मिडिल ईस्ट महाजंग से कच्चे तेल में लगी आग, $84 के पार पहुंचा क्रूड; क्या फिर आम जनता पर फटेगा महंगाई का बम?

नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच भड़की जंग अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में दोनों ओर से जारी ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर डराने लगी हैं. हर रोज तूफानी रफ्तार से भाग रहे क्रूड ऑयल के भाव ने दुनिया भर के देशों की टेंशन बढ़ा दी है. सोमवार तक जो कच्चा तेल 80 डॉलर के आसपास शांति से ट्रेड कर रहा था, वह मंगलवार को अचानक छलांग लगाकर 84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में जोरदार उछाल

होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी भीषण घमासान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर देखने को मिल रहा है. मंगलवार को ब्रेंट क्रूड से लेकर मर्बन क्रूड तक के भाव लाल निशान के साथ ऊपर की ओर दौड़ते नजर आए. ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमत उछलकर 84.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी तेजी दिखाते हुए 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया. इसके अलावा, मर्बन क्रूड की कीमत में भी बड़ा उछाल देखा गया और यह 79.34 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही थी. तेल की इन बढ़ती कीमतों ने दुनिया में एक बार फिर से बेकाबू महंगाई का खतरा पैदा कर दिया है.

क्यों वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘लाइफलाइन’ है होर्मुज स्ट्रेट?

अमेरिका-ईरान युद्ध में इस समय सबसे संवेदनशील और अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है. सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण यह समुद्री मार्ग ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच स्थित है. यह रास्ता महज 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन दुनिया की कुल तेल और गैस की जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत (यानी पांचवां हिस्सा) इसी संकरे रूट के जरिए सप्लाई होता है.

यही वजह है कि इस रूट पर मामूली सी रुकावट भी भारत समेत तेल आयात पर निर्भर तमाम देशों के लिए मुसीबत का सबब बन जाती है. इससे पहले भी जब मिडिल ईस्ट में 100 दिनों से ज्यादा समय तक संकट चला था, तब पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन और भारत में तेल-गैस की भारी किल्लत हो गई थी और घरेलू बाजारों में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी (LPG) के दाम आसमान पर पहुंच गए थे.

ट्रंप के कड़े तेवर: क्या $120 के पार निकल जाएगा कच्चा तेल?

दुनिया भर के नीति निर्माताओं के दिमाग में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह संघर्ष पहले से ज्यादा लंबा खिंचेगा और क्या क्रूड फिर से 120 डॉलर के पार चला जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने इन आशंकाओं को और हवा दे दी है. ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत करना महज समय की बर्बादी है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के अलावा ईरान की तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ‘खार्ग आइलैंड’ (Kharg Island) को निशाना बनाया, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा जाएगा. आपको बता दें कि ईरान अपने कुल तेल निर्यात का करीब 90 फीसदी हिस्सा इसी खार्ग आइलैंड ऑयल टर्मिनल के जरिए दुनिया भर में भेजता है. यदि ट्रंप के टारगेट पर ईरान के ये ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर आते हैं, तो कच्चे तेल का 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना लगभग तय है, जिससे दुनिया भर में हाहाकार मच सकता है.

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