सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला ट्रेंड चर्चा में है। पतियों की हत्या के मामलों में अचानक आई तेजी ने सबको सन्न कर दिया है। पुणे की सिया, सोनम, मुस्कान और निकिता जैसी महिलाओं के खौफनाक कारनामों की फेहरिस्त में अब एक और नया नाम जुड़ गया है। कभी हनीमून पर धक्का देना, कभी मंगेतर को खाई में गिराना, तो कभी लाश को बाथरूम में दफनाना या ड्रम में बंद करना—कत्ल के इन तरीकों को सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन हरियाणा के रेवाड़ी में जो हुआ, उसने पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के भी होश उड़ा दिए हैं।
शातिर दिमाग और कत्ल का नया ‘फुलप्रूफ’ प्लान
पहले जहां कत्ल की वारदातों में सीधे तौर पर क्रूरता दिखती थी, वहीं अब शातिर पत्नियां और उनके प्रेमी पुलिस से बचने के लिए बेहद हाईटेक और शातिर प्लानिंग करने लगे हैं। कत्ल के बाद एक भी सबूत न छूटे, इसके लिए फॉरेंसिक साइंस को गच्चा देने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला रेवाड़ी से सामने आया है, जहां तन्नु नाम की महिला अपने पति मोनू को रास्ते से हटाना चाहती थी। लेकिन वह नहीं चाहती थी कि किसी को भी इस पर शक हो। उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर मोनू की हत्या को खुदकुशी का रूप देने का एक अनोखा और खतरनाक प्लान तैयार किया।
पोस्टमार्टम को धोखा देने की खौफनाक साजिश
तन्नु का इरादा मोनू को पानी में डुबाकर मारने का था ताकि पूरा मामला सिर्फ एक हादसा या आत्महत्या लगे। इसके लिए सबसे पहले मोनू को किसी तरह बेहोश किया गया और फिर उसी हालत में नदी में फेंक दिया गया। तन्नु और उसके प्रेमी का मानना था कि जब पोस्टमार्टम होगा, तो रिपोर्ट में मौत की वजह सिर्फ ‘डूबना’ (Drowning) आएगी। शरीर पर गला घोंटने, जहर देने, चाकू मारने या मारपीट के कोई निशान नहीं होंगे, जिससे पुलिस सीधे फाइल बंद कर देगी। यह खौफनाक तरीका अमूमन फिल्मों में देखा जाता है, जिसे इस कलयुगी पत्नी ने असल जिंदगी में अंजाम दे डाला।
सफल हो गई थी साजिश, 7 दिनों तक रोने का नाटक
हैरानी की बात यह है कि शुरुआत में तन्नु अपनी इस खौफनाक साजिश में पूरी तरह सफल रही। जब मोनू का शव पानी से निकाला गया और पोस्टमार्टम हुआ, तो डॉक्टरों ने भी मौत की वजह डूबना ही बताया। शरीर पर चोट का एक भी निशान न होने के कारण पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया। मोनू का अंतिम संस्कार भी हो गया। इसके बाद तन्नु पूरे 7 दिनों तक अपने ससुराल में रहकर परिवार के साथ दुख मनाने और रोने-बिलखने का नाटक करती रही। लेकिन कहते हैं न कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और मुजरिम चाहे कितना भी शातिर हो, कोई न कोई गलती जरूर कर बैठता है।
शादी के महज 10 दिन बाद ही बुनने लगी मौत का जाल
रेवाड़ी के रहने वाले मोनू की शादी इसी साल तन्नु से हुई थी। शादी के बाद तन्नु सिर्फ 10 दिन अपने ससुराल में रही और फिर मायके चली गई। असल में तन्नु को मोनू पसंद नहीं था, वह सोनू नाम के एक लड़के से प्यार करती थी और उसी के साथ जिंदगी बिताना चाहती थी। इसी चाहत में उसने मोनू को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की साजिश रची।
8 जून की रात को तन्नु ने मोनू को फोन कर नहर के पास मिलने बुलाया और कहा कि वह अपनी सैलरी भी साथ लेकर आए। मोनू ने अपने घर पर पेट दर्द का बहाना बनाया और डॉक्टर के पास जाने की बात कहकर रात 9 बजे स्कूटी से निकल गया। नहर के किनारे तन्नु का प्रेमी सोनू और उसका एक दोस्त पहले से ही घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही मोनू वहां पहुंचा, उन्होंने उसे दबोच लिया और उसका नाक, मुंह और कान कसकर दबा दिए। जब मोनू पूरी तरह बेहोश हो गया, तो उसे जिंदा ही नहर में फेंक दिया गया।
49 कॉल और एक डिलीट डेटा ने खोल दी पोल
दो दिन बाद जब मोनू की लाश मिली, तो हर कोई इसे आत्महत्या समझ रहा था। लेकिन पुलिस की तफ्तीश और मोनू के परिवार वालों की समझदारी ने इस पूरे केस का रुख पलट दिया। जब पुलिस ने मोनू के मोबाइल की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। 8 जून की रात को तन्नु और मोनू के बीच रिकॉर्ड 49 बार बातचीत हुई थी।
इसके बाद जब पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो दोनों नहर की तरफ जाते हुए दिखाई दिए। पुलिस ने जब तन्नु और सोनू को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो दोनों टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर लिया। कत्ल के बाद मोबाइल का डेटा डिलीट करना ही उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई, जिसने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया और इस सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश हो गया।













