जाता है।
    1. फ्री पिक-अप और कलेक्शन: अमारा या सेवबेबीज जैसी कई प्रतिष्ठित संस्थाएं कोल्ड-चेन कंटेनर के जरिए डोनर मां के घर से मुफ्त में दूध पिक-अप करने की सुविधा देती हैं। इसके अलावा माताएं खुद भी नजदीकी बैंक में जाकर इसे जमा करा सकती हैं।
 

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