नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शुरू हुई उड़ानें, इन 10 लाजवाब खूबियों के आगे दिल्ली-मुंबई भी रह गए पीछे

नोएडा : उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन इतिहास में आज 15 जून का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है. जेवर में बना दुनिया का छठा और देश का सबसे बड़ा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आज से पूरी तरह क्रियाशील हो गया है. लखनऊ से आई पहली कमर्शियल फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग के साथ ही इस एयरपोर्ट से यात्री उड़ानों का ऐतिहासिक आगाज हो चुका है. देश के एविएशन सेक्टर के लिए गेम चेंजर माना जा रहा यह हवाई अड्डा सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं का एक ऐसा अनोखा संगम है जिसे देखकर दुनिया हैरान है. इस एयरपोर्ट पर कई ऐसी नायाब तकनीकें और सुविधाएं पहली बार पेश की गई हैं, जो वर्तमान में देश के किसी भी अन्य हवाई अड्डे पर उपलब्ध नहीं हैं. आइए जानते हैं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वे 10 बड़ी और अनोखी खूबियां जो इसे सबसे अलग और बेहद खास बनाती हैं.

सफर होगा बेहद आसान, एक ही छत के नीचे मिलेगा ट्रांसपोर्ट हब

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के पहले इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में डिजाइन किया गया है. इस महापरियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को कनेक्टिविटी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. यह हब सीधे तौर पर नमो भारत (रैपिड रेल), बुलेट ट्रेन, दिल्ली मेट्रो, यमुना एक्सप्रेसवे और अंतरराज्यीय बस सेवाओं से जुड़ा हुआ है. उत्तर भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और पैसेंजर गेटवे बनने जा रहा यह हब यात्रियों को बिना किसी परेशानी के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में स्विच करने की आजादी देता है, जिससे समय और श्रम दोनों की भारी बचत होगी.

देश का पहला शत-प्रतिशत ग्रीन एयरपोर्ट, सौर ऊर्जा से चमकेगा जेवर

पर्यावरण संरक्षण के मामले में जेवर एयरपोर्ट ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह भारत का पहला ऐसा एयरपोर्ट है जो पूरी तरह से ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन’ के सिद्धांत पर काम करेगा. इसका सीधा मतलब यह है कि इस विशाल हवाई अड्डे का 100 फीसदी संचालन पूरी तरह सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) के माध्यम से किया जाएगा. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इतनी बड़ी बुनियादी संरचना को चलाना देश के एविएशन सेक्टर में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.

घने कोहरे में भी नहीं रुकेंगी उड़ानें, लगा है CAT-IIIB सिस्टम

सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत और खासकर दिल्ली-एनसीआर के हवाई अड्डों पर विजिबिलिटी बेहद कम होने के कारण उड़ानें ठप हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है. इस समस्या का स्थाई समाधान निकालते हुए नोएडा एयरपोर्ट को अत्याधुनिक ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ (ILS) CAT-IIIB तकनीक से लैस किया गया है. इस एडवांस्ड सिस्टम की मदद से बेहद खराब मौसम और घने कोहरे के बीच भी रनवे पर विमानों की सुरक्षित और सटीक लैंडिंग कराई जा सकेगी.

भारत में पहली बार दौड़ेंगी बिना ड्राइवर वाली पॉड टैक्सियां

इस एयरपोर्ट की सबसे रोमांचक खूबियों में से एक है देश की पहली ड्राइवरलेस पॉड टैक्सी सेवा. जेवर एयरपोर्ट को पास ही बन रही फिल्म सिटी से जोड़ने के लिए लगभग 14-15 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिसे 2028 के मध्य तक पूरी तरह शुरू करने का लक्ष्य है. यह एक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक और स्वचालित परिवहन प्रणाली होगी. इसके अलावा एयरपोर्ट के विशाल टर्मिनल के भीतर भी यात्रियों को एक छोर से दूसरे छोर तक तेजी से पहुंचाने के लिए छोटी-छोटी ऑटोमेटेड पॉड कैब्स का इस्तेमाल किया जाएगा, जो भारत के किसी एयरपोर्ट पर पहली बार देखने को मिलेगा.

