लखनऊ। उत्तर प्रदेश देश के सबसे बेहतरीन और आधुनिक हाई-स्पीड रोड कनेक्टिविटी वाले राज्यों की सूची में पहले से ही शीर्ष पर है। गंगा एक्सप्रेसवे से लेकर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के बाद अब यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में एक और सुनहरी कड़ी जुड़ने जा रही है। आज यानी 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश को एक और नया हाई-स्पीड कॉरिडोर ‘लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे’ मिलने जा रहा है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से इस बेहद महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन करेंगे। यह आधुनिक एक्सप्रेसवे न केवल प्रदेश की प्रशासनिक राजधानी लखनऊ को देश की प्रमुख औद्योगिक नगरी कानपुर से सीधे जोड़ेगा, बल्कि आगे चलकर यह यूपी के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ से भी कनेक्ट हो जाएगा।
जाम से मिलेगी मुक्ति: सरोजनीनगर से गंगा घाट तक का सफर हुआ आसान
लगभग 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुआ यह सुपरफास्ट कॉरिडोर कुल 63 किलोमीटर लंबा है। इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत लखनऊ एयरपोर्ट के आगे सरोजनीनगर से होगी, जो कानपुर में गंगा घाट से ठीक पहले जाकर समाप्त होगा। शहरी इलाकों में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से आम जनता को निजात दिलाने के लिए इसे दो मुख्य हिस्सों में डिजाइन किया गया है।
इसका 17.5 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह एलिवेटेड (हवा में) सेक्शन होगा, जिसके नीचे से स्थानीय यातायात आसानी से गुजर सकेगा। वहीं, इसका बाकी 45.2 किलोमीटर का हिस्सा ग्रीनफील्ड सेक्शन है, जिसे बिल्कुल नई अधिग्रहीत की गई जमीन पर तैयार किया गया है। इस पूरे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की चौड़ाई 90 मीटर रखी गई है।
भविष्य की तैयारी: 6 लेन का एक्सप्रेसवे बिना अतिरिक्त जमीन के होगा 8 लेन
यह एक्सप्रेसवे वर्तमान में 6 लेन का सुपरफास्ट कॉरिडोर है। इसे इस उन्नत तकनीक और दूरदर्शी सोच के साथ डिजाइन किया गया है कि भविष्य में गाड़ियों का दबाव बढ़ने पर बिना किसी नए भूमि अधिग्रहण के इसे बेहद आसानी से 8 लेन में अपग्रेड किया जा सकेगा। यानी भविष्य के विस्तार के लिए चौड़ाई का इंतजाम पहले ही कर लिया गया है।
लॉजिस्टिक्स के लिए गेमचेंजर: अब ‘नो-एंट्री’ और जाम का झंझट खत्म
इस नए एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ आम जनता के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले भारी कमर्शियल वाहनों और ट्रक ड्राइवरों को होने जा रहा है। अब तक कानपुर और बुंदेलखंड के इलाकों से खनन उत्पाद या अन्य औद्योगिक सामग्रियां लेकर आने वाले ट्रकों को लखनऊ आउटर पर घंटों तक ‘नो-एंट्री’ खुलने का इंतजार करना पड़ता था, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बर्बादी होती थी। अब ये सभी मालवाहक ट्रक बिना किसी रुकावट के सीधे किसान पथ के रास्ते लखनऊ शहर को पार कर अपनी मंजिल की ओर बढ़ सकेंगे, जिससे उत्तर प्रदेश के व्यापार को नई गति मिलेगी।
3 प्रमुख इंटरचेंज और वर्ल्ड क्लास सुरक्षा के कड़े इंतजाम
यात्रियों की सुविधा और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए इस 63 किलोमीटर के दायरे में 3 बड़े इंटरचेंज दिए गए हैं। पहला इंटरचेंज कानपुर रिंग रोड पर, दूसरा नेशनल हाईवे-31 (NH-31) पर और तीसरा लखनऊ रिंग रोड यानी नेशनल हाईवे-27 (NH-27) पर बनाया गया है। सुरक्षा के मानकों पर भी यह एक्सप्रेसवे वैश्विक स्तर का है। आवारा पशुओं या किसी भी बाहरी व्यवधान को रोकने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोहे की मजबूत जाली (Fencing) लगाई गई है। साथ ही, आधुनिक सीसीटीवी कैमरों की मदद से एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से 24 घंटे इस रूट की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी।
120 की तूफानी स्पीड, 2 घंटे की दूरी सिर्फ 45 मिनट में सिमटी
इस नए कॉरिडोर पर हल्के वाहनों यानी कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि ट्रकों और बसों जैसे भारी वाहनों के लिए यह लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। वर्तमान में लखनऊ से कानपुर के बीच की लगभग 80 किलोमीटर की पारंपरिक दूरी को तय करने में लोगों को भारी ट्रैफिक के चलते 2 से 3 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह पूरा सफर महज 45 मिनट का रह जाएगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: मुख्य विशेषताएं
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कुल लंबाई: 63 किलोमीटर
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कुल निर्माण लागत: ₹4,200 करोड़
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लेन क्षमता: 6 लेन (भविष्य में 8 लेन का प्रावधान)
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ग्रीनफील्ड हिस्सा: 45.2 किलोमीटर (90 मीटर चौड़ाई)
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एलिवेटेड हिस्सा: 17.5 किलोमीटर
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अधिकतम रफ्तार: कार: 120 किमी/घंटा | भारी वाहन: 100 किमी/घंटा
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सफर का समय: 2-3 घंटे से घटकर मात्र 45 मिनट
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पर्यावरण संरक्षण: निर्माण में 4 लाख क्यूबिक मीटर फ्लाई ऐश का उपयोग, हरियाली के लिए 46,000 पौधे लगाए गए
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हाईटेक सुरक्षा फीचर्स: हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी मॉनिटरिंग, आधुनिक स्ट्रीट लाइट्स, दोनों तरफ मजबूत लोहे की जाली, डिवाइडर क्रैश बैरियर














