कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे खूनी संघर्ष में अब तकनीक और हथियारों की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है। इस युद्ध में ड्रोन सबसे घातक और निर्णायक हथियार बनकर उभरे हैं। रूस लंबे समय से ईरानी ‘शाहेद’ ड्रोन के जरिए यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है, लेकिन अब यूक्रेन ने भी अपनी रक्षा तकनीक और उत्पादन क्षमता में क्रांतिकारी इजाफा कर लिया है। हाल ही में यूक्रेन द्वारा एक दिन में रूस पर करीब 800 ड्रोन दागे जाने के दावे ने दुनिया का ध्यान इस ओर फिर से खींच लिया है।
रोजाना हो रहा है हजारों ड्रोनों का बंपर उत्पादन
यूक्रेन ने अपनी रक्षा विनिर्माण क्षमता को इस स्तर तक पहुंचा दिया है कि वह अब केवल रूसी हमलों का बचाव ही नहीं कर रहा, बल्कि रूस की सीमा के भीतर घुसकर सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को तबाह कर रहा है। कम लागत, तेज उत्पादन और युद्ध के मोर्चे से मिलने वाले लाइव फीडबैक के आधार पर तकनीक में तेजी से बदलाव करना यूक्रेन की बड़ी ताकत बन गया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन सालाना करीब एक करोड़ ड्रोन तैयार कर रहा है, जिसका मतलब है कि औसतन रोजाना 27,000 से 30,000 ड्रोन बन रहे हैं। इनमें एफपीवी (FPV), सामरिक, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन शामिल हैं, जिनमें से युद्ध के मोर्चे पर रोजाना लगभग 7,000 से 9,000 ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। साल 2022 में जहां उत्पादन कुछ हजार सालाना था, वह 2025 में बढ़कर करीब तीन लाख और 2026 की शुरुआत में आठ लाख से अधिक सालाना क्षमता तक पहुंचने का दावा किया गया है।
सस्ते और अचूक हथियारों से रूस को दे रहा टक्कर
रूस के महंगे ड्रोन और मिसाइल हमलों का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन ने कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन, मोबाइल फायर यूनिट और स्वचालित एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों पर भारी फोकस किया है। साल 2025 में रूस ने जहां 54,000 से ज्यादा शाहेद ड्रोन दागे, वहीं यूक्रेन ने ऐसे किफायती विकल्प विकसित किए जिनकी लागत पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले बेहद कम है। अब ये लंबी दूरी के ड्रोन रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, हथियारों के गोदामों और सैन्य अड्डों को आसानी से निशाना बना रहे हैं।
निजी कंपनियों की भूमिका और ‘स्पाइडरवेब’ अभियान का असर
यूक्रेन के इस ड्रोन उद्योग में 500 से अधिक निजी कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जो मुख्य रूप से FPV ड्रोन का उत्पादन करती हैं। युद्ध के मैदान में तैनात इंजीनियरों के अनुभव के आधार पर इनमें हफ्तो-दो हफ्तों में आधुनिक बदलाव कर दिए जाते हैं, जिससे नए और एडवांस मॉडल तुरंत तैयार हो जाते हैं।
जून 2025 में चलाए गए ‘स्पाइडरवेब’ अभियान ने इस रणनीति की ताकत को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया था, जब बेहद सीमित लागत वाले ड्रोनों के जरिए रूस के कई एयरबेस को निशाना बनाकर भारी नुकसान पहुंचाया गया था। इससे यह साफ हो गया है कि आधुनिक युद्धों में केवल महंगे और भारी हथियार ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर कम लागत वाले ड्रोन उत्पादन और युद्ध के अनुभव से सीखने की क्षमता भी किसी देश को सबसे ताकतवर बना सकती है।














