
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चढ़ावे में चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एक और नए विवाद में घिर गए हैं। इस बार उन पर अयोध्या के ही एक स्थानीय निवासी ने करोड़ों रुपये के गबन, देवोत्तर जमीन के अवैध सौदे और एक ऐतिहासिक मंदिर पर जबरन कब्जा करने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) को दी गई इस शिकायत के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
चंपत राय और सहयोगियों के खिलाफ SIT में शिकायत
अयोध्या के रहने वाले हरिशंकर सफरीवाला ने SIT को सौंपे अपने शिकायती पत्र में चंपत राय और उनके करीबियों पर कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि वह ‘श्री राम निवास मंदिर, बरहटा, रामकोट (अयोध्या)’ की पंच समिति के प्रमुख हैं, और उन्हें 30 दिसंबर 1987 को तत्कालीन महंत रामगोपाल दास ने नियुक्त किया था। साल 2018 में इस मंदिर के प्रबंधन को विधिवत रजिस्टर्ड कराया गया, जिसके तहत वह मंदिर के मुख्य कार्यपालक और प्रशासनिक प्रमुख हैं।
शिकायत में आरोप है कि चंपत राय और उनके सहयोगियों ने मिलकर मंदिर की संपत्तियों पर अवैध कब्जा किया, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और दान में मिली भारी-भरकम राशि का दुरुपयोग किया।
5 करोड़ 80 लाख की देवोत्तर संपत्ति बेचने का सनसनीखेज आरोप
शिकायतकर्ता हरिशंकर के मुताबिक, उन्होंने 11 अगस्त 2021 को वीरेंद्र दास उर्फ वीरू को मंदिर का महंत नियुक्त किया था। नियुक्ति पत्र में साफ शर्त थी कि समिति की लिखित अनुमति के बिना मंदिर की कोई भी संपत्ति बेची नहीं जा सकती।
आरोप है कि चंपत राय को यह भली-भांति पता था कि यह एक ‘देवोत्तर संपत्ति’ (भगवान की संपत्ति) है, जिसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद, उन्होंने कथित तौर पर अन्य लोगों के साथ मिलकर इस जमीन का करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपये में सौदा तय कर लिया। हरिशंकर का दावा है कि इस सौदे के लिए 70 लाख रुपये बतौर पेशगी (एडवांस) दिए गए और 22 दिसंबर 2022 को एक ‘बयानामा बिना कब्जा’ का दस्तावेज भी रजिस्टर्ड कराया गया, जिसमें चंपत राय की तस्वीर लगी है। आरोप है कि यह 70 लाख रुपये की रकम मंदिर के आधिकारिक खाते में जमा ही नहीं हुई और इसका गबन कर लिया गया।
भगवान के आभूषण, सोने का पलंग और कार्यालय पर कब्जे का दावा
शिकायत में केवल जमीन के सौदे का ही जिक्र नहीं है, बल्कि मंदिर पर जबरन नियंत्रण करने के भी गंभीर आरोप हैं। हरिशंकर सफरीवाला का कहना है कि:
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मंदिर परिसर में मूल पंचों और समिति के सदस्यों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है।
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मंदिर के कार्यालय, अलमारी और फर्नीचर के साथ-साथ भगवान की प्राचीन मूर्तियां, उनके कीमती जेवर, सोने की परत चढ़ा पलंग और सोने-चांदी के बर्तनों को भी अपने कब्जे में ले लिया गया है।
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देवी-देवताओं के आभूषणों का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है, जिसके गायब होने की आशंका है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस संबंध में 2 अगस्त 2024 को एक पंजीकृत नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई न होने पर अब SIT का दरवाजा खटखटाया गया है। इसके अलावा, मंदिर की दुकानों के किरायेदारों से खाली कराने के नाम पर भारी मात्रा में नकद राशि (कैश) वसूलने का भी आरोप लगाया गया है।
SIT के सामने रखी गईं ये 6 प्रमुख मांगें
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कब्जा वापस मिले: श्री राम निवास मंदिर का पूरा नियंत्रण और कब्जा उसकी मूल प्रबंधन समिति (पंचायत समिति) को वापस दिलाया जाए।
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मूर्तियां और आभूषण सुरक्षित हों: भगवान की सभी मूर्तियां और आभूषण सुरक्षित वापस कराए जाएं और उनकी गहनता से जांच हो।
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कार्यालय की बहाली: मंदिर परिसर खाली कराकर पंचायत समिति को उसका कार्यालय, फर्नीचर और सारा सामान लौटाया जाए।
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70 लाख की रिकवरी: फर्जी बयानामे के आधार पर दिए गए 70 लाख रुपये राम जन्मभूमि ट्रस्ट के खाते में वापस जमा कराए जाएं।
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गबन की विस्तृत जांच: SIT यह जांच करे कि इस कथित घोटाले में ट्रस्ट के कौन-कौन से लोग शामिल हैं, कितनी संपत्ति बेची गई और कितने रुपयों की हेराफेरी हुई।
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5 करोड़ का मुआवजा: मंदिर प्रबंधन समिति को हुए भारी नुकसान और मानसिक प्रताड़ना के एवज में कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए।