आसमान पर रखेगा पैनी नजर, बनकर तैयार हुआ देश का सबसे आधुनिक ATC टावर

हवाई यातायात को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए यहां देश का सबसे आधुनिक और ऊंचा एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर खड़ा किया गया है. 38 मीटर ऊंचे इस भव्य टावर को विमानों के बेहतर और सुरक्षित संचालन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को सौंप दिया गया है. इस टावर में लगी आधुनिक मॉनिटरिंग प्रणालियां विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के समय पायलटों को सटीक दिशा-निर्देश देने में सक्षम हैं.

टिकट और आईडी का झंझट खत्म, फेशियल रिकग्निशन से पेपरलेस एंट्री

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों को कतारों से मुक्ति दिलाने के लिए ‘डिजिटल फर्स्ट’ अप्रोच को अपनाया गया है. यह देश का पहला ऐसा पूरी तरह से इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ‘डिजी यात्रा’ (DigiYatra) पर आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लगाया गया है. अब यात्रियों को गेट पर कागजी टिकट या फिजिकल आईडी दिखाने की कोई जरूरत नहीं होगी. यात्री का चेहरा ही उसका बोर्डिंग पास होगा, जिससे प्रवेश से लेकर विमान में बैठने तक की पूरी प्रक्रिया टच-फ्री और महज कुछ मिनटों में पूरी हो जाएगी.

टर्मिनल में कदम रखते ही दिखेंगे बनारस के घाट और ऐतिहासिक हवेलियां

आधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद यह एयरपोर्ट भारतीय संस्कृति की जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है. इसके शानदार इंटीरियर को विश्व प्रसिद्ध वाराणसी (बनारस) के घाटों और पारंपरिक उत्तर भारतीय हवेलियों की थीम पर खूबसूरती से तराशा गया है. जैसे ही कोई यात्री इस हवाई अड्डे के मुख्य टर्मिनल में कदम रखेगा, उसे बनारस के जीवंत घाटों की सांस्कृतिक झलक और भव्यता का जीवंत अहसास होगा, जो विदेशी मेहमानों के लिए भारत की समृद्ध विरासत की पहली सुखद बानगी बनेगा.

लंबी लाइनों को कहें अलविदा, लागू हुआ ‘नो क्यू’ चेक-इन सिस्टम

अक्सर एयरपोर्ट्स पर चेक-इन के लिए लगने वाली लंबी और उबाऊ कतारें यात्रियों का मूड खराब कर देती हैं. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए जेवर एयरपोर्ट पर आधुनिक ‘नो क्यू’ (शून्य-कतार) चेक-इन सिस्टम को लागू किया गया है. पूरी तरह से ऑटोमेटेड और डिजिटल प्रणालियों के कारण यात्री बिना किसी कतार में खड़े हुए सीधे अपना चेक-इन पूरा कर सकते हैं. डिजिटल तकनीकों का ऐसा इस्तेमाल यात्रियों को एक तनावमुक्त यात्रा का अनुभव कराएगा.

वैश्विक ब्रांड्स के साथ मिलेगा देसी स्ट्रीट फूड का असली स्वाद

खाने-पीने के शौकीन यात्रियों के लिए यह एयरपोर्ट किसी जन्नत से कम नहीं होने वाला है. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के ब्रांड्स जैसे KFC और Subway और मशहूर बेवरेज आउटलेट्स जैसे Chai Point और Chaayos के साथ-साथ एक विशेष ‘देसी स्ट्रीट फूड कॉर्नर’ भी बनाया गया है. इस कॉर्नर पर देश के कोने-कोने के मशहूर और लजीज स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा, जिससे चेक-इन के बाद अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे यात्रियों का सफर जायकेदार बन जाएगा.

सुरक्षा जांच के बाद सुकून का अहसास कराएगा यह खास कोर्टयार्ड

आमतौर पर सुरक्षा जांच (Security Check) की प्रक्रिया पूरी करने के बाद यात्री थकावट महसूस करते हैं. यात्रियों के इसी तनाव को दूर करने के लिए टर्मिनल के अंदर सिक्योरिटी होल्ड एरिया के ठीक बाद एक विशेष और भव्य ‘कोर्टयार्ड’ (खुला प्रांगण) विकसित किया गया है. बेहद खूबसूरत और शांतिपूर्ण ढंग से डिजाइन किया गया यह कोर्टयार्ड यात्रियों को उड़ान भरने से पहले एक अलग ही स्तर का आराम, सुकून और प्रीमियम लग्जरी का अनूठा अनुभव प्रदान करता है.

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