धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: परिसर में स्ट्रक्चरल बदलाव पर रोक, हर शुक्रवार नमाज के लिए अलग जगह देने का प्रस्ताव

नई दिल्ली:  मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील धार भोजशाला (Dhar Bhojshala Case) मामले में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) की सुनवाई के दौरान एक बेहद अहम और बड़ा मोड़ आया है। हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है।

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने साफ तौर पर आदेश दिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर के भीतर किसी भी प्रकार का कोई भी ढांचागत बदलाव (Structural Changes) नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मामले में हिंदू पक्ष, मध्यप्रदेश राज्य सरकार, धार जिला मजिस्ट्रेट (DM) और एएसआई (ASI) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अब इस महामुकाबले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते में मुकर्रर की गई है।

हाईकोर्ट के फैसले पर तुरंत रोक से इनकार, नमाज पर जारी रहेगा यह नियम

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके तहत परिसर की स्थिति में बदलाव आया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य भोजशाला परिसर के भीतर शुक्रवार को होने वाली नमाज पर रोक फिलहाल बरकरार रहेगी।

हालांकि, नमाजियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च अदालत ने प्रशासन को एक अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए भोजशाला परिसर के पास ही कोई अलग या वैकल्पिक जगह मुहैया कराई जाए।

नमाज के लिए वैकल्पिक जगह पर क्या बोले चीफ जस्टिस?

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच सौहार्द बनाए रखने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा, “क्या भोजशाला परिसर के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली और सुरक्षित जगह उपलब्ध कराई जा सकती है?”

इसके बाद सीजेआई ने मुस्लिम पक्ष की तरफ रुख करते हुए सवाल किया, “क्या हम अंतिम फैसला आने तक आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? हमने पहले भी बसंत पंचमी के दिन एक ऐसी ही अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों को सौहार्दपूर्ण तरीके से पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी। हालांकि, वह आदेश तब था जब मामला अदालत में लंबित था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल जजमेंट आ चुका है।”

“हमें 40 साल बाद बाहर कर दिया गया” – मुस्लिम पक्ष की दलीलें

मुस्लिम पक्ष की ओर से देश के दिग्गज वकील हुजेफा अहमदी और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पुरजोर पैरवी की। सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने बेंच के सामने व्यथा रखते हुए कहा कि शुक्रवार को होने वाली नमाज पर अब पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। हमें उस परिसर से बेदखल कर दिया गया है जहां पिछले 40 सालों से निर्बाध रूप से नमाज चल रही थी। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट से मांग की कि मामले में ‘यथास्थिति’ (Status Quo) को दोबारा बहाल किया जाए।

अदालत में अपनी दलीलें आगे बढ़ाते हुए सीनियर एडवोकेट ए.एम. सिंघवी ने हाईकोर्ट के आदेश के समय पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपना आदेश इस तरह के समय पर पास किया कि हमारे पास ऊपरी अदालत आने का मौका ही नहीं बचा। अगला दिन शनिवार होने के कारण रातों-रात 40 साल से चली आ रही यथास्थिति को बदल दिया गया।” उन्होंने यह भी दावा किया कि मुस्लिम पक्ष यहां साल 1935 से नमाज पढ़ रहा है और शुरुआत में मुस्लिमों ने ही हिंदुओं के लिए यहां जगह की व्यवस्था की थी।

लंदन म्यूजियम से वाग्देवी की मूर्ति लाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट हैरान

इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर गहरी हैरानी और तल्ख टिप्पणी की, जिसमें लंदन के म्यूजियम से मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्राचीन मूर्ति को वापस भारत लाने की बात कही गई थी।

बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने हाईकोर्ट के इस अधिकार क्षेत्र पर कड़ा रुख अपनाते हुए सॉलिसिटर जनरल की तरफ देखा और सवाल दागा, “कोई भी संवैधानिक कोर्ट (Constitutional Court) अंतरराष्ट्रीय मामलों या विदेशी म्यूजियम को लेकर इस तरह का आदेश आखिर कैसे पारित कर सकता है?” सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब जुलाई के तीसरे हफ्ते में होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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