राम मंदिर में ‘चढ़ावा कांड’ के बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; 22 जुलाई को ट्रस्ट की महाबैठक…नए महासचिव और खाली पदों पर हो सकता है फैसला

अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पिछले कुछ हफ्तों से बड़े प्रशासनिक और सांगठनिक बदलावों को लेकर सियासी व धार्मिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। राम मंदिर परिसर में दान राशि (चढ़ावे) की गिनती में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर आंतरिक बदलावों का दौर भी शुरू हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर राम मंदिर के भीतर अब सबसे महत्वपूर्ण और चाबी जैसी जिम्मेदारियां किस पदाधिकारी के पास होंगी।

सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, ट्रस्ट ने एक बड़ा कदम उठाते हुए निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि और वरिष्ठ ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास की प्रशासनिक भूमिका को काफी बढ़ा दिया है। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पास जारी करने की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए उनके नाम से एक नई डिजिटल आईडी (Digital ID) जनरेट की गई है। वहीं, दूसरी तरफ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की उन डिजिटल आईडी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है, जिनका इस्तेमाल अब तक वीआईपी और दर्शन पास जारी करने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से इस बड़े तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव पर अभी तक कोई विस्तृत या आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

आरोपी टिन्नू यादव ने किया था पास सिस्टम का दुरुपयोग, सुरक्षा पर उठे सवाल

दरअसल, जांच एजेंसियों और पुलिस की कड़ाई से की गई पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि चढ़ावा चोरी प्रकरण के मुख्य आरोपी टिन्नू यादव ने इसी डिजिटल पास सिस्टम में सेंध लगाई थी। उसने इस वीआईपी पास व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए बेहद संदिग्ध तरीके से बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के लिए मंदिर के प्रवेश पास जारी करवाए थे। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां सिर्फ चोरी गई दान राशि की रिकवरी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि इतनी सुरक्षित व्यवस्था में इतनी बड़ी प्रशासनिक और सुरक्षा चूक आखिर कैसे हुई। इसी सुरक्षा चूक को दुरुस्त करने के लिए ट्रस्ट ने सबसे पहले उस एंट्री और वीआईपी पास संचालन व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लिया है, जहां से श्रद्धालुओं का सीधे प्रवेश होता है।

क्या हैं महंत दिनेंद्र दास की बढ़ी भूमिका के मायने?

महंत दिनेंद्र दास शुरुआत से ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक सम्मानित और सक्रिय ट्रस्टी रहे हैं। लेकिन अब उनके नाम पर नई डिजिटल आईडी एक्टिव होने का सीधा और साफ मतलब यह है कि देश-विदेश से आने वाले विशिष्ट अतिथियों और श्रद्धालुओं के पास जारी करने का पूरा नियंत्रण अब सीधे उनके अधिकार क्षेत्र में आ गया है। यह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसे ट्रस्ट के भीतर शक्ति संतुलन और जिम्मेदारियों के बड़े फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि जिन व्यवस्थाओं पर पहले अन्य शीर्ष पदाधिकारी सीधे नजर रखते थे, उनमें अब महंत दिनेंद्र दास का फैसला और भूमिका सबसे अधिक प्रभावी और निर्णायक होगी। हालांकि, इस विषय पर खुद महंत दिनेंद्र दास महाराज का कहना है कि वर्तमान में कोई बड़ी समस्या नहीं है, मौजूदा सिस्टम अभी भी सुचारू रूप से चल रहा है और उनके पास इसके अलावा कोई अन्य विशेष जानकारी नहीं है।

22 जुलाई को ट्रस्ट की महाबैठक: नए महासचिव और खाली पदों पर हो सकता है फैसला

राम मंदिर के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे को लेकर आगामी 22 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि इस महाबैठक में कई ऐसे कड़े और दूरगामी फैसले लिए जा सकते हैं, जो मंदिर के पूरे सिस्टम को बदल देंगे। बैठक के संभावित एजेंडे में ये मुख्य बिंदु शामिल हैं:

  • नए महासचिव का चयन: चंपत राय की भूमिका और स्वास्थ्य को देखते हुए नए महासचिव के चयन पर गंभीर चर्चा हो सकती है।

  • खाली पदों पर नियुक्तियां: ट्रस्ट के भीतर लंबे समय से खाली चल रहे पदों पर नए योग्य सदस्यों के नामों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

  • पारदर्शी चढ़ावा प्रबंधन: दान में मिलने वाली धनराशि के प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल और फुलप्रूफ बनाने के लिए नई गाइडलाइंस लागू हो सकती हैं।

  • आधुनिक क्राउड मैनेजमेंट: श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक और सुगम बनाने के प्रस्तावों पर मुहर लगेगी।

शेयर बाजार और ब्याज पर लगाई गई चोरी की रकम, 30 बैंक खाते फ्रीज

इसी बीच, अयोध्या पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा चढ़ावा चोरी मामले की कड़ियां जोड़ने पर कई और सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने मंदिर के दानपात्र से जो रकम साफ की थी, उसका एक बड़ा हिस्सा बकायदा शेयर बाजार (Stock Market) में इन्वेस्ट किया गया था, जबकि कुछ रकम को स्थानीय स्तर पर मोटे ब्याज (सुद) पर भी चलाया जा रहा था। आरोपियों ने इस अवैध लेनदेन को छुपाने के लिए अपने सगे-रिश्तेदारों और बेहद करीबी मित्रों के बैंक खातों का ‘रूट’ के तौर पर इस्तेमाल किया था। पहले यह रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती थी और फिर वहां से घूमकर मुख्य आरोपियों के खातों में आती थी। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक तीनों मुख्य आरोपियों से जुड़े करीब 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें उनकी वैध आय से कई गुना अधिक का संदिग्ध लेनदेन मिला है।

आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर छापेमारी; जमीन, नकदी और कार बरामद

चोरी की गई संपत्ति की बरामदगी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। इसी सिलसिले में पुलिस ने मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर की सघन तलाशी ली और उसके परिवार के सदस्यों से घंटों पूछताछ की। इससे पहले दो अन्य सह-आरोपियों लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के ठिकानों पर भी दबिश दी जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, इन छापों के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोने के कीमती आभूषण और एक लग्जरी कार बरामद की गई है। हालांकि, जांच की गोपनीयता को देखते हुए पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस आरोपी के घर से कितनी नकदी मिली है। इसके अलावा, जांच में अनुकल्प मिश्रा के नाम पर खरीदी गई करीब एक एकड़ कीमती जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं। सरकारी कागजातों के मुताबिक यह जमीन करीब 6.7 लाख रुपये में रजिस्ट्री कराई गई थी, जबकि इसकी मौजूदा बाजार कीमत (मार्केट वैल्यू) इससे कई गुना ज्यादा आंकी जा रही है।

अब रामानंदी परंपरा और डिजिटल जवाबदेही पर ट्रस्ट का फोकस

इस पूरे घटनाक्रम से सबक लेते हुए राम मंदिर ट्रस्ट अब सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता। ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता अब पूरे सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की है। आने वाले दिनों में मंदिर के भीतर पूजा-पद्धति, भोग और राग-विराग की पूरी व्यवस्था को मूल ‘रामानंदी संप्रदाय’ की प्राचीन परंपराओं के अनुरूप और अधिक व्यवस्थित व कड़ाई से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, सुरक्षा के घेरे को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल सर्विलांस का दायरा बढ़ाया जा रहा है। कुल मिलाकर, 22 जुलाई की बैठक के बाद अयोध्या राम मंदिर का प्रशासनिक ढांचा एक बिल्कुल नए और बदले हुए स्वरूप में सामने आ सकता है।

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